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आधी आबादी आबाद नहीं:16 चुनावों में 5 विस क्षेत्रों से अबतक 80 एमएलए हुए, इनमें सिर्फ 5 महिलाएं

नवादा10 दिन पहले
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  • राजनीतिक दलों की उदासीनता से साधारण घरों की महिलाएं सदन से हो रही हैं दूर
  • 2020 के विधानसभा चुनाव में नवादा जिले के 5 विस क्षेत्रों से 70 उम्मीदवार हैं, जिनमें सिर्फ आठ महिलाएं हैं
  • बाहुबली, धनबली और प्रभावशाली के परिजनों को मिलता रहा है मौका, इसलिए साधारण महिलाओं के लिए दूरी बनी है

बिहार विधानसभा का 17वां चुनाव हो रहा है। लेकिन आधी आबादी अब भी आबाद नहीं है। साधारण और पढ़ी- लिखी महिलाओं के लिए विधानसभा दूर बनी है। दरअसल, महिलाओं को टिकट देने में राजनीतिक दलों की दिलचस्पी कम रही है। ज्यादातर उन महिलाओं को मौका दिए जाते रहे हैं, जिनकी पृृष्ठभूमि बाहुबल, धनबल और प्रभावशाली परिवारों से रही है। 2020 के विस में नवादा जिले पांच विधानसभा क्षेत्रों से स्क्रूटिनी के बाद 70 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन इनमें महिलाओं की तादाद सिर्फ आठ है। इनमें पांच महिलाओं की मजबूत पृृष्ठभूमि है। वारिसलीगंज में भाजपा की निवर्तमान विधायक और अखिलेश सिंह की पत्नी अरूणा देवी और पूर्व विधायक प्रदीप कुमार की पत्नी आरती सिन्हा, हिसुआ में कांग्रेस से पूर्व राज्यमंत्री आदित्य सिंह की पुत्रवधू नीतू कुमारी जबकि नवादा में पूर्व राज्यमंत्री राजबल्लभ प्रसाद की पत्नी विभा देवी राजद से चुनाव मैदान में हैं।

वहीं गोविंदपुर में विधायक कौशल यादव की पत्नी और निवर्तमान विधायक पूर्णिमा यादव चुनावी मैदान में हैं। दूसरी तरफ, साधारण पृृष्ठभूमि की गोविंदपुर से जनता दल सेक्यूलर से हृदया देवी चुनावी मैदान में हैं। रजौली सुरक्षित से जिला पार्षद प्रेमा चौधरी और मूल निवासी समाज पार्टी से प्रियंका देवी निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इसके पहले 2015 के चुनाव में पांचों विधानसभा क्षेत्र से 48 उम्मीदवार थे, जिनमें पांच महिलाएं उम्मीदवार थीं। हिसुआ में एसपी से नीतू कुमारी, नवादा में सीपीआई एमएल से सावित्री देवी, गोविंदपुर में जदयू से पूर्णिमा यादव और बीजेपी से फुला देवी जबकि वारिसलीगंज में बीजेपी से अरूणा देवी को चुनावी मैदान में उतारा था।

2010 में सर्वाधिक 10 महिला उम्मीदवार

यह पहला अवसर नहीं है, जब महिलाएं हाशिए पर हैं। आजादी के बाद 16 चुनाव हुए हैं। अब तक महिलाएं सिर्फ वोटर्स के रूप में इस्तेमाल होती रही हैं। 2010 के चुनाव में 68 उम्मीदवारों में से 10 महिलाएं चुनाव मैदान में थीं। 2010 में सबसे ज्यादा कांग्रेस ने 4 महिलाओं को अवसर दिया था। नवादा में निवेदिता सिंह, हिसुआ में नीतू कुमारी, वारिसलीगंज में अरूणा देवी व रजौली में बसंती देवी को उम्मीदवार दिया था। भाकपा माले ने रजौली में सुदामा देवी व नवादा में सावित्री देवी को उतारा था। जदयू ने पूर्णिमा यादव को नवादा व जेएमएम ने सुशीला देवी को गोविंदपुर से उतारा था। वारिसलीगंज में जनता दल सेक्यूलर ने जूली कुमारी व इंडिया जननायक कांची ने तनुजा को मौका दिया था।

8 बार गायत्री देवी व उनकी बहू बनी एमएलए
अबतक पांच विस क्षेत्रों से 80 नेताओं को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इनमें महिलाओं की संख्या सिर्फ 14 है। खास बात कि 8 बार गायत्री देवी और उनकी पुत्रवधू पूर्णिमा यादव निर्वांचित हुईं। महिलाओं की संख्या के हिसाब से देखें तो सिर्फ 5 महिलाओं को राजनीति में अवसर मिला। गायत्री देवी 3 बार गोविंदपुर और एक बार नवादा से निर्वाचित हुई थीं। जबकि पुत्रवधू पूर्णिमा यादव 4 बार नवादा से निर्वाचित हुई हैं। अरूणा देवी तीन बार वारिसलीगंज क्षेत्र से निर्वाचित हुईं। शांति देवी एक बार रजौली से निर्वाचित हुईं। हिसुआ में राजकुमारी देवी दो बार निर्वाचित हुई। 1962 के बाद किसी महिला को हिसुआ में प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला।

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