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नमामि गंगे परियोजना:बेउर और करमलीचक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में साफ हाेकर पुनपुन नदी में जाएगा 24 हजार घरों का पानी

पटना13 दिन पहले
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उद‌्घाटन के लिए बनकर तैयार करमलीचक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और समारोह को लेकर वहां चल रही तैयारी।
  • पहली दाे परियाेजनाओं का आज पीएम करेंगे उद‌्घाटन, अभी हाउस कनेक्शन का काम बाकी
  • दोनों एसटीपी से जुड़ा 275 किमी सीवरेज नेटवर्क बिछेगा

(राहुल पराशर) बेउर व करमलीचक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मंगलवार से चालू हाे जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी इनका उद‌्घाटन करेंगे। नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना में सबसे पहले इन्हीं दो परियोजनाओं का चयन किया गया था। पहले निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार एसटीपी का निर्माण कराएगी। बाद में इसमें सीवरेज नेटवर्क की योजना को भी जोड़ा गया। अब तो हाउस कनेक्शन की भी जिम्मेदारी नमामि गंगे परियोजना का काम करने वाली एजेंसी को ही दे दी गई है। अभी एसटीपी का ही निर्माण कार्य पूरा हुआ है।

इसे सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने और हाउस कनेक्शन का काम अभी बाकी है। इसमें वर्ष 2021 के अंत तक का समय लगने की संभावना है। बुडकाे के मुताबिक, बेउर नेटवर्क का काम पूरा होने के बाद करीब 12 हजार घरों से निकलने वाले पानी व सीवेज को सीधे एसटीपी तक ले जाया जाएगा। करमलीचक परियोजना से भी इतने ही घरों को फायदा मिलेगा। दोनों परियोजनाओं से पानी को साफ कर पुनपुन नदी में भेजा जाएगा, जो जाकर गंगा नदी से मिलती है।

छह साल पहले बनी थी योजना

राजधानी को छह जोन में बांटकर नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। बेउर व करमलीचक एसटीपी के निर्माण की योजना 15 जुलाई 2014 को बनाई गई थी। 77.85 करोड़ की लागत से 43 एमएलडी क्षमता के बेउर एसटीपी और 83.97 करोड़ की लागत से 37 एमएलडी की क्षमता के करमलीचक एसटीपी का निर्माण किया गया है।

बाद में सीवरेज नेटवर्क बिछाने की परियोजना को भी इससे जोड़ा गया। बेउर सीवरेज नेटवर्क प्रोजेक्ट को 31 दिसंबर 2014 को मंजूरी मिली। 394.89 करोड़ की लागत से 179.74 किमी सीवरेज नेटवर्क को इस योजना के तहत बिछाया जा रहा है। वहीं, करमलीचक सीवरेज नेटवर्क को 16 मार्च 2017 को मंजूरी मिली। इसके तहत 96.54 किमी सीवरेज नेटवर्क को 277.42 करोड़ की लागत से बिछाया जाना है।

क्यों पड़ी जरूरत

राजधानी पटना में सबसे बड़ी परेशानी ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम के एक साथ होने की है। राजधानी में घरों से निकलने वाले पानी और बारिश के पानी की निकासी का सिस्टम अलग-अलग नहीं होने के कारण हर साल मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा पुराने पटना में सेप्टिक टैंक वाले बाथरूम का प्रचलन नहीं था। इसके लिए राजेंद्रनगर और कंकड़बाग में संप हाउस का निर्माण किया गया। यहां सीवरेज नेटवर्क भी बने। लेकिन, रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो गए।

कंकड़बाग के गंगा भवन संप हाउस में तो वर्ष 2010 तक मशीनों को लगाने का कार्य किया गया, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पाया। हालांकि, अंडरग्राउंड लाइन होने से घरों का पानी निकालने का कार्य इससे होता रहा है। कंकड़बाग जैसे निचले इलाके में भी घरों से निकलने वाले पानी के लाइन में ड्रेनेज लाइन जुड़े रहने के कारण बारिश के मौसम में लोगों के घरों में पानी घुस जाता है। बाथरूम की स्थिति खराब हो जाती है। नमामि गंगे परियोजना इन समस्याओं का समाधान करेगा।

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