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बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का हाल:PMCH के नीकू वार्ड में 48 बेड पर 75 बच्चे, नए भर्ती होने वालों को ऑक्सीजन नहीं, एक की मौत

पटना15 दिन पहले
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समस्तीपुर से अपनी 10 दिन की बच्ची को बड़ी उम्मीद के साथ  पीएमसीएच लेकर पहुंचे संजय ने बताया कि सांस फूलने की दिक्कत है, लेकिन ऑक्सीजन प्वाइंट खाली नहीं बता रहे। कह रहे कि भर्ती कर लेंगे, लेकिन रिस्क आपका रहेगा। ऐसे में अब प्राइवेट अस्पताल ले जा रहे। - Dainik Bhaskar
समस्तीपुर से अपनी 10 दिन की बच्ची को बड़ी उम्मीद के साथ पीएमसीएच लेकर पहुंचे संजय ने बताया कि सांस फूलने की दिक्कत है, लेकिन ऑक्सीजन प्वाइंट खाली नहीं बता रहे। कह रहे कि भर्ती कर लेंगे, लेकिन रिस्क आपका रहेगा। ऐसे में अब प्राइवेट अस्पताल ले जा रहे।

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में रविवार तड़के सर्दी-खांसी-बुखार से पीड़ित एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में नवजात के आईसीयू (नीकू) में 48 बेड पर 75 बच्चे भर्ती हैं। हर बेड पर एक ही ऑक्सीजन प्वाइंट है। एक प्वाइंट पर दो-तीन कनेक्शन जोड़कर बच्चों को ऑक्सीजन सप्लाई दी जा रही है। अस्पताल नए मरीज लेने से मना नहीं कर रहा है, लेकिन नए भर्ती होने वाले बच्चों के परिजनों को ऑक्सीजन प्वाइंट की अनुपलब्धता पहले ही बता दी जा रही है।

यहां शिशु इमरजेंसी ओपीडी में शाम तक रविवार को 25 बच्चे आए, इनमें से दोपहर तक चार को भर्ती लेना पड़ा। एनएमसीएच के शिशु रोग विभाग में 76 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें 22 वायरल निमोनिया से पीड़ित हैं। आईजीआईएमएस में रविवार को बैक्टीरियल संक्रमण के दो नवजात बच्चों को भर्ती कराना पड़ा।

यहां वायरल निमोनिया पीड़ित दो बच्चे पहले से भर्ती हैं। इसके शिशु रोग विभाग में 42 बच्चों का इलाज चल रहा है। एम्स में रविवार को 10 बच्चे इमरजेंसी ओपीडी में आए, जिनमें दो को भर्ती लिया गया हालांकि यह सांस या बुखार के मरीज नहीं हैं। अधीक्षक डॉ. आई. एस. ठाकुर रविवार को मिले नहीं। उन्होंने मोबाइल भी नहीं रिसीव किया। विभागाध्यक्ष ने पहले ही कह दिया है कि लिखित अनुमति का पत्र लाने वाले मीडिया से ही बात कर सकते हैं।

  • एनएमसीएच के शिशु रोग विभाग में 76 और आईजीआईएमएस में 42 मासूम भर्ती, पीड़ित बच्चों के आने का सिलसिला जारी
  • पीएमसीएच में जांच-दवा नहीं, एनएमसीएच में भी बाहर से दवा खरीद रहे
  • एक प्वाइंट पर दो-तीन तक कनेक्शन जोड़ कर बच्चों को दी जा रही ऑक्सीजन सप्लाई
  • परिजनों को कह रहे-बच्चे को भर्ती तो कर लेंगे लेकिन अस्पताल नहीं लेगा रिस्क
  • सांस फूलती रही, ऑक्सीजन नहीं होने के नाम पर लौटी 10 दिन की बच्ची
नीकू में जगह नहीं, एक महीने का अंश इमरजेंसी कॉरिडोर में
नीकू में जगह नहीं, एक महीने का अंश इमरजेंसी कॉरिडोर में

छपरा के असरफी राय ने 40 दिन के पोते अंश को पीएमसीएच की इमरजेंसी में भर्ती करा रखा है। पेट में दर्द से वह हमेशा चिल्लाता रह रहा है। नीकू में जगह नहीं, इसलिए इमरजेंसी के कॉरिडोर में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है।

25 दिन से बुखार, रोज बाहर से खरीद लानी पड़ रही दवा
25 दिन से बुखार, रोज बाहर से खरीद लानी पड़ रही दवा

