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RCP या फिर कोई और:JDU की तरफ से एक राज्यसभा सीट के लिए रेस में आरसीपी सिंह के अलावा पूर्व IAS मनीष वर्मा भी, तय CM करेंगे

पटना5 महीने पहले
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बिहार में 5 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने है। इस राज्यसभा चुनाव में सबसे ज्यादा निगाह किसी पर रहेगी, वो है केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता आरसीपी सिंह। आरसीपी सिंह को लेकर कई तरह की कयास लगाई जा रही है कि इस बार आरसीपी सिंह को ड्रोप कर दिया जाएगा? आरसीपी सिंह के संबंध राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा से बेहतर नही है? आरोप ये भी लगाया जाता है कि आरसीपी सिंह भाजपा आला कमान के बेहद नजदिक चले गए है इसलिए CM नीतीश कुमार नाराज है? कहा ये भी जा रहा है कि आरसीपी सिंह दो बार राज्यसभा सांसद जा चुके है इसलिए JDU उन्हे फिर से राज्यसभा नही भेजेगी। इस बार JDU के कोटे में मात्र एक ही सीट है ऐसे में JDU किसके नाम पर मोहर लगाएगी, इसका फैसला कुछ दिन में हो जाएगा।

JDU की तरफ से मनीष वर्मा है चर्चा में

राजनीति गलियारे की बात करें तो कई तरह की चर्चा है। JDU के लिए राज्यसभा सीट के लिए चर्चा में नया नाम मनीष वर्मा का भी आ रहा है। ये वही मनीष वर्मा है जिन्होने CM नीतीश कुमार के कहने पर IAS की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। मनीष वर्मा नीतीश कुमार के इतने प्रिय हैं कि उन्होंने वॉलेंटरी रिटायरमेंट लेने के बावजूद नीतीश कुमार के लिए काम करते रहे हैं। 2000 बैच के ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी मनीष को अपने मूल कैडर में वापस बुलाया जा रहा था। लेकिन मनीष वहां जाने को इच्छुक नहीं थे। ऐसे में उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाकर वॉलेंटरी रिटायरमेंट ले लिया। ताकि वो नीतीश कुमार के पास रह सकें। वॉलेंटरी रिटायरमेंट के बाद से वो लगातार नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं। मनीष वर्मा उस वक्‍त नीतीश के करीब आए जब वह पटना के जिलाधिकारी थे। उन्हीं के कार्यकाल के दौरान 3 अक्टूबर 2014 को पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के बाद भगदड़ मची थी। भगदड़ में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और 33 लोग की मौत हो गई थी। सबसे बडी बात ये है कि मनीष वर्मा CM नीतीश कुमार के स्वजातीय और क्षेत्रिय भी है।

तीसरी बार राज्यसभा जाएंगे आरसीपी

हालांकि आरसीपी सिंह भी आईएएस अधिकारी रहे है। केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह पिछले 24 साल से सीएम नीतीश कुमार के साथ हैं। वह लम्‍बे समय तक सीएम नीतीश कुमार के प्रधान सचिव के रूप में काम करते रहे हैं। आरसीपी सिंह 1996 में केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव हुआ करते थे। अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में जब नीतीश कुमार रेल मंत्री बने तो 1998 में उन्‍होंने आरसीपी सिंह को अपना विशेष सचिव बनाया। तबसे वह लगातार नीतीश कुमार के साथ रहे। दोनों के बीच विश्‍वास का सम्‍बन्‍ध बनता गया। यह इतना बढ़ा कि जब नीतीश कुमार ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का पद छोड़ा तो कमान आरसीपी सिंह को ही सौंप दी।

नीतीश कुमार का प्रेम आरसीपी से कम नही होने वाला

आरसीपी सिंह जब केंद्रीय मंत्री बन गए तो उनकी जगह ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। ललन सिंह को इस बात का मलाल रहा कि उन्हे केंद्र में मंत्री नही बनाया गया। ललन सिंह और आरसीपी सिंह के बीच संबंध बेहतर नही रहे है। ऐसे में कयास ये लगाया जा रहा है कि कही ललन सिंह आरसीपी के नाम पर विरोध ना कर दें, क्योकि आरसीपी सिंह दो बार लगातार राज्यसभा के सदस्य बनते रहे है। ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार अरुण पाण्डेय कहते है कि नीतीश कुमार के चहेते आरसीपी सिंह है। भले JDU में कई फार हो, लेकिन नीतीश कुमार का प्रेम आरसीपी से कम नही होने वाला है। आरसीपी किसी भी हालत में राज्यसभा जाएंगे। वजह ये है कि आरसीपी केंद्र में मंत्री है। यदि आरसीपी को राज्यसभा नही भेजा जाता है तो मंत्री पद से हटना होगा। फिर JDU को मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार करना होगा। ऐसे में नीतीश कुमार कोई चांस नही लेने वाले है।

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