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बिजली की डिमांड:जरूरत की कम से कम 10 फीसदी बिजली अब सौर ऊर्जा से लेनी हाेगी

पटना12 दिन पहले
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  • पूरी करने के लिए बनाया गया प्रावधान, एेसा नहीं करने पर हाेंगे दंडित

राज्य में अब जरूरत की कम से कम 10 फीसदी बिजली सौर ऊर्जा से लेनी होगी। इस समय लगभग 8 फीसदी बिजली अनिवार्य की गई है। जल्द ही इसे 11 फीसदी करने के बाद आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे और बढ़ाना है। वर्ष 2030 तक सौर ऊर्जा से लगभग 20 फीसदी बिजली लेने का लक्ष्य है। राज्य में अपारंपरिक ऊर्जा स्राेत को बढ़ाने के लिए यह प्रावधान किया गया है। ऐसा नहीं करने पर राज्य को दंडित होना पड़ सकता है। बिहार ने इस समय 1200 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिए कांट्रैक्ट किया है। राज्य का अपना सौर ऊर्जा से उत्पादन 128 मेगावाट है, जबकि 10 मेगावाट बिजली बाहर से आ रही है।

बिहार को इस समय 5000 से 5500 मेगावाट बिजली की जरूरत है। इस साल के अंततक यह 7000 मेगावाट से अधिक होगी। लिहाजा बिहार को कम से कम 700-750 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से लेनी होगी। इस समय सौर, पवन और अन्य अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत से कुल 500 मेगावाट बिजली ही बिहार को मिल रही है। इसमें भी सौर ऊर्जा का हिस्सा काफी कम है। ऐसे में बिजली कंपनी सौर उर्जा से आपूर्ति बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।

राज्य में रिकाॅर्ड 4.22 करोड़ यूनिट पनबिजली का हुआ उत्पादन

बिहार में पिछले वित्तीय वर्ष में रिकाॅर्ड पनबिजली का उत्पादन हुआ है। गत तीन वर्षों में पनबिजली का उत्पादन लगभग चार गुना हो गया है। बिहार ने बीते साल 4.22 करोड़ यूनिट पनबिजली पैदा की। इस दौरान राज्य के सभी 13 पनबिजली घरों ने बिजली पैदा की। हालांकि, तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ यूनिटों में बीच-बीच में उत्पादन बंद भी हुआ, लेकिन अमूमन सारे बिजलीघरों से बिजली उत्पादन हुआ। बिहार में सोन, गंडक और कोसी पर पनबिजलीघर स्थापित है। सोन पर स्थित डेहरी, बारुण, अगनूर, बेलासार, अरवल, ढेलाबाग, नासरीगंज, सेवारी, श्रीखिंडा और जगनगरा, गंडक पर स्थित वाल्मीकिनगर और त्रिवेणी, जबकि कोसी पर अवस्थित कटैया पनबिजलीघरों से बिजली पैदा की गई। इन संबंध में बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (बीएचपीसी) के एमडी आलोक कुमार ने बताया कि भविष्य में हम और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

ऐसे बढ़ेगा सौर ऊर्जा का उत्पादन
बिजली कंपनी ने सौर ऊर्जा को लेकर व्यापक कार्ययोजना बनायी है। बिहार ने पिछले दिनों सौर ऊर्जा को लेकर कई बेहतर कदम उठाए हैं। इनमें सरकारी भवनों, रुफ टॉप बिजली से लेकर बेकार स्थानों पर सौर प्लेट लगाने की योजना शामिल है। आधा दर्जन परियोजनाओं से बिजली पैदा हो रही है। इसके अलावा लगभग दो दर्जन से अधिक परियोजनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। कई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इस साल के अंततक कई नई परियोजनाओं से भी बिजली पैदा होने लगेंगी। कजरा और पीरपैंती में भी अब 1320 मेगावाट क्षमता के थर्मल पावर प्लांट की जगह 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की योजना है। माना जा रहा है कि अगले पांच वर्षों में बिहार में लगभग 2000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन शुरू हो जाएगा।

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