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उदासीनता:अस्तित्व खोती जा रही है सरस्वती नदी, ले चुकी है नाले का रूप, जबकि इसका है धार्मिक महत्व

नवादा10 महीने पहले
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  • उचित साफ-सफाई नहींं होने के कारण नदी की पहचान खत्म होने की कगार पर पहुंची

राजगीर की पौराणिक सरस्वती नदी अपनी अस्तित्व खोने के कगार पर है। धार्मिक महत्व वाली यह नदी एक नाले का रूप ले चुका है। गंदगी के कारण इस पौराणिक नदी की पहचान समाप्त हो गयी है। इसे बचाने के लिए कोई प्रयास  नहींं हो रहा है। धार्मिक लिहाज से मलमास में भी इस नदी में स्नान करने का काफी महत्व माना गया है। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण मलमास मेला का आयोजन  नहींं होगा लेकिन पूर्व के मलमास में लाखों श्रद्धालु इस नदी में स्नान करते रहे हैं। ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के इस नदी बचाने के लिए कोई पहल  नहींं होता देख स्थानीय लोगों में नाराजगी है। सीएम की पहल पर सौंदर्यीकरण की हुई थी शुरूआत लेकिन अंजाम तक  नहींं पहुंचा कुछ साल पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने इस नदी के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को देखते हुए जल संसाधन और योजना विभाग को नदी की उड़ाही कर इसके सौंदर्यीकरण के निर्देश दिये थे। उड़ाही और सौंदर्यीकरण का काम तो हुआ लेकिन अंजाम तक  नहींं पहुंचा। नदी में सिर्फ मिट्टी काटकर और पत्थर के टुकड़े गिराकर छोड़ दिया गया। सौंदर्यीकरण का कोई भी ऐसा काम  नहींं हुआ जो उल्लेखनीय हो। पत्थर देने का परिणाम यह निकला कि नदी में पानी आने-जाने का स्रोत था वह भी बंद हो गया। जिसके कारण नदी सूख गया है।

गंदे पानी में ही बचा है अस्तित्व
नदी का जो भी थोड़ा बहुत अस्तित्व दिख रहा है वह नदी के पानी के कारण नहींं बल्कि कुंड के आसपास के नाले आदि के गंदे पानी से है। नाले का गंदा पानी सरस्वती नदी में गिरता है। जिन श्रद्धालुओं को इस नदी का महत्व मालूम है वह इसे देखकर आहत होते हैं। बाहर से आये साधु संत जब स्नान के लिए नदी तक पहुंचते हैं तो इसकी हालत देखकर मायूस हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार इस नदी का अस्तित्व बचाने को लेकर आवाज उठायी है फिर भी इस ओर ध्यान  नहींं दिया जाता है।
सौंदर्यीकरण कर दिया जाये तो पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण
राजगीर जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्थल पर जीर्ण-शीर्ण पाण्डु पोखर को जीवित कर पाण्डु पार्क का रूप दे दिया गया है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। कुंड क्षेत्र में शीतल जल का कृत्रिम कुंड भी बनाया गया है। पर्यटक इसे काफी पसंद करते हैं। जबकि ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाला यह धरोहर उपेक्षित पड़ा है। यदि इसका भी जीर्णोद्धार का सौंदर्यीकरण करा दिया जाये तो पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षण का केन्द्र होगा।

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