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पंचायत चुनाव पर महामारी और मौसम भारी:पंचायत सरकार में नियुक्त होंगे प्रशासक पंचायतीराज एक्ट में संशोधन की तैयारी

पटना19 दिन पहलेलेखक: इन्द्रभूषण
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बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कोरोना के कारण समय पर नहीं हो सके और बरसात के कारण 3 महीने तक यह संभव नहीं दिख रहा है। - Dainik Bhaskar
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कोरोना के कारण समय पर नहीं हो सके और बरसात के कारण 3 महीने तक यह संभव नहीं दिख रहा है।
  • पहले ईवीएम, फिर कोरोना में उलझा पंचायत चुनाव, अब अध्यादेश के जरिए प्रशासक की व्यवस्था लागू करना ही एकमात्र विकल्प बचा... अगले हफ्ते मिल सकती है मंजूरी

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कोरोना के कारण समय पर नहीं हो सके और बरसात के कारण 3 महीने तक यह संभव नहीं दिख रहा है। पंचायती राज के करीब ढाई लाख प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को खत्म होता देख अब राज्य सरकार ने इस तारीख के बाद इनके अधिकार और कर्तव्य उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी और पंचायत सचिव के हाथों में देने जा रही है।

पंचायत चुनाव टलने पर कार्यकाल बढ़ाने का कानून नहीं है, इसलिए सरकार कैबिनेट के रास्ते राज्यपाल के हस्ताक्षर से अध्यादेश जारी कर अपने स्तर से प्रशासक तय करने की व्यवस्था लागू करेगी। चुनाव के बाद नए पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां कायम रहें, इसके मद्देनजर अफसरों को नई योजना लाने का अधिकार नहीं सौंपा जाएगा। इसके अलावा चालू योजनाओं को चलाते रहने लायक ही आर्थिक शक्तियां उन्हें सौंपी जाएगी।

भास्कर एक्सप्लेनर : पंचायती राज के 2,58,760 प्रतिनिधियों के हर सवाल का जवाब

पंचायत चुनाव कब तक ?

चुनाव अक्टूबर-नवंबर तक खिंचने के आसार...पंचायती राज के वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2016 से शुरू हुआ था। 15 जून 2021 को इनका कार्यकाल खत्म हो रहा था, इसलिए मार्च से पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई थी। पहले ईवीएम को लेकर गतिरोध फिर कोरोना ने चुनाव की तैयारियां रोक दीं। अब कोरोना के साथ मानसून की भी समस्या सामने है। जैसे अक्टूबर-नवंबर में विस चुनाव हुआ था, उसी समय तक यह चुनाव खिंच सकता है।

यही रास्ता क्यों निकला?

कार्यकाल को विस्तार देने का नियम नहीं...जिस तरह विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति पर चुनाव नहीं होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन की संवैधानिक व्यवस्था है, वैसा कोई कानून त्रिस्तरीय पंचायती सरकार के कार्यकाल के खत्म होने को लेकर नहीं है। पंचायत प्रतिनिधि कार्यकाल विस्तार चाहते थे, इसका भी नियम नहीं है। ऐसे में संविधान, विधि और विभागीय विशेषज्ञों से सलाह के बाद सरकार ने यह रास्ता चुना है।

किसे मिलेगा जिम्मा?

काम डीडीसी, बीडीओ, पंचायत सचिव देखेंगे...पंचायती राज विभाग कार्यपालक आदेश से डीडीसी, बीडीओ और पंचायत सचिव को प्रशासक बनाएगा। जिला परिषद का संचालन जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यानी उप विकास आयुक्त (डीडीसी) करेंगे। वहीं प्रखंड स्तरीय पंचायत समिति का संचालन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) करेंगे और ग्राम पंचायत सरकार का संचालन पंचायत सचिवों के जिम्मे होगा।

वर्तमान प्रतिनिधि क्या करेंगे?

न अधिकार, न कर्तव्य; चुनाव की तैयारी करेंगे...त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों की कुल संख्या 2,58,760 है। इनमें मर चुके, इस्तीफा दे चुके या हटाए गए प्रतिनिधियों को छोड़ दें तो करीब ढाई लाख प्रतिनिधि गांवों की विकास प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े हैं। कार्यकाल की समाप्ति और प्रशासक बहाल होने के बाद यह गांवों की विकास प्रक्रिया से सीधे तौर पर बाहर हो जाएंगे। न कोई अधिकार होगा और न कर्तव्य। इन सभी के पास अगले चुनाव की तैयारी के अलावा कोई काम नहीं होगा। इधर, मुखिया संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह और पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने कहा कि चुनाव होने तक कार्यकाल विस्तार नहीं मिला तो हम चक्का जाम आंदोलन करेंगे।

क्या करेंगे अफसर, क्या नहीं?

नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे, नई योजना नहीं...15वीं वित्त आयोग और पंचम राज्य वित्त आयोग से पंचायती राज संस्थाओं को मिले अनुदान से चल रहे विकास कार्यों का संचालन और इसकी मॉनीटरिंग- दोनों इनके जिम्मे होगी। जिस अध्यादेश की तैयारी है, उसमें प्रशासक न तो चुनाव तक कोई नीतिगत निर्णय लेंगे और न ही कोई नई बड़ी योजना की शुरुआत करेंगे। सरकारी राशि खर्च करने की भी उनकी सीमा होगी। जो योजनाएं पहले से चल रही हैं, उन्हीं को आगे बढ़ा सकते हैं।

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