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लापरवाही:नहर पुल की रेलिंग अज्ञात ट्रैक्टर से हुई क्षतिग्रस्त

नावानगर6 दिन पहले
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  • सिकरौल में ठोरा नदी पर बनी पर बाइक को छोड़ फोर व्हीलर व भारी वाहनों का गुजरना हुआ वर्जित

सिकरौल के ठोरा नदी पर स्थित एक ऐसा पुल जो वर्षों सोन नहर का पानी और वाहनों के बोझ को झेल रहा है, लेकिन उसके ढांचे में वाहन चालकों के लापरवाही से क्षतिग्रस्त होने लगा है। नहर पुल का एक साइड रेलिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। क्षतिग्रस्त रेलिंग मंगलवार की देर शाम एक ट्रैक्टर से हुई है। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने दिया।

पर ट्रैक्टर कहां की थी, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। बताया जाता है कि ट्रैक्टर केजविल (लौह उपकरण) बांधकर गुजरने के दौरान आधा किलोमीटर नहर पुल रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गया। जिससे वाहन नहर में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है। इस संबंध में सोन कैनाल के कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार झा ने बताया कि ठोरा नदी के सोन नहर पुल मार्ग से भारी वाहन व फोर व्हीलर वाहन को गुजरने से वर्जित कर दिया गया है। टू व्हीलर वाहन ही गुजरेगी। वह भी अंधेरा छाने से पूर्व। उन्होंने कहा जल्द ही पुल के क्षतिग्रस्त रेलिंग को दुरुस्त किया जायेगा।

गुमसेज से बक्सर को जोड़ती है ठोरा नहर मार्ग
बक्सर मेन नहर शाखा से जोड़ने वाली सिकरौल लख पुल आज भी न केवल शान और मजबूती से खड़ा है बल्कि उसी क्षमता से नहर का पानी डिस्चार्ज कर रहा, जिस क्षमता से सौ साल पहले होता था। इतना ही नहीं नहर पर बनी सड़क मार्ग गुमसेज से बक्सर जोड़ती है। सिकरौल लख पुल वास्तुविद् का नायाब नमूना है। पुल के नीचे से ठोरा नदी बहती है और पुल से सोन नहर का पानी पसहरा लख के रास्ते बक्सर मेन नहर चैनल में आता है। पुल से पानी को नीचे गिरने से रोकने के लिए इसके दोनों ओर मोटी दीवार खड़ी की गई है। ईंट की यह दीवार इतनी मोटी है कि इसके ऊपर से दोनों ओर भारी वाहनों का परिचालन होता है। पर नहर के रेलिंग टूटने से भारी वाहनों के परिचालन बंद हो गया है।

कारीगरी के उत्कृष्ट नमूना है नदी पर बनी नहर

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उस समय डिहरी ऑन-सोन से बक्सर आने के लिए नहर मार्ग का उपयोग किया जाता था। नहर में नाव चलाई जाती थी। जिससे व्यवसाय के लिए सामान ढोने का काम होता था। तब नहर मार्ग का रखरखाव भी समुचित ढंग से किया जाता था। ग्रामीण बताते है कि लख के समीप नहर विभाग का सिकरौल नहर अवर प्रमंडल कार्यालय भी बनाया गया है, जहां से खेतीबाड़ी के समय नहरों की निगरानी की जाती है। आसपास के लोगों की मानें तो आजादी के कई दशक बाद भी लख की मौजूदगी से कारीगरी के उत्कृष्ट नमूना का अहसास होता है।

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