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भास्कर एक्सक्लूसिव:राजकीय आयुर्वेद काॅलेज में शिक्षकों के 36 पद खाली, मई तक कर लेनी थी बहाली, मगर अभी प्रक्रिया शुरू भी नहीं

पटना4 महीने पहलेलेखक: आलोक द्विवेदी
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एनसीआईएसएम ने निरीक्षण किया था। हाॅस्टल, लाइब्रेरी व अन्य कमियां पूरी करने के लिए तीन माह का वक्त दिया था। - Dainik Bhaskar
एनसीआईएसएम ने निरीक्षण किया था। हाॅस्टल, लाइब्रेरी व अन्य कमियां पूरी करने के लिए तीन माह का वक्त दिया था।

कदमकुआं स्थित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल की मान्यता जून में समाप्त होने का खतरा है। नेशनल काउंसिल ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) ने कॉलेज का दौरा करके शिक्षक, हॉस्टल, लाइब्रेरी सहित अन्य कमियाें काे पूरा करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था, जो मई में समाप्त हो जाएगा। 87 शिक्षकाें की भर्ती के लिए उपसचिव ने बिहार लोक सेवा आयोग के सचिव को मार्च में पत्र लिखा है। लेकिन, अबतक भर्ती प्रक्रिया शुरू भी नहीं हाे सकी है।

मेडिकल कॉलेज में 60 सीटों पर प्रति विषय दो शिक्षकों की आवश्यकता होती है। इनमें एक प्रोफेसर या रीडर और एक लेक्चरर रैंक के होते हैं। इस महाविद्यालय में प्रथम वर्ष में 125 सीटें हैं। ऐसे में प्रति विषय चार शिक्षकों की आवश्यकता है। यहां 14 विषयाें में पढ़ाई हो रही है। 14 विषयाें में पीजी कोर्स भी उपलब्ध है। पीजी के लिए भी अंडरग्रेजुएट की तरह ही कम से कम दो शिक्षकों को रखने का नियम है। कुल मिलाकर यहां न्यूनतम 102 शिक्षकों की आवश्यकता है। लेकिन, महज 66 कार्यरत हैं।

सात विषयों की पढ़ाई बंद हाेने की आशंका

महाविद्यालय में 14 में से सात विषयों की पढ़ाई बंद होने के अंदेशा है, क्योंकि इनके लिए स्वीकृत पद से आधे से कम शिक्षक हैं। इनमें काय चिकित्सा, शरीर रचना विज्ञान, रोग निदान बाल रोग, स्त्री रोग एवं प्रसूति, स्वास्थ्य वृत और पंचकर्म शामिल हैं।

छात्रों की संख्या से हॉस्टल में बेड कम
हाॅस्टल में छात्रों की तुलना में बेडों की संख्या कम है। हॉस्टल में 154 बेड हैं, जबकि छात्रों की संख्या 691 है। इनमें 189 पीजी के छात्र हैं। दो हॉस्टल छात्र और एक छात्राओं को लिए रिजर्व है। छात्रों के एक हॉस्टल में 18 कमराें में 72 और दूसरे हॉस्टल में 18 कमराें में 54 छात्र रहते हैं। वहीं गर्ल्स हॉस्टल के 14 कमराें में 28 छात्राएं रहती हैं। बाकी छात्र-छात्राएं किराया का कमरा लेकर रहते हैं।

'सरकार शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए जांच टीम से पिछले चार वर्षों से हर बार तीन महीने का वक्त लेती है। लेकिन, भर्ती नहीं हाे रही है।'

-पवन कुमार, संयाेजक, युवा आयुष पीजी स्नातकोत्तर संघ, बिहार

'शिक्षकों की नियुक्ति की अनुशंसा मार्च में ही कर दी गई थी। प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।'

-डॉ. संपूर्णानंद तिवारी, प्रिंसिपल