आपके काम की खबर, अगले दो दिन बैंक बंद:बिहार में करीब 3 हजार बैंक शाखा रहेंगे बंद, 20 हजार करोड़ का कारोबार हो सकता है प्रभावित

पटना5 महीने पहले
सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

28 और 29 मार्च को देश की सबसे बड़ी आम हड़ताल होने जा रही है। देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और सैकड़ों ट्रेड यूनियनों के बंद का असर बिहार में भी दिखेगा। राज्य में करीब 3 हजार बैंक शाखा बंद होने से लगभग 20 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा।

मार्च का महीना फाइनेंस को लेकर काफी अहम होता है। निजी और सरकारी संस्थानों का क्लोजिंग का महीना भी होता है। ऐसे में हड़ताल काफी प्रभाव डालेगी। इस दौरान दो दिनों तक बैंकों में लेन देन के साथ बीमा का काम भी प्रभावित होगा। मार्च में दो दिनों की यह हड़ताल बिहार में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर को प्रभावित करने वाली होगी। समस्त बैंक वाइज संगठनों, जिला इकाईयों और साथियों के लिए 28 और 29 मार्च 2022 को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल के समर्थन की अपील की जा रही है।

सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश

बिहार स्टेट इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव उत्पल कांत ने राज्य के सभी बैंक कर्मियों से आह्वान किया है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आगे आए। बैंक कर्मियों का कहना है कि केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ, 12 सूत्री मांगों को लेकर 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों व सैकड़ों स्वतंत्र ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशभर के बीस करोड़ से ज्यादा कामगार, कर्मचारी एवं अधिकारी 28 एवं 29 मार्च को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में भाग लेंगे।

दो दिनों की हड़ताल से प्रभाव

कांत का कहना है कि हड़ताल के कारण बैंक, बीमा ,सामान्य बीमा, राज्य, केंद्र, BSNL, आयकर, पोस्ट ऑफिस, कोयला, रक्षा, आशा, उषा, आंगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन कर्मी, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, खेत, खदान, खलियान, भवन निर्माण, सार्वजनिक उपक्रमों एवं अन्य संस्थानों में कामकाज ठप्प रहेगा। यह हड़ताल विश्व की सबसे बड़ी आम हड़ताल होगी।

हड़ताल के लिए मांग

  • चार लेबर कोड (श्रम संहिताओं) को समाप्त करो, रक्षा क्षेत्र में हड़ताल पर रोक लगाने वाले कानून -ईडीएसए को निरस्त करो
  • कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा से किए गए वायदों को पूरा करो
  • किसी भी रूप में निजीकरण स्वीकार नहीं, निजीकरण और नेशनल मोनेटाइजेशन प्लान को निरस्त करो
  • गैर आयकर दाता परिवारों को प्रतिमाह 7500 रुपए नगद एवं मुफ्त राशन सहायता प्रदान की जाए
  • मनरेगा के लिए आवंटन में वृद्धि और शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना का विस्तार हों
  • सभी अनौपचारिक क्षेत्र कामगारों को सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा दी जाए, अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक किया जाए
  • आँगनबाड़ी, आशा, मध्याह्न भोजन और अन्य योजना वर्करों को मजदूर का दर्जा देकर उनके लिए वैधानिक न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए
  • कोरोना महामारी के बीच लोगों की सेवा करने वाले फ्रंटलाइन वर्करों के लिए उचित सुरक्षा एवं बीमा प्रदान की जाए
  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और सुधारने के लिए वेल्थ टैक्स आदि के माध्यम से अमीरों पर टैक्स लगाकर कृषि, शिक्षा ,स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिताओं (पब्लिक यूटिलिटीज) में सरकारी निवेश में वृद्धि की जाए
  • पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कमी की जाए, मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए ठोस उपचारात्मक उपाय किए जाएं
  • संविदा कर्मियों, योजना कर्मियों का नियमितीकरण करो और समान काम के लिए समान वेतन प्रदान करो।
  • नई पेंशन स्कीम को निरस्त करो, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करो, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में पर्याप्त वृद्धि की जाए

30 साल में 50 राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बैंक कर्मियों और अन्य संगठनों का कहना है कि हड़ताल का हर मुद्दा किसी न किसी रूप में हमें प्रभावित करता है एवं हमारे लिए प्रासंगिक होता है। पूर्व में भी 1991 से लेकर 2021 तक करीब 30 वर्ष के दौरान ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन द्वारा नव उदारवादी आर्थिक नीतियों, मजदूर विरोधी श्रम नीतियों और प्रतिगामी बैंकिंग सुधारों आदि के खिलाफ 50 राष्ट्रव्यापी हड़तालें की जा चुकी हैं। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए बैंकिंग उद्योग एवं बैंक कर्मियों की मांगों को लेकर 28 एवं 29 मार्च 2022 को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया है।

बैंक कर्मियों की यह है मांग

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत करो
  • बैंकों का निजीकरण रोका जाए
  • हेयरकट्स पर रोक लगाओ, खराब ऋणों की वसूली शुरू की जाए
  • बैंक जमा पर ब्याज दरों में वृद्धि की जाए
  • ग्राहकों पर महंगे सेवा शुल्कों का बोझ नहीं डाला जाए
  • एनपीएस खत्म डीए से संबद्ध पेंशन योजना बहाल की जाए
  • ऑउटसोर्सिंग बंद की जाए, नई भर्ती शुरू की जाए
  • सभी ठेका कर्मचारियों और बी.सी. को नियमित की जाए