कंफ्यूजन में फंसी बिहार के 40 लाख मासूमों की जान:प्रदेश में स्कूल-कॉलेज बंद, लेकिन 3 से 6 साल के बच्चों का आंगनबाड़ी केन्द्र खुला

पटना10 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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बिहार में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण प्री स्कूल से लेकर कॉलेज तक बंद है, लेकिन हैरानी की बात है कि आंगनबाड़ी केन्द्र खुले हैं। समाज कल्याण विभाग की तरफ चलाए जाने वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3 साल 6 साल के बच्चे अब भी आ रहे हैं। लापरवाही की हद यह है कि इन सेंटरों पर ना मास्क की व्यवस्था है और ना सैनिटाइजर की।

बिहार समेकित बाल विकास सेवा यानी आईसीडीएस प्रोग्राम के तहत बिहार में 1 लाख 16 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र चलाए जा रहे हैं। इन केन्द्रों में काम अपने क्षेत्र के बच्चों को पोषाहार देना और प्री स्कूल एजुकेशन देना है। बिहार के हर आंगनबाड़ी पर 35 से 40 बच्चे होते हैं। केन्द्र पर आनेवाले बच्चों की आयु 3 से 6 साल होती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जब कोरोना के कारण पूरे राज्य के प्री स्कूल से कॉलेज तक बंद हैं तब ये सेंटर खुले हैं। केन्द्रों पर अब भी रोज बच्चों को बुलाया जा रहा है और पोषाहार बांटा जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को मिलता है भोजन।
आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को मिलता है भोजन।

रिमाइंडर देने के बावजूद निर्देश नहीं मिला

इसकी वजह सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। बच्चों की जान के साथ हो रहे इस खिलवाड़ की वजह सरकारी आदेश से जुड़ा हुआ एक कंफ्यूजन हैं। असल में गृह विभाग के जिसे आदेश के बाद राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए थे। उस आदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों की चर्चा नहीं है। हालांकि, उसमें प्री स्कूल के बंद करने का आदेश है, लेकिन समाज कल्याण विभाग ने इसको लेकर स्पष्ट नहीं कि क्या इसमें आंगनबाड़ी केन्द्र आएंगे या नहीं। समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक मो. तारीक के मुताबिक विभाग की तरफ से इसको लेकर गृह विभाग से निर्देश मांगा गया है। इसको लेकर 2 बार रिमांडर भी दिया गया है, लेकिन चूंकि अब तक गृह विभाग का निर्देश नहीं मिला है, इसलिए केंद्र अभी रोज खुल रहे हैं ।

सेंटरों पर ना मास्क की व्यवस्था है ना ही सैनिटाइजर की

आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ की प्रदेश अध्यक्ष गीता देवी के मुताबिक, केन्द्रों पर बच्चों को देने के लिए ना मास्क दिया गया है और ना सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई हैं। यहां तक साबुन भी विभाग ने इस्तेमाल के लिए नहीं दिया। गीता देवी की मानें तो कोरोना की दूसरी लहर में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर नई तरह की व्यवस्था खड़ी की गई थी, तब बच्चों को केन्द्र पर नहीं बुलाना था। बच्चों को घर-घर जाकर पोषाहार देना होता था, लेकिन इस बार इसे लेकर भी कोई आदेश नहीं दिया गया है।