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चिंताजनक:मौसम की बेरुखी के साथ शुरू हुई रोपनी अबतक मात्र 7000 हेक्टेयर में लगा धान

नवादा3 दिन पहले
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  • बारिश के अभाव के चलते अबतक 9 फीसद हो सकी रोपनी, बिचड़ा होने लगा पीला

गांव में अषाढ़ी पूजा के बाद जिले में रोपनी रफ्तार पकड़ रही है लेकिन कम बारिश के चलते किसानों को परेशानी हो रही है। धान रोपनी के लिए निर्धारित 21 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक 10 फीसद धान रोपनी भी नहीं हो पाई है। जिले में 74000 हेक्टेयर में धान की रोपनी होनी है लेकिन अब तक सिर्फ 7000 हेक्टेयर में ही धान का आच्छादन हुआ है। यानी अभी लगभग 9 फीसद ही धान रोपनी हो पाई है। जुलाई माह में मानसून सबसे प्रभावी होता है लेकिन इसी महीने बारिश की कमी के चलते किसान चिंतित हैं। जून में रिकॉर्ड बारिश हुई थी और इससे किसानों को उम्मीद जगी थी लेकिन जुलाई माह में बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें अब मुरझाने लगी है।

जुलाई के दूसरे तीसरे सप्ताह में पानी बारिश नहीं होने के कारण खेतों में धान के बिचड़े और किसानों के चेहरे दोनों पीले होने लगे हैं। बरसात के इस सीजन में अब तक औसत से आधा पानी पड़ने से लोगों को फिर सुखाड़ की चिंता सताने लगी है। खेतों में पानी की जगह फटी दरारें देखकर किसान सुखाड़ की आशंका से सहमे हैं। इस माह अब लगभग 86 एमएम ही यानि सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। रोपनी की मान्य तिथि 21 दिन निकल गए लेकिन जिले भर के कई गांवों में रोपनी शुरू भी नहीं हो पाई है। जबकि पिछले साल अब तक 15 प्रतिशत रोपनी हो गई थी।

जून में रिकॉर्ड बारिश के बाद जुलाई में बूंद बूंद के लिए तरस रहे किसान, औसत से आधी बारिश

बारिश नहीं हुई तो लक्ष्य प्राप्ति कराना होगा मुश्किल
इस साल जिले में 74000 हेक्टयेर में धान लगाने का लक्ष्य है लेकिन मानसून की स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य मुश्किल लग रहा है। नरहट के झिकरूआ में किसान विक्रम सिंह ने चार एकड़ खेत में धान लगाने के लिए करीब चार कठ्ठा जमीन में बिचड़ा डाला था। लेकिन बारिश नहीं होने से पूरी तरह बिचड़ा भी नहीं निकल पाया। सूखे की वजह से खेत में ही कई जगह दरार आ गई। किसान नेता मुसाफिर कुशवाहा ने बताया कि जिले में जून और जुलाई माह में औसत से कम बारिश हुई है इसके चलते रोपनी प्रभावित होगी। सरकार को जिले को सूखाग्रस्त जिला घोषित करना चाहिए।
सूखे खेतों में दरारें पड़ने लगीं
बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। धान के बिचड़े सूखने लगे हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी है। बिचड़े में पीलापन आना शुरू हो गया है। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही, तो धान के पौधे बेकार हो जायेंगे। इस वर्ष तो आधी रोपनी के भी आसार नहीं है। अगर यही स्थिति रही, तो अकाल पड़ जायेगा और खेतों में लगे धान की फसल नष्ट हो जाएंगे।

जुलाई में काफी कम बारिश
जुलाई माह में औसत बारिश 236 एमएम होनी है लेकिन अब तक सिर्फ 86 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से काफी कम है। इस तरह से इस सीजन के जून माह में तो अच्छी बारिश हुई लेकिन जुलाई में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगले एक सप्ताह तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो धान के पैदावार की संभावना कम होने लगेगी।

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