आस्था:सुहागिनों की गोद हो रही थी सूनी, रक्षा के लिए 1935 में स्थापित की गई भगवती की मूर्ति, फिर नहीं आई महामारी

नवादा22 दिन पहलेलेखक: अशोक प्रियदर्शी
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  • नवादा के अकबरपुर के पचगांवा निवासी जमींदार बुंदी लाल की पहल पर स्थापित हुई थी देवी-देवताओं की प्रतिमा

29 अक्टूबर 1935 की बात है। नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के पचगावां और आसपास काॅलरा, हैजा होता था। सिंदुर पहननेवाली सुहागिन नही थी। अधिकतर महिलाएं की मांग और गोद सूनी हो गई। इलाके में त्राहिमाम मचा था। पचगांवा निवासी स्थानीय जमींदार बुंदी लाल की लाडली पोती राजकिशोरी देवी भी डायरिया से ग्रसित हो गईं। विनय कुमार सिन्हा बताते हैं कि उनके परदादा बुंदी लाल की तब रजौली के सिंगर में जमींदारी थी, जहां भगवती की पूजा होती थी। वहीं से पचगावां में प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा की शुरूआत हुई।

दरअसल, एक ब्राह्मण ने यह सुझाव दिया था। उसके बाद यह पहल किया गया था। तब से कभी डायरिया और कोलरा से किसी की मौत नही हुई। उसके बाद से यह सिलसिला जारी है। खास कि यहां मां भगवती की अराधना दुर्गा पूजा के बजाय दीपावली के बाद की जाती है। यह प्रतिमा दिवंगत जमींदार बंुदी लाल के परिसर में अवस्थित होती आ रही है। मां काली, मां लक्ष्मी सरस्वती के अलावा कार्तिक, गणेश और शंकर की प्रतिमा बिठाई जाती है। फिर विसर्जन के पहले कंधे पर बिठाकर पूरे गांव में घुमाया जाता है। ग्रामीण बड़ी श्रद्धा से उनकी अराधना करते हैं।

चार पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

बुंदी लाल के चार पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है। विनय कुमार सिन्हा बुंदी लाल के चैथी पीढ़ी हैं। पूजारी भी पीढ़ी दर पीढ़ी आ रही है। फिलहाल अरविंद कुमार पूजारी हैं। इसके पहले वासुदेव सहाय करते रहे। दूसरी तरफ, पुरोहित की भी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। गोपाल पांडेय उसी पीढ़ी के पुरोहित हैं। हालांकि मूर्ति स्थापित करने की शुरूआत बेलछी के नंदलाल पांडेय ने की थी।
होती है हर मुरादें पूरी

मुन्ना सिंह, डाॅली कुमारी, अमित कुमार समेत अनेक ग्रामीण कहते हैं कि मां काली हर मुरादें पूरी करती है। महिलाओं की सुहाग और बच्चों की जिंदगी मिलती है। इसलिए यहां मुंडण और बलि का भी प्रचलन है। ग्रामीण मुन्ना सिंह कहते हैं कि एक बार एक ब्राहम्ण आए थे। ग्रामीणों के उदास देखकर ब्राहम्ण ने काली पूजा की सलाह दी गई थी। तब से यह पूजा शुरू हुई। तब से लोग मां की छत्रछाया में हैं। कभी बड़ी विपदा नही आई। हर मुश्किल में मां भगवती मदद करती रही हैं।

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