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इनमें 50 फीसदी से अधिक शराब के मामले में थे:काेराेना से बचाने के लिए सुप्रीम काेर्ट के आदेश के बाद बेउर जेल के 702 कैदियों काे मिली जमानत

पटना2 महीने पहलेलेखक: माे. सिकन्दर
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सात साल से कम सजा के मामलों में गिरफ्तार नहीं करने का भी आदेश - Dainik Bhaskar
सात साल से कम सजा के मामलों में गिरफ्तार नहीं करने का भी आदेश

जेल में काेराेना का विस्फाेट न हाे इससे बचाने के लिए सुप्रीम काेर्ट ने आदेश दिया था कि वैसे अपराध जिनमें सात साल से कम की सजा हाे, उसमें आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाए। साथ ही कहा था कि जिन जेलाें में क्षमता से अधिक कैदी हैं, उन्हें तीन माह के लिए पेराेल पर छाेड़ा जाए। सुप्रीम काेर्ट के इस आदेश के बाद पटना के बेउर समेत अन्य जेलाें में बंद कैदियाें काे जमानत मिलने लगी।

बेउर जेल में 31 मई काे 4931 कैदी बंद थे। वहां फिलहाल 4229 कैदी बंद हैं। यानी 702 कैदियाें काे न्यायालयाें से जमानत मिल गई। जिन कैदियाें काे जमानत मिली उनमें 50 फीसदी से अधिक कैदी शराब के मामले में कई माह से बंद थे। इसके अलावा चाेरी, छिनतई, स्नैचिंग, मारपीट व अन्य छाेटे-माेटे अपराध में बंद कैदियाें काे बेल मिल गई। बाढ़ जेल में 31 मई काे 426 कैदी बंद थे। अभी यहां 379 कैदी हैं। मसाैढ़ी जेल में 31 मई काे 230 कैदी थे, अब 280 हैं। इन 280 कैदियाें में बाढ़ से 96 कैदी स्थानांतरित किए गए हैं।

फुलवारी और सिटी जेल क्वारेंटाइन सेंटर

दूसरी लहर में काेराेना के बढ़ते संक्रमण काे देखते हुए जेल मुख्यालय की ओर से फुलवारीशरीफ और पटना सिटी जेल काे क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया था। दाेनाें जेल अब भी क्वारेंटाइन सेंटर हैं। फुलवारीशरीफ जेल में उन पुरुष कैदियाें काे रखा जाता है कि जिन्हें जिले के किसी थाना इलाके से किसी अपराध में गिरफ्तार किया जाता है। वहीं पटना सिटी जेल में महिला बंदियाें काे क्वारेंटाइन किया जाता है। इन दाेनाें जेलाें में नए कैदियाें काे 14 दिन रखने के बाद दूसरे जेलाें में भेज दिया जाता है। दानापुर जेल काे खाली कराया गया था। वहां काेराेना मरीजाें के इलाज के लिए कैदियाें काे रखा जाना था। दानापुर जेल में अभी 21 कैदी हैं पर एक भी काेराेना पाॅजिटिव नहीं है। वहीं पटना सिटी जेल में 34 और फुलवारीशरीफ जेल में 831 कैदी बंद हैं।

97 प्रतिशत काे लग गया टीका : बेउर जेल अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने बताया कि जेलाें में बंद 18 से ऊपर के करीब 97 फीसदी कैदियाें काे वैक्सीन की पहला डाेज दे दी गई है। दूसरी डाेज भी दी जा रही है। जिले में दाे ही पाॅजिटिव कैदी मिले थे जिन्हें पाटलिपुत्र आइसाेलेशन सेंटर में रखा गया। दाेनाें ठीक हाे गए। एक कैदी की पीएमसीएच में माैत हाे गई थी।

सुप्रीम काेर्ट ने क्या आदेश दिया था
पटना हाईकाेर्ट के वकील प्रभात भारद्वाज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा था कि अंडरट्रायल कैदियों में बहुत से आधी से ज्यादा संभावित सजा काट चुके हैं जिन्हें सजायाफ्ता कैदियों के साथ रखना सही नहीं है। आदेश दिया कि प्रत्येक राज्य सरकार 90 दिन के भीतर हाई पावर कमेटी बनाए जो निर्णय करे कि किस तरह के कैदियाें व बंदियाें को तत्काल अंतरिम जमानत या पेरोल पर छोड़ा जा सकता है। बिहार में बनी कमेटी में जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह, बिहार राज्य लीगल सर्विस कमेटी के चेयरमैन और डीजी प्रिजन शामिल हैं।

8 मई के इस आदेश में 7 से 10 साल तक की संभावित सजा वाले कैदी जमानत पर 2 माह से 6 माह पहले रिहा हो सकते है। इसमें अलग अलग तरह की अपराध और सजा के लिए अलग- अलग जमानत की पूर्व अवधि है। इसके तहत आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग, पोस्को एक्ट, आर्म्स एक्ट, एनएसए, पोटा यूएपीए, टाडा आदि अपराध वाले कैदीं नहीं हाेंगे।

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