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चिकित्सक की सलाह:काेराेना के माइल्ड व शुरुआती लक्षण वालों के लिए एल्कैम की फाइटोरिलीफ दवा भी कारगर

पटना5 दिन पहले
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एम्स ने हाेम क्वारेंटाइन में रहने वाले मरीजों और अस्पताल में भर्ती मरीजाें पर क्लीनिकल ट्रायल करने के बाद इसे मंजूरी दी - Dainik Bhaskar
एम्स ने हाेम क्वारेंटाइन में रहने वाले मरीजों और अस्पताल में भर्ती मरीजाें पर क्लीनिकल ट्रायल करने के बाद इसे मंजूरी दी

माइल्ड और शुरुआती लक्षण वालाें के लिए एल्कैम लाइफ की फाइटाेरिलीफ भी काेराेना में कारगर है। एम्स के डाॅक्टराें ने हाेम क्वारेंटाइन में और अस्पताल में एडमिट हुए 100 मरीजाें पर इस टैबलेट का क्लीनिकल ट्रायल किया। एम्स के डिप्टी एमएस फिजियाेलाॅजी विभाग के एडिशनल प्राेफेसर डाॅ. याेगेश ने बताया कि कुल 100 मरीजाें पर फाइटोरिलीफ का पिछले नवंबर में ट्रायल शुरू किया गया। इसे दाे ग्रुप में बांट गया। एक ग्रुप में 50 एम्स में एडमिट मरीज और दूसरे में हाेम क्वारेंटाइन में रह रहे 50 मरीजाें काे रखा गया है।

25-25 मरीजों के चार ग्रुप बनाकर किया गया ट्रायल

याेगेश ने बताया कि एडमिट और क्वारेंटाइन में रह रहे मरीज काे भी दाे अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया। यानी 25-25 के चार ग्रुप बनाए गए। 18 से 70 के बीच इसका ट्रायल किया गया था। एडमिट वाले 25 मरीजाें काे काेराेना की स्टैंडर्ड दवा जाे दी जा रही थी वह चली। 10 दिन में इन 25 में 8 मरीज निगेटिव हाे गए। वहीं एडमिट 25 मरीजाें काे काेराेना की स्टैंडर्ड दवा के साथ फाइटाेरिलीफ भी दी गई। 10 दिनाें में इन 25 में 10 मरीज निगेटिव हाे गए। इसी तरह क्वारेंटाइन मरीजाें के दाेनाें ग्रुप पर ऐसा ही किया गया, पर 7-7 मरीजाें ने ट्रायल नहीं कराया।

अब 18-18 क्वारेंटाइन मरीज बच गए। इनमें एक ग्रुप काे काेराेना की स्टैंडर्ड दवा और फाइटाेरिलीफ दी गई। 10 दिन में इन 18 मरीजाें में से 15 निगेटिव हाे गए। वहीं क्वारेंटाइन किए 18 काे केवल काेराेना की स्टैंडर्ड दवा दी गई, इनमें 10 दिन में केवल 7 मरीज निगेटिव हुए। डाॅ. याेगेश ने कहा कि एम्स ने ट्रायल के बाद माइल्ड और शुरुआती लक्षण वाले मरीजाें के लिए इस दवा की मंजूरी दे दी है, पर अस्पताल में एडमिट और सीवियर मरीजाें पर यह उतना कारगर नहीं है। हालांकि, इस दवा का काेई साइड इफेक्ट नहीं है। यह शूगर फ्री भी है। सभी उम्र के लिए है, पर इसे चूस कर खाना है, काटकर नहीं। दिन में 3 डाेज लेनी है।

इसमें हल्दी, अनार और अदरक के तत्व हैं
डाॅ. याेगेश ने बताया कि फाइटोरिलीफ में हल्दी, अदरक और अनार के तत्व हैं। हल्दी में करक्यूमिनोइड्स के फाइटोएक्टिव्स, अनार में एलाजिक एसिड और अदरक में जिंजरोल व शोगोल शामिल है। इन फाइटोरिलीफ के सहक्रियात्मक प्रभाव के परिणामस्वरूप एक मजबूत एंटी-वायरल, वायरुसाइडल और एंटी-बैक्टीरियल क्रिया होती है, जाे विभिन्न वायरल उपभेदों के खिलाफ प्रभावी हो सकती है।

7 साल से मार्केट में फ्लू, काॅमन काेल्ड और गले में खराश के लिए

एल्कैम लाइफ के सीईओ नरेंद्र नाथ दास ने कहा कि यह दवा सात साल से मार्केट में है। इसका इस्तेमाल फ्लू, काॅमन काेल्ड और गले में खराश के लिए हाेता रहा है। काेराेना संक्रमण जब शुरू हुआ ताे पिछले साल मई में एम्स से संपर्क कर कहा गया कि यह काेराेना मरीजाें के माइल्ड और शुरुआती लक्षणाें के लिए कारगर है या नहीं, ट्रायल कर इसे बताएं। पिछले साल नंवबर से इस साल मार्च तक ट्रायल हुआ और परिणाम अच्छे रहे।

वहीं एल्कैम लाइफ के जीएम नीरज कुमार मिश्रा ने कहा कि इसे यूएस और यूराेपियन यूनियन के देशाें ने पेटेंट किया है। यह खांसी, सर्दी और फ्लू का कारण बनने वाले वायरस के खिलाफ एंटीबाॅडी को चार गुना तक बढ़ाने में प्रभावी है। इस माैके पर डाॅ. कमलेश झा, डाॅ. रवींद्र भूषण समेत क्लीनिकल ट्रायल में शामिल कई डाॅक्टर और कंपनी के अधिकारी माैजूद रहे।

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