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परेशानी:यूरिया के लिए सामान्य नहीं हो रहे हालत खाद खरीदने के लिए दौड़ लगा रहे किसान

नवादा6 दिन पहले
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  • अभाव दिखा 400 से पांच सौ रुपये तक बिक्री करने की मिल रही सूचना

चीनी मिल बंद होने के बाद वारिसलीगंज क्षेत्र के किसान गन्ना की जगह लाचारी में धान को अपना मुख्य फसल बना लिया है। क्षेत्र के किसान अपने खेती लायक अधिकांश भूमि पर धान के विभिन्न किस्मों की रोपनी करते हैं। अगर मानसून अनुकूल रहा और सकरी नहर में ससमय लाल पानी आते रहा तब क्षेत्र के किसान अपनी हाड़तोड़ मेहनत से धान की अच्छी उत्पादन प्राप्त करने में सफल होते हैं। इसी वजह से वारिसलीगंज को नवादा जिले का धान का कटोरा कहा जाता है। किसानों को पिछले कुछ वर्षों से रासायनिक खाद यूरिया के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकारी स्तर से मिलने वाला यूरिया का दो रैक अभी मात्र चार दिन पहले पहले वारिसलीगंज में उतारा गया। बाबजूद प्रखंड के किसानों को अब भी यूरिया के लिए बाजार में भटकना पड़ रहा है। जबकि वारिसलीगंज प्रखंड के विभिन्न लाइसेंसी उर्वरक विक्रेताओं को उक्त रैक से 200 एम टी यूरिया थोक विक्रेता दुर्गा ट्रेडर्स के माध्यम से किसानों के बीच वितरण के लिए दिया गया है।

बाजार के खुदरा उर्वरक विक्रेता सिर्फ दो दिन रविवार और सोमवार को यूरिया का वितरण किया है। शेष यूरिया की खुदरा विक्रेताओं द्वारा ग्रामीण इलाकों के गोदामों में छिपाकर रखा है। मंगलवार सुबह कुछ देर तक किसानों को खाद व्यापारी महंगी खाद उपलब्ध कराते रहे बाद में किसानों को खाद देना बंद कर दिया गया। वही बाजार में यूरिया का अभाव दिखाकर 400 सौ से पांच सौ रुपये तक बिक्री करने की सूचना मिल रही है। दो दिनों तक दुकानदारों द्वारा कृषि समन्वयक या सलाहकार की मौजूदगी में 266 की जगह 350 रुपया में बिक्री किया गया। जिसकी जानकारी प्रखंड से लेकर जिला के अधिकारियों को दी गई थी। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड कृषि पदाधिकााारी ने बताया की बाजार में खाद उपलब्ध है अगले दिन वितरण किया जाएग।

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