राजधानी पटना से ऐसी उम्मीद नहीं:शहर के 96% लोग वायु प्रदूषण को सेहत के लिए खतरा मानते, लेकिन 80% क्लीन एयर एक्शन प्लान के बारे में नहीं जानते

पटना5 महीने पहले
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पटना के 80 प्रतिशत लोग क्लीन एयर एक्शन प्लान के बारे में नहीं जानते। करीब 65 प्रतिशत लोग सरकारी विभागों द्वारा वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं हैं। लोगों के बीच जानकारी की इतनी कमी है कि 88 प्रतिशत लोगों को यह भी नहीं पता कि वायु प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों एवं उल्लंघन कर्ताओं से संबंधित शिकायत कैसे और किसके पास दर्ज करानी है।

ये बातें सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा वायु प्रदूषण पर लोगों की रायशुमारी पर आधारित एक पब्लिक परसेप्शन सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट शनिवार को जारी की गई है।

सीड के इस सर्वेक्षण-अध्ययन का उद्देश्य शहर में वायु प्रदूषण की वर्तमान स्थिति, इससे संबंधित लोगों के बीच जागरुकता के स्तर और उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का पता लगाना था। इसके तहत पटना में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्य सरकार और एनफोर्समेंट एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों पर भी शहरवासियों की राय इकट्ठी की गई।

मार्च-अप्रैल में हुआ था पब्लिक परसेप्शन सर्वेक्षण

सीड द्वारा यह पब्लिक परसेप्शन सर्वेक्षण मार्च-अप्रैल महीने में पटना के उपनगरीय और प्रमुख इलाकों में लोगों से प्रत्यक्ष संपर्क साध कर किया गया, ताकि शहर की एक प्रतिनिधि मूलक तस्वीर सामने आ सके। इस शोध-अध्ययन में एक मुख्य निष्कर्ष यह आया कि 96 प्रतिशत लोग वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य से संबंधित एक बड़ी समस्या के मूल कारण के रूप में देखते हैं, जो अस्थमा, फेफड़े और श्वास संबंधी गड़बड़ियों से जुड़ी हुई है। एक चौंकाने वाली आम राय सामने आयी कि 80 प्रतिशत लोग सरकार द्वारा प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए उपायों के बारे में अवगत नहीं हैं।

वहीं, करीब 65 प्रतिशत लोगों ने इस बात पर बल दिया कि वायु गुणवत्ता से संबंधित मॉनिटरिंग एवं अन्य जानकारियों को सरकारी एजेंसियों द्वारा लोगों तक सही ढंग से पहुंचाने की जरूरत है। सर्वेक्षण में लोगों ने प्रमुखता से इस बात रेखांकित किया कि हेल्थ एडवायजरी जैसे उपाय जरूरी हैं, क्योंकि कई वैज्ञानिक अध्ययन वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच सीधे संबंध की पुष्टि करते हैं। करीब 90 प्रतिशत लोगों ने हामी भरी कि उच्च वायु प्रदूषण स्तर वाले दिनों में बचाव के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा नियमित हेल्थ एडवाइजरी जारी की जानी चाहिए।

ठोस और निर्णायक कदम उठाए सरकार

रिपोर्ट के मुख्य सुझावों और सिफारिशों के बारे में बात करते हुए सीड में सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने इस बात पर बल दिया कि यह समय की मांग है कि सरकार अब ठोस और निर्णायक कदम उठाए। दरअसल क्लीन एयर एक्शन प्लान के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर सभी प्रमुख विभागों और एनफोर्समेंट एजेंसियों को जोड़ कर एक एकीकृत और जवाबदेह टास्क फोर्स बनाने की जरूरत है, जो समन्वयात्मक और कन्वर्जेन्स एप्रोच के साथ परिणाम आधारित काम करे।

लोगों में जागरुकता के स्तर को बढ़ाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया जाना चाहिए, जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स, समाज के गणमान्य लोग, इन्फ्लुएंसर्स और आम नागरिकों की सक्रिय और सामूहिक भागीदारी हो और यह शहर में वायु गुणवत्ता में सुधार के इकलौते लक्ष्य के साथ चले। सरकार की नोडल एजेंसी को क्रियान्वयन संबंधी कदमों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और इसे लोगों तक सीधे पहुंचाने का प्रयास करते हुए शिकायत निवारण केंद्र के बारे में लोगों को सुगम तरीके से पूरी सूचनाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि लोग इस पूरी प्रक्रिया एक स्टेक होल्डर के रूप में जुड़ें और वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहभागी की भूमिका निभाएं।

2019 में पटना के लिए क्लीन एयर एक्शन प्लान

सीड के CEO रमापति कुमार ने कहा कि वर्ष 2019 में पटना के लिए क्लीन एयर एक्शन प्लान बना था, लेकिन इसका प्रभावी क्रियान्वयन अब भी एक प्रमुख चुनौती है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि क्लीन एयर एक्शन प्लान बनने के दो साल बाद भी स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है तथा आम जनमानस में सरकारी प्रयासों को लेकर जागरुकता का भी भारी अभाव है। राज्य सरकार और संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को इसे प्राथमिकता के रूप में लेना चाहिए और शहर में प्रदूषित आबोहवा को एक स्वस्थ, सुन्दर और स्वच्छ परिवेश में बदलने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए।

आम लोगों को अभियान से जोड़ा जाए

सीड का मानना है कि राज्य सरकार को वायु प्रदूषण के समाधान से जुड़े कदमों में अधिकाधिक सिविल सोसाइटी संगठनों एवं नागरिक समूहों को सहभागी रूप से शामिल करना चाहिए, क्योंकि जमीनी स्तर पर बदलावों में उनकी बड़ी भूमिका है। वायु प्रदूषण को रोकने के उपायों और सभी तरह की तकनीकी और सामान्य जानकारियों को सहज एवं सरल भाषा और सभी प्रचार माध्यमों के जरिए जन-जन तक पहुंचाने का प्रबंध किया जाना चाहिए, ताकि इसका व्यापक और अपेक्षित नतीजा मिल सके।

सीड राज्य सरकार के सभी प्रमुख विभागों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनफोर्समेंट एजेंसियों को हरसंभव मदद देने को हमेशा तत्पर है और अपने स्तर से भी पब्लिक कैंपेन के जरिए लोगों के बीच जागरूकता फ़ैलाने के लिए प्रयास करता रहेगा।

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