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  • 25 Candidates Entered The Electoral Arena, Now The Vote Will Be Cut Here, Divided Among All; Jayawardhan Can Get Support Of Yadavs

ग्राउंड रिपोर्ट पालीगंज:25 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे, अब यहां वोट कटेगा, सब में बंटेगा; जयवर्द्धन को मिल सकता है यादवों का साथ

पटना8 महीने पहले
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पालीगंज में यादव वोटरों की तादाद सबसे अधिक है। महागठबंधन और जयवर्द्धन यादव के बीच यह वोट बंटता दिख रहा है। - Dainik Bhaskar
पालीगंज में यादव वोटरों की तादाद सबसे अधिक है। महागठबंधन और जयवर्द्धन यादव के बीच यह वोट बंटता दिख रहा है।
  • लगातार बदल रहे हैं समीकरण, कद्दावर नेताओं के मैदान में उतरने से हुआ मुकाबला रोचक, बड़े नेता दल बदलकर लड़ रहे हैं, अब तक इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और राजद का दबदबा रहा है

(पालीगंज से राहुल पराशर) पालीगंज विधानसभा सीट पर जयवर्द्धन यादव के जदयू जाने के बाद राजद ने यहां से खुद उम्मीदवार नहीं दिया। सीट भाकपा-माले को दे दी। संदीप सौरभ ही महागठबंधन का उम्मीदवार हैं। पालीगंज में सबकुछ आसानी से हो जाए, ऐसा कैसे संभव है।

राजद के मैदान से पीछे हटने और भाजपा की ओर से जदयू को सीट दिए जाने के बाद मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग नाराज है। नाराजगी की खबर लोजपा तक पहुंची तो पार्टी ने भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी को टिकट दे दिया। 2015 में रामजनम शर्मा की हार के बाद से ही डॉ. विद्यार्थी क्षेत्र में भाजपा के झंडे तले कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही हैं। पालीगंज बाजार के विकास सिंह ने बताया कि 17 सितंबर को पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर यहां स्थित मंदिर पर उन्होंने बड़ा आयोजन कराया था। डॉ विद्यार्थी जोरदार चुनाव प्रचार कर रही हैं। वर्ष 2005 के फरवरी व अक्टूबर-नवंबर के चुनावों में भाकपा माले के नंद कुमार नंदा ने पालीगंज विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था।

उस समय उन्हें सभी जातियों का समर्थन हासिल था। इस बार माले की ओर से जेएनयू के छात्र संदीप सौरभ मैदान में हैं। चुनावी मैदान में उतरने और बाहरी-भीतरी के उठते सवाल को दबाने के लिए उन्होंने अपनी जाति को आगे कर दिया है। दुलहिनबाजार के बिपिन विहारी कहते हैं कि पहले वे नाम के आगे कुछ नहीं लगाते थे। अब खुद को यादव कहकर संबोधित करते हैं।
जयवर्द्धन को मिल सकता है यादवों का साथ
पालीगंज में यादव वोटरों की तादाद सबसे अधिक है। महागठबंधन और जयवर्द्धन यादव के बीच यह वोट बंटता दिख रहा है। ऐसे में भाजपा के कमिटेड वोटर जदयू की ओर मुड़े तो पार्टी प्रत्याशी मुनाफे में रहेंगे। हालांकि, पालीगंज के सुमेर सिंह कहते हैं कि जयवर्द्धन यादव अभी भी खुद को राजद नेता की छवि से बाहर निकालने में कामयाब नहीं रहे हैं। उनकी टीम में अभी भी राजद वाले कार्यकर्ताओं की ही भरमार है। वे भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का प्रयास नहीं कर रहे। इसका नुकसान उन्हें झेलना पड़ सकता है।

जाति के नाम पर वोटरों को एकजुट कर रहीं डाॅ. विद्यार्थी
विद्यार्थी का टिकट 2015 में भाजपा का टिकट कट गया था। एक बार फिर वे खुद को जनता से जोड़ने में जुटी हुई हैं। सीट बंटवारे से पहले विस सीट पर दूसरी सबसे बड़ी जाति भूमिहार खुद को अप्रासंगिक न होने देने की बात कर रही है। ऐेसे में इस वर्ग का वोट विद्यार्थी के पक्ष में एकजुट हो सकता है। इसके अलावा राजपूत व कुशवाहा वोट बैंक के भी ध्रुवीकरण का वह प्रयास कर रही हैं।
धूमिल पड़ते मुद्दे, सिर चढ़ती जाति
चुनावी मैदान में मुद्दे धूमिल पड़ते जा रहे हैं। एक बार फिर पालीगंज विधानसभा सीट पर जाति ही हावी हो रही है। उच्च वर्ग का कहना है कि अगर इस बार हमने समझौता कर लिया तो फिर यह सीट हाथ से निकल जाएगी। इसलिए, एनडीए व महागठबंधन को अपनी शक्ति का अहसास कराएंगे। पूर्व भाजपा नेता अशोक वर्मा भी चुनावी मैदान में घूम रहे थे।

जदयू को टिकट मिलने के बाद बैठ जरूर गए हैं, लेकिन उनको पूछने वाला अभी कोई नहीं है। ऐसी ही स्थिति राजद के भी शीर्ष कार्यकर्ताओं की देखने को मिल रही है। ऐसे में मुकाबला जातीय आधार पर हो और वोटिंग के समय में डीजल अनुदान, अधूरी नल जल योजना, खोदी गई सड़कों का मुद्दा गौण हो जाए, तो अधिक आश्चर्य नहीं होगा।
रालोसपा व जाप उम्मीदवारों पर भी टिकी सबकी नजर
चुनावी मैदान में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी व जन अधिकार पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। रालोसपा से मधु मंजरी चुनावी मैदान में हैं। वहीं, जाप से फजलुर रहमान अंसारी खड़े हैं। ये दोनों भी टक्कर देने का प्रयास करते दिख रहे हैं।

पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के रवींद्र प्रसाद, लोक सेवा दल के राजगीर प्रसाद, भारतीय सब लोग पार्टी के रवीश कुमार, भारतीय आम आवाम पार्टी मनोज कुमार उपाध्याय, शिवसेना के मनीष कुमार, शोषित समाज दल के संत कुमार सिंह, लोकप्रिय समाजवादी पार्टी दीनानाथ पंडित, नेशन फर्स्ट डेमोक्रेटिक पार्टी की नीतू देवी, प्लूरल्स पार्टी के संजीत कुमार और भारतीय पार्टी लोकतांत्रिक की पूनम देवी भी चुनावी मैदान में हैं। सभी के अपने-अपने पॉकेट वोट हैं।

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