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आपदा में दिख रहा सिर्फ मुनाफा:निजी अस्पतालों में मरीजों से हो रही मनमानी वसूली, दो लाख एडवांस और 45 हजार प्रतिदिन तक कर रहे चार्ज

पटनाएक महीने पहले
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  • 20 जुलाई को राजधानी के निजी अस्पतालों को कोरोना मरीजों को भर्ती करने की प्रशासन ने दी थी अनुमति
  • दैनिक भास्कर के छह रिपोर्टरों ने लिया 10 अस्पतालों का जायजा

राज्य में कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने निजी अस्पतालों को कोरोना मरीजों का इलाज शुरू करने की अनुमति दी थी। लेकिन प्रशासन के फैसले के बाद मरीजों को इलाज के लिए अधिक विकल्प तो मिल रहे हैं लेकिन अस्पतालों द्वारा मनमर्जी फीस वसूलने के कारण कोरोना का इलाज कैंसर से भी महंगा पड़ रहा है। मरीजों की लगातार आ रही शिकायत पर दैनिक भास्कर ने जिले में छह रिपोर्टरों की टीम बनाई और 10 अस्पतालों का जायजा लिया। रिपोर्टरों की टीम अपने मरीज को भर्ती कराने के नाम पर इन अस्पतालों में पहुंची, तो यह बात निकलकर सामने आई कि अस्पताल दो लाख तक एडवांस ले रहे हैं। इसके अलावा गंभीर मरीजों से 45 हजार तक प्रतिदिन के हिसाब से वसूली हो रही है। ऐसे में एक मरीज से तीन लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक की वसूली की जा रही है, क्योंकि कई गंभीर मरीजों को ठीक होने में 20 दिन से भी अधिक समय लग जा रहे हैं। अभी तक पटना जिले में करीब 30 निजी अस्पतालों को अनुमति मिल चुकी है, जिसमें से अधिकांश में मरीजों का इलाज भी हो रहा है।

नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल, बिहटा
यहां मरीजों को तीन कैटेगरी में बांट कर एडमिट किया जा है। सभी को एक लाख रुपए की सिक्योरिटी मनी जमा कराना अनिवार्य है। अगर मरीज को हल्का इंफेक्शन है और उसकी स्थिति स्थिर है, तो उसे सामान्य वार्ड में भर्ती किया जाएगा। यहां उससे 20 हजार प्रतिदिन लिया जाएगा। थोड़े गंभीर मरीजों से 35 हजार प्रतिदिन और अति गंभीर वाले मरीजों से 45 हजार प्रतिदिन के हिसाब से लिया जा रहा है।

उदयन अस्पताल, बोरिंग कैनाल रोड
यहां एक मरीज से 60 हजार से एक लाख रुपए तक का एडवांस जमा कराया जा रहा है। इसके अलावा हर मरीज से प्रतिदिन 17 हजार से साढ़े सात हजार बेड, नर्सिंग, डॉक्टर आदि के नाम पर लिए जा रहे हैं। इन सबके अलावा मरीज के परिजनों को दवा के लिए अलग से पैसा देना पड़ रहा है, जिस पर 20 हजार से 35 हजार का खर्च मरीज के कंडिशन के अनुसार आ रहा है।

मेडीपार्क अस्पताल, पाटलिपुत्र
यहां एक मरीज से डेढ़ लाख रुपए एडवांस जमा कराए जा रहे हैं। गंभीर मरीजों से 35 हजार प्रतिदिन तक चार्ज किया जा रहा है। बेड, डॉक्टर, नर्सिंग, ऑक्सीजन आदि का खर्च शामिल है। दवा का खर्च अलग से लिया जा रहा है। कई जरूरी दवाएं जो महंगी भी हैं उन्हें भी खरीदना पड़ रहा है।

सहयोग हॉस्पिटल, पाटलिपुत्र
यहां कोरोना मरीजों केलिए सभी बेड फुल हैं। खाली होने पर ही मरीज को जगह मिल पाएगी। लेकिन, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों से एक लाख रुपए तक एडवांस और 20 हजार रुपए प्रतिदिन लिए जा रहे हैं, जिसमें नर्सिंग, डॉक्टर, बेड, ऑक्सीजन आदि का खर्च शामिल है।

रूबन हॉस्पिटल, पाटलिपुत्र
यहां आईसीयू में जगह खाली नहीं है, लेकिन नॉर्मल वार्ड में जगह उपलब्ध है। नॉर्मल वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों से 50 हजार रुपए एडवांस लिया जा रहा है। नॉर्मल वार्ड में पांच हजार रुपए प्रतिदिन और आईसीयू में 15 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज किये जा रह हैं। इसके अलावा डॉक्टर, नर्सिंग, दवा का चार्ज अलग से लिया जा रहा है।

राजेश्वर हॉस्पिटल, बहादुरपुर
यहां 50 हजार रुपए एडवांस लिया जा रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन 25 हजार से 45 हजार के हिसाब से चार्ज लिया रहा है। इसके अलावा दवा के लिए अलग से पैसे देने पड़ रहे हैं। यहां आईसीयू चार्ज 15 हजार प्रतिदिन, नर्सिंग चार्ज तीन हजार प्रतिदिन, ऑक्सीजन चार्ज चार हजार प्रतिदिन, बिपैप चार्ज चार हजार प्रतिनिदन, इन्फ्यूजन चार्ज दो हजार प्रतिदिन और डॉक्टर चार्ज दो हजार प्रति विजिट लिया जा रहा है। 10 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वेंटिलेटर का चार्ज लिया जा रहा है।

पारस हॉस्पिटल, पटना
यहां कोरोना मरीजों के लिए जगह खाली नहीं है। गंभीर मरीजों को भी लौटाया जा रहा है।

हाईटेक हॉस्पिटल
दानापुर के इस अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए जगह खाली नहीं है। गंभीर मरीजों को भी लौटाया जा रहा है।
श्री साईं हॉस्पिटल, कंकड़बाग
यहां मरीजों से दो लाख रुपए एडवांस जमा कराया जा रहा है। 20 हजार से 40 प्रतिदिन के चार्ज के अलावा मरीजों को दवा के लिए अलग से चार्ज किया जा रहा है।

जगदीश मेमेरियल हॉस्पिटल
यहां एक लाख रुपए एडवांस लिया रहा है। इसके अलावा मरीजों से 30 से 35 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज किया जा रहे हैं। महंगी दवांए मरीजों के परिजनों से ही मंगाई जा रही है।

इलाज के रेट पर प्रशासन का अंतिम निर्णय जल्द ही

निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज का दर निर्धारित करने के लिए उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की गयी है। जल्द ही प्रशासन के द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। -संजय कुमार अग्रवाल, प्रमंडलीय आयुक्त, पटना प्रमंडल

इलाज के रेट को लेकर प्रशासन को नहीं मिली है कोई शिकायत
जिले के 30 निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 460 बेड आरक्षित हैं। इनमें 221 कोरोना पॉजेटिव मरीज निजी अस्पताल में भर्ती है। उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। निजी अस्पतालों में इलाज और दर को लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। -रिची पांडेय, प्रभारी डीएम सह उप विकास आयुक्त, पटना

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