गया के 13 साल के रिशु का पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में इलाज चल रहा है। उसे 25 दिनों से बुखार उतर-चढ़ रहा है। उसकी मां ने बताया कि ऑक्सीजन लगा है और पानी चढ़ रहा है, लेकिन जांच से लेकर दवा तक बाहर से लानी पड़ी रही है।

शुक्र, शनि, रविवार बीते...घोषणा के अनुसार 20 बेड नहीं बढ़े
पीएमसीएच में एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज देखकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को कहा था कि नीकू वार्ड में 48 की जगह 68 बेड किए जाएंगे। हालत और खराब होती गई, लेकिन रविवार तक बेड की संख्या 48 ही रही।

मरीजों की संख्या रविवार दोपहर 75 थी। फर्स्ट फ्लोर पर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर रिजर्व रखे गए 40 बेड खाली हैं और दूसरी तरफ आईसीयू में ऑक्सीजन प्वाइंट नहीं होने की बात सुन परिजन अपने बच्चों को लेकर लौट रहे हैं।

रविवार को दोपहर 1:51 बजे भास्कर रिपोर्टर के सामने 10 दिन की एक बच्ची को लेकर निराश परिजन प्राइवेट अस्पताल की खोज में यहां से भागे। शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में दोपहर के दो बजे तक चार बच्चे भर्ती हुए। एक को डिहाइड्रेशन, दूसरा हिमोफिलिया, तीसरा लिवर-स्प्लिन रोगी है।

चौथा बच्चा जन्म के बाद रोया नहीं था। रविवार को सूर्योदय से कुछ घंटे पहले दो माह के मासूम की मौत हुई। उसके पिता जगत ने बताया कि उनका बच्चा बुखार से पीड़ित था। रविवार को शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी ओपीडी में शाम 5:32 बजे तक 25 बच्चे दिखाने आए। इनमें एक साल से कम के 12 बच्चे हैं। चार नवजात हैं।

एनएमसीएच
शिशु रोग विभाग में कुल 76 बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें 22 बच्चे निमोनिया से पीड़ित हैं। इनमें दो बच्चे नीकू में भर्ती हैं। रविवार को भी दो बच्चे भर्ती किए गए। नीकू के सभी 24 बेडों पर मरीज भर्ती हैं। इमरजेंसी में भी आठ बेड पर बच्चे हैं। पीकू के सभी पांच बेड पर मरीज भर्ती हैं।

रविवार को ओपीडी बंद रहने के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या कम रही। हाजीपुर से बच्चे का इलाज कराने आई काजल कुमारी ने बताया कि यहां दवा नहीं मिलती। बाहर से लाने को कहा जाता है। इसी तरह की शिकायत नालंदा से आए एक मरीज के परिजनों ने भी की।

इस संबंध में जब मरीज के परिजनों से अस्पताल उपाधीक्षक से शिकायत की, तो उन्होंने अस्पताल कर्मियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि सभी दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराएं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध हैं, इसलिए दवा नहीं देना अपराध है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर एनएमसीएच भवन में भी 42 बेड तैयार है।

आईजीआईएमएस
शिशु रोग विभाग में कुल 42 बच्चे भर्ती हैं। इनमें दो वायरल निमोनिया से पीड़ित हैं। अन्य बच्चे लीवर, किडनी, बैक्टीरियल इन्फेक्शन आदि से पीड़ित हैं। रविवार को बैक्टीरियल इंफेक्शन से पीड़ित दो नवजात बच्चे भर्ती हुए। अस्पताल के शिशु विभाग में 71 बेड हैं। नीकू के छह बेड और पीकू के 15 बेड पर बच्चों का इलाज चल रहा है। वहीं, ओपीडी बंद रहने के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या नहीं के बराबर रही।
वायरल बुखार मामले में सभी जिलों से रोज ली जाएगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को रोजाना वायरल बुखार के मरीजों की रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। डीएम बच्चों के इलाज की मॉनिटरिंग करेंगे। विभाग के अनुसार 313 बच्चे अबतक वायरल बुखार की चपेट में आए हैं। इनमें करीब सौ बच्चों का इलाज अब भी चल रहा है। वहीं सीवान, गोपालगंज आदि जिलों में फैले बुखार की जांच के लिए गई आईडीएसपी की टीम के सोमवार तक रिपोर्ट सौंपने की संभावना है। अस्पतालों को प्रॉपर इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

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