बहनों ने निभाई अनूठी परंपरा:ईंट को मूसल से कूट-कूटकर भाइयों के दुश्मनों का किया नाश

नवादाएक महीने पहले
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भाई बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला भैया-दूज पर बहनों ने भाईयों के दीर्घायु और यशस्वी होने की कामना के साथ व्रत रखा। व्रत को लेकर बहने सुबह से ही उत्साहित दिखी। युवतियों का कई झुंड एक साथ बैठकर भैया दूज मनाते दिखा। घरों में बहनों ने सुबह-सबेरे अपने घर के आंगन व दरवाजे पर पूजन किया। इस दौरान बहनों ने ईंट के मूसल से कूट-कूटकर बहनों ने भाईयों के दुश्मनों का नाश किया । बहने पारंपरिक गीत गाकर मूसल चलाती रही और खुशी का इजहार करती रही।

मगध में मान्यता है कि ईंट को समाठ से कूट-कूटकर बहनें अपने सभी भाईयों के दुश्मन का नाश करती हैं। बहने भगवान से प्रार्थना करती हैं कि उनके भाईयों का यश बढ़े-मान बढ़े और उनके शत्रुओं का नाश हो। पूजन के उपरांत बहनों ने अपने भाईयों की आरती उतारी। इस दौरान , बताशा, फल, कुशी केराव व -नारियल, रेंगनी काटा आदि से पूजा अर्चना की गई और प्रसाद चढाया गया। बदले में भाईयों ने अपनी बहन को उपहार दिए।
गंगा स्नान करने गए सैकड़ों भाई बहन
कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को कार्तिक यम दुतिया भी कहा जाता है। इस दिन भाई-बहन का साथ में गंगा स्नान का भी विधान है। यम दुतिया स्नान के लिए जिले से सैकड़ों बहन-भाई गंगा स्नान के लिए बाढ, बख्तियारपुर, बढहिया, सिमरिया, प्रयाग राज, बनारस आदि तीर्थो के लिए रवाना हुए। इस पर्व को लेकर गया-किउल रेलखंड पर ट्रेनों में भीड़ दिखाई दी।
बहनों ने बांधा कंगन
जानकारों के मुताबिक भैया दूज का यह पर्व भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है। बहनें अपने भाई की कलाई में कंगन बांधती है। कंगन को रक्षासूत के रूप मे धारन के बाद उनके दीर्घायु जीवन की कामना करती है। ताकि उनके भाई हर तरह के विघ्न बाधा से बचे रहें। मंगलवार को बहनों ने अपने भाईयों की कलाई पर रक्षासूत बांधा।

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