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विधानसभा चुनाव:12 राजनीतिक दलों ने बनाए 1.23 लाख बीएलए राजद टॉप पर, गठबंधन के लिहाज से एनडीए आगे

पटनाएक महीने पहले
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  • निर्वाचन विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जारी की सभी दलों के बूथ लेवल एजेंट की सूची

बिहार में मान्यता प्राप्त 12 राजनीतिक दलों ने मिलकर 1 लाख 23 हजार बूथ लेबल एजेंट बनाए हैं। इनमें राजद टॉप पर है। राजद ने अकेले 50268 बूथ लेवल एजेंट बनाएं। दूसरे नंबर पर भाजपा और तीसरे पर जदयू है। भाजपा ने 38713 बूथ लेवल एजेंट बनाएं हैं। वहीं जदयू ने 26864 बीएलए बनाए हैं। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी महज 2244 बूथ लेवल एजेंट बना पाई है। किस राजनीतिक दल ने बिहार में कितने बूथ लेवल एजेंट बनाए हैं, इसकी सूची निर्वाचन विभाग ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है।
चुनाव आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से बूथ लेबल एजेंट बनाने के लिए कहा है। राजीतिक दलों द्वारा बनाए गए बूथ लेबल एजेंट मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करने में बीएलए की मदद करते हैं।
त्रुटिरहित मतदाता सूची में इनकी होती है अहम भूमिका: जमीनी स्तर के ये कार्यकर्ता बड़े मददगार साबित होते हैं। मसलन- संबंधित मतदान केंद्र से जुड़े कितने लाेग मतदाता क्षेत्र में रह रहे हैं या कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, इसकी जानकारी जुटाने में ये बूथ लेवल एजेंट मदद करते हैं। वहीं वैसे मतदाता जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनका नाम मतदाता सूची में है तो उन्हें हटवाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कुल मिलाकर त्रुटिरहित मतदाता सूची बनाने में इनकी भूमिका अहम होती है।

काेई भी दल सभी जिलों में अबतक नहीं बना पाया बूथ लेवल एजेंट
बिहार में मतदान केंद्रों की संख्या करीब 72000 है। हालांकि, कोविड 19 को देखते हुए 34 हजार अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस हिसाब से सभी मान्यता प्राप्त दलों को बूथ लेबल एजेंट बनाना है। लेकिन, कुछ राजनीतिक दलों को छोड़ ज्यादातर ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। दिलचस्प है कि कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है, जिसने सभी 38 जिलों में बीएलए नियुक्त किया हो। अकेले टॉप पर रहने के बावजूद राजद ने लखीसराय और मधुबनी में बीएलए नहीं बनाया है। वहीं सत्ताधारी भाजपा ने अररिया और पूर्णिया में बीएलए नहीं बनाया है। जदयू इस मामले में और भी पीछे हैं। जदयू ने एक दर्जन से अधिक जिलों में बीएलए नहीं बनाया है।

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने नहीं बनाया कोई भी बीएलए
दूसरी ओर कई दल ऐसे हैं, जिन्होंने इसमें दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का एक भी बीएलए नहीं है। वहीं बसपा ने 79, सीपीआई ने 56, सीपीआई( एम ) ने 271, एनसीपी ने 896 बीएलए हैं। वहीं रालोसपा ने 1074 और एलजेपी ने 2542 बीएलए बनाए हैं। बिहार में अगर गठबंधन के हिसाब से देखें तो एनडीए के पास अधिक बीएलए हैं। भाजपा, जदयू और एलजेपी को मिलाकर 68119 बीएलए हैं। दूसरी ओर राजद, कांग्रेस और रालोसपा को मिलाकर 53586 बीएलए ही हैं। इस हिसाब से बिहार में बूथों तक एनडीए की पहुंच अधिक है।

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