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भास्कर Research:वायु प्रदूषण से बिहार को साल में 14762 करोड़ रुपए की क्षति, हमारे 40 विभागों का सालाना बजट भी इतना नहीं

पटना3 महीने पहले
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लैंसेट की रिपोर्ट में वायु प्रदूषण व इससे होने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों से भारी आर्थिक नुकसान होने का खुलासा हुआ। - Dainik Bhaskar
लैंसेट की रिपोर्ट में वायु प्रदूषण व इससे होने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों से भारी आर्थिक नुकसान होने का खुलासा हुआ।

वायु प्रदूषण तथा इससे होनेवाली बीमारियों की वजह से हुई असमय मौतों के कारण बिहार को एक साल में 14762 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है, जो राज्य की कुल जीडीपी का 1.95% है। लैंसेट की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। लैंसेट की ओर से हेल्थ एंड इकोनोमिक इंपैक्ट ऑफ एयर पॉल्यूशन इन द स्टेट्स ऑफ इंडिया- द ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2019, शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.95 फीसदी हिस्सा वायु प्रदूषण की वजह से गंवा रहा है।

बिहार सहित उन राज्यों को आर्थिक नुकसान ज्यादा है जहां प्रति व्यक्ति आय कम है। इसमें यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान इत्यादि राज्य भी हैं। बता दें कि 2021-22 में बिहार का जीडीपी 7,57,026 करोड़ रुपए था। आश्चर्यजनक यह है कि वायु प्रदूषण से जितना आर्थिक नुकसान हो रहा है, बिहार के 40 विभागों का सालाना बजट भी इतना नहीं है। सूद, ऋण और पेंशन को छोड़ दें तो सिर्फ चार विभागों का सालाना बजट ही 14762 करोड़ रुपए से अधिक है। इनमें ग्रामीण विकास विभाग, गृह, शिक्षा, तथा स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं।

बिहार को घरेलू ईंधन प्रदूषण से सर्वाधिक आर्थिक हानि

बिहार, यूपी और दिल्ली की लगभग पूरी आबादी हवा में मौजूद अति सूक्ष्म धूल कण की जद में है। रही बात घरेलू ईंधन जनित वायु प्रदूषण की तो बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 70 फीसदी घरों में लकड़ी-गोइठा सरीखे पारंपरिक ईंधन का उपयोग (राष्ट्रीय औसत 56.3%) खतरनाक बीमारियों को जन्म दे रहा है। इस मामले में सर्वाधिक आर्थिक हानि (0.98% ) उठाने वाला राज्य बिहार है। इसके बाद छत्तीसगढ़ (0.89%), मध्य प्रदेश (0.88%), असम (0.84%) है। ऐसे ही आर्थिक नुकसान की चपेट में यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी हैं।

16.7 लाख वायु प्रदूषण जनित बीमारियों से मौतें

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में देश में 16.7 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से हुई। यह कुल मौतों का 17.8% है। इनमें अधिकांश मौतों की वजह हवा में मौजूद धूल के कण रहे। एक साल में इतनी मौतें तो कोरोना से भी नहीं हुईं। कोरोना के कारण वर्ष 2020 से अब तक कुल 5.24 लाख मौतें हुई हैं। कोरोना के दौरान लॉकडाउन की अवधि में हवा बिल्कुल ही साफ हो गई थी। लेकिन लॉकडाउन हटते ही स्थितियां जस की तस हो गईं।

असमय हुई इन मौतों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को 36.8 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है जो सकल घरेलू उत्पाद का 1.36% है। यहां बता दें कि भारत अपने जीडीपी का 3.8 फीसदी स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च करता है। वायु प्रदूषण से होने वाली हानि पर तत्काल लगाम नहीं लगी तो 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की भारत की उम्मीदें सपना ही रह जाएंगी।