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खतरे में थी 84 मरीजों की जान:4 घंटे का ही ऑक्सीजन बैकअप था, भास्कर पर खबर चलते ही अस्पताल को दिए गए ऑक्सीजन के 30 सिलेंडर

पटना23 दिन पहले
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भास्कर पर जब यह खबर चली तो समय हॉस्पिटल को मिले 30 सिलेंडर। - Dainik Bhaskar
भास्कर पर जब यह खबर चली तो समय हॉस्पिटल को मिले 30 सिलेंडर।
  • हॉस्पिटल ने एजेंसी को लिखा था पत्र, कहा था- खाली सिलेंडर को रिफिल कर बचा लें मरीजों की जान

पटना के सगुना मोड़ स्थित समय हॉस्पिटल में कोरोना के 84 मरीजों की जान पर खतरे से संबंधित खबर जब भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चली तो प्रशासन की नींद खुली। इस अस्पताल को तत्काल ऑक्सीजन के 30 सिलेंडर उपलब्ध कराए गए। इस अस्पताल में 4 घंटे का ही ऑक्सीजन बैकअप था। ऑक्सीजन खत्म होने पर सांस की तकलीफ होती तो फिर जान बचाना मुश्किल होता। हॉस्पिटल ने एजेंसी को पत्र लिखा था जिसमें अपील की थी कि खाली सिलेंडर को रिफिल कर दिया जाए जिससे मरीजों की जान पर कोई खतरा नहीं आने पाए। डॉक्टर का कहना है कि 4 घंटे के बैकअप के बाद मरीजों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन मरीजों को अन्य अस्पतालों में भी नहीं शिफ्ट करा रहा है जिससे उनकी जान का खतरा कम हो जाए।

समय हॉस्पिटल के CEO ने 20 अप्रैल को सुबह 6:25 बजे उषा एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड को लिखे पत्र में कहा था कि आपके वहां से अस्पताल को 3 साल से ऑक्सीजन सिलेंडर दिया जा रहा है। इसके लिए बीच में कड़ी के रूप में वेंडर काम करता है। लगभग एक सप्ताह से हॉस्पिटल की सप्लाई बाधित है। हॉस्पिटल में अभी 84 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है। अब केवल 4 घंटे का ऑक्सीजन बैकअप बचा है। ऐसे में निवेदन है कि 33 ऑक्सीजन के खाली सिलेंडर को रिफिल कर दिया जाए जो भेजा जा रहा है जिससे मरीजों की जान बचाई जा सके।

बहरहाल 30 सिलेंडर मिलने के बाद समय हॉस्पिटल प्रबंधन की जान में जान आई है। सिलेंडर देने वाली एजेंसी ने कहा है कि 30 से ज्यादा सिलेंडर देना संभव नहीं है। इसके बाद अब अस्पताल की ओर से कहा जा रहा है कि मरीज अपनी मर्जी से यहां से डिस्चार्ज होना चाहते हैं तो हो सकते हैं।

सरकार के दावों की पोल खोल रहा हॉस्पिटल का लेटर

सरकार भले ही ऑक्सीजन की कमी पूरी होने का दावा करे लेकिन एक अस्पताल का पत्र हकीकत बता रहा था। प्रदेश की व्यवस्था की पोल खोल रहा था। प्रदेश में कोरोना के मरीजों की जान किस तरह से ऑक्सीजन के चक्कर में फंसी है इसका अंदाजा इस पत्र से ही लगाया जा सकता है। प्रशासन से लेकर विभाग तक दावा कर रहा है कि ऑक्सीजन की समस्या का समाधान हो गया है लेकिन अस्पतालों में किस तरह से मरीजों की जान खतरे में है, यह अस्पताल ही जान रहा है। यह तो मात्र एक हॉस्पिटल का हाल है, पटना में लगभग सभी प्राइवेट हॉस्पिटलों का सही हाल है। मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है।

मरीजों को शिफ्ट तक नहीं किया गया

अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की जान फंसी है। ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। परिवार हंगामा कर रहा है। हॉस्पिटल में तोड़फोड़ का खतरा है। ऐसे में हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट करने के लिए मांग की गई थी लेकिन इसपर न तो विभाग के अफसर गंभीर हुए और ना ही DM। ऐसे में मरीजों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन की समस्या होने के बाद से ही हालात बिगड़ गए हैं। अब नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। कोविड के मरीजों के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है और जब हॉस्पिटल को सरकार ऑक्सीजन ही नहीं दिला पा रही है तो फिर इलाज क्या होगा। ऐसे में तो मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ना स्वभाविक है।

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