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बिहार 12वीं स्टेट बोर्ड:डेढ़ लाख छात्र कॉलेज एंट्रेंस की रेस से बाहर, 7 लाख नहीं दे सकेंगे प्रमुख नौकरियों के लिए परीक्षा, शीर्ष संस्थानों में प्रवेश पाने में भी पिछड़ेंगे छात्र

पटना2 महीने पहले
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  • कदम अच्छा-परिणाम खराब- सबसे पहले परीक्षाएं लीं, मूल्यांकन किया फिर भी अन्य राज्यों से पिछड़ा बिहार
  • वजह- अन्य बोर्ड ने इंटरनल असेसमेंट से जारी किया रिजल्ट
  • नतीजा- सीबीएसई व कई स्टेट बोर्ड में लगभग 100% छात्र पास, बिहार में मात्र 78% ही सफल

देश में सबसे पहले बोर्ड परीक्षाएं लेकर परिणाम घोषित करने वाले बिहार बोर्ड के 12वीं के छात्रों का इस साल कॉलेज एडमिशन पाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ना तय है। सीबीएसई समेत लगभग सभी स्टेट बोर्ड्स का इस वर्ष न केवल रिजल्ट बेहतर हुआ है बल्कि 60 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले भी बढ़े हैं।

वहीं संभवत: बिहार ही एक ऐसा राज्य होगा जहां पिछले साल की तुलना में इस साल कुल पास प्रतिशत में भी गिरावट आई है। 2020 में 12वीं का परिणाम 80.44 फीसदी था जो इस साल 78.04 फीसदी रहा। फर्स्ट डिवीजन पाने वाले 27% (361597) हैं। 40% (542993) सेकंड डिवीजन व 10% (141352) थर्ड डिवीजन वाले हैं। इस साल साइंस व कॉमर्स टॉपर ने 94.2% व आर्ट्स टॉपर ने 92.6% अंक ही हासिल किए हैं।

2020 में 34 विद्यार्थियों को 92 फीसदी से अधिक अंक मिले थे लेकिन 95 फीसदी अंक किसी विद्यार्थी ने प्राप्त नहीं किए थे। जबकि 2021 में 22 विद्यार्थियों ने 93 फीसदी से अधिक अंक स्कोर किए। इस बार भी 95 फीसदी अंक किसी विद्यार्थी को नहीं मिले हैं। ऐसे में सीबीएसई व अन्य बोर्ड की असेसमेंट स्कीम से छात्रों को मिले अधिक अंकाें का नुकसान बिहार बोर्ड स्टूडेंट्स को होगा।

95% तक भी नहीं पहुंचा किसी भी स्ट्रीम का टॉपर ...फर्स्ट डिवीजन पाने वाले भी मात्र 27%

टॉप यूनिवर्सिटीज में दाखिले में नुकसान, राज्य के संस्थानों में भी रहेंगे पीछे
बिहार से सबसे अधिक छात्र डीयू जाते हैं। पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो डीयू से संबद्ध कई कॉलेजों में यूजी में प्रवेश के लिए पहला कटऑफ 100% तक रहा। इस साल सीबीएसई के 70 हजार छात्रों ने ही 95% से अधिक अंक पाए हैं।महाराष्ट्र बोर्ड में एक लाख छात्रों के 90 फीसदी से अधिक अंक हैं। राजस्थान में 99% फर्स्ट डिवीजन है। ऐसे में इस साल बिहार बोर्ड के छात्रों को इन कॉलेजों में प्रवेश में दिक्कत होगी।

जामिया, बीएचयू सहित अधिकांश शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए एंट्रेंस में 12वीं में कम से कम 50 फीसदी अंक होने चाहिए। ऐसे में बिहार के डेढ़ लाख छात्र ये परीक्षाएं नहीं दे पाएंगे। राज्य की यूनिवर्सिटीज में सीबीएसई के छात्रों को तो फायदा मिलेगा ही साथ ही अन्य राज्यों के ज्यादा अंक पाने वाले छात्र भी इनमें प्रवेश ले पाएंगे।

भर्ती व प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं हो पाएंगे शामिल
सेना में टेक्निकल एंट्री के लिए 70%, नीट के लिए पीसीबी में 50% अंक जरूरी हैं। कई भर्तियों के लिए 12वीं में 60% मार्क्स चाहिए। ऐसे में सेकेंड डिवीजन वाले साढ़े 5 लाख छात्रों में कइयों के अंक 50 प्रतिशत से कम हैं। ये इन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाएंगे।

  • स्थानीय कॉलेजों में दिक्कत नहीं आएगी लेकिन बड़ी यूनिवर्सिटीज जिनमें कटआॅफ हाई जाता है। वहां बिहार के छात्र पिछड़ेंगे। -खगेन्द्र कुमार, निदेशक, दूरस्थ शिक्षा, पटना विश्वविद्यालय
  • हम लोगों ने बिहार बोर्ड के माध्यम पारदर्शी तरीके से परीक्षा लेकर उचित मार्किंग की है। हमारे बच्चों को नामांकन में कोई परेशानी होती है और शिकायत आती है, तो हम विचार करेंगे। -विजय कुमार चौधरी, मंत्री, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार
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