सावधान!...बिहार में कोरोना के 178 नए मामले:पटना में मिले नए 102 कोरोना संक्रमित मरीज, अब 933 केस एक्टिव

पटना3 महीने पहले

बिहार में कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। बुधवार रात तक 178 नए केस सामने आए। इसमें 102 पटना से हैं। जबकि बाकी मरीज बिहार के अन्य जिलों के हैं। राज्य में अब 933 एक्टिव मरीज हैं। इससे पहले मंगलवार को बिहार में कोरोना के 211 मरीज मिले थे। पटना में 148 दिन बाद कोरोना 124 नए मरीज मिले थे। इससे पहले 7 फरवरी को राज्य में कोरोना के 235 और एक फरवरी को पटना में कोरोना के 109 मरीज मिले थे। इस साल पहली बार मंगलवार को इतने मरीज मिले थे।

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राज्य की पॉजीटिविटी रेट 0.106 फीसदी तो पटना की पॉजीटिविटी रेट 1.38 फीसदी हो गई है। राज्य में कुल 131812 सैंपल की जांच हुई है। राज्य की रिकवरी रेट 98.421 फीसदी है। वहीं आईजीआईएमएस में सर्जरी विभाग के चार, आई के एक, पीएसएम विभाग के एक डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। एनएमसीएच के एक डॉक्टर और दो स्टाफ संक्रमित हुए हैं।

बेऊर के 37 कैदी संक्रमित: पटना के अब हर इलाके में मरीज मिलने लगे हैं। बेऊर जेल में मंगलवार को भी 37 कैदी संक्रमित मिले। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह का कहना है कि कैदी सभी एसिम्टोमेटिक हैं। किसी स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाए।

लगातार बढ़ रहा कोरोना, मुकाबले को हम कितने तैयार

पटना के अधिकतर स्वास्थ्य उप केंद्रों और एपीएचसी में न डॉक्टर, न बेड, न ही दवा, कैसे होगा इलाज

कोरोना की तीन लहरों के बावजूद हमारे ग्रामीण अस्पतालों की स्थिति अब भी दयनीय है। पटना में 67 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 स्वास्थ्य उप केंद्र हैं। 113 में से 70 से अधिक स्वास्थ्य उप केंद्र अभी भी बदहाल हैंं।

67 में से 50 से अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों के भवन अच्छे हो गए हैं, लेकिन 40 से अधिक में डॉक्टर नहीं आते। दैनिक भास्कर के 13 रिपोर्टर ने पांच दिनों तक लगातार पटना के गावों में पड़ताल की तो ये खुलासे हुए....।

नौबतपुर के अजवां पंचायत भवन के एक छोटे से कमरे में 25 वर्ष से स्वास्थ्य उप केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। कागज पर यह पांच बेड का अस्पताल है लेकिन यहां न बेड है न दवा और न ही इलाज का कोई संसाधन।

छह माह पूर्व तक सप्ताह में एक दिन एक आयुष डॉक्टर आते थे। अब वे भी नहीं आते हैं। अन्य कर्मी कभी नहीं आते हैं। पूर्व पंचायत समिति सदस्य वशिष्ठ कुमार बोले-अस्पताल का अपना भवन वर्ष 2001 से बनकर तैयार है। लेकिन आज तक चालू नहीं किया गया। उद्घाटन के पूर्वे सिलिंग और अन्य भाग गिर रहे हैं।

शेरपुर एपीएचसी के डॉक्टर डेपुटेशन पर, सफाईकर्मी के हवाले गोपालपुर एपीएचसी
मनेर के शेरपुर में किराये के मकान में चल रहे एपीएचसी में एक आयुष चिकित्सक डॉ मणिशंकर हैं, तो दूसरे एमबीबीएस डॉ चंदन। डॉ चंदन का डेपुटेशन मनेर पीएचसी में कर दिया गया है। लिहाजा यहां की सारी जवाबदेही डॉ मणिशंकर पर है।

मनेर का दूसरा एपीएचसी कमला गोपालपुर में है। किराए के मकान में चल रहे इस एपीएचसी में भास्कर की टीम पहुंची तो देखा कि केंद्र पर बूढ़ी औरत सफाई कर्मी फुलपतिया देवी मौजूद थी।

कमरे में बैठने की कौन कहे खड़ा होने की भी जगह नहीं थी। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कोई आता - जाता नहीं है। डॉक्टर तो छोड़िए एएनएम भी नहीं आना चाहती। कोई दवा भी उपलब्ध नहीं रहता है।सिर्फ टीकाकरण किया जाता है। नया भवन 1 करोड़ 7 लाख की लागत से बनकर तैयार है।

मसौढ़ी और धनरुआ के एपीएचसी की स्थिति अच्छी
मसौढ़ी प्रखंड में दो एपीएचसी हैं। इनमें एक भगवानगंज और दूसरा लहसुना गांव में है। इन दोनों एपीएचसी में स्टाफ नर्स की नियुक्ति हो चुकी है और वे रोज ड्यूटी भी करती हैं। इन दोनों एपीएचसी में दो डॉक्टर हैं। यहां हर तरह की दवाएं भी उपलब्ध हैं।

वहीं, धनरुआ में कुल तीन एपीएचसी हैं। इसमें वीर , बांसबिगहा और सिम्हारी एपीएचसी शामिल है। तीनों केंद्रों पर स्टाफ नर्स की नियुक्ति है। इन केंद्रों पर 10 से 15 तरह की दवाएं ही उपलब्ध है।

बाढ़ के एपीएचसी नर्सों के भरोसे, एक बंद मिला
बाढ़ अनुमंडल के एपीएचसी नर्स के भरोसे हैं। रानाबीघा एपीएचसी में 01 नर्स और 01 एएनएम, बेलौर में 01 नर्स और 02 एएनएम, धनामा एपीएचसी में 01 नर्स और 02 एएनएम और एकडंगा एपीएचसी में 02 नर्स और 01 एएनएम फिलहाल कार्यरत हैं।

अथमलगोला के तीन एपीएचसी में करजान एपीएचसी बंद मिला। लोगों का कहना है कि अक्सर ताला ही लटका रहता है। जमालपुर एपीएचसी में 02 नर्स और रामनगर दियारा में भी 02 नर्स योगदान कर रही हैं।

कन्हाईपुर एपीएचसी भगवान भरोसे
मोकामा के जलालपुर एपीएचसी में पांच साल पूर्व दो नर्स की नियुक्ति हुई थी। उनसे टीकाकरण के साथ लोगों के उपचार का काम लिया जा रहा है। आपात सुविधा नहीं है। मोर एपीएचसी में प्रसव की सुविधा है। जिसको लेकर वहां दो आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं। कन्हाईपुर एपीएचसी भगवान भरोसे चल रहा है।

खुसरूपुर के दोनों एपीएचसी बंद
कोरोना काल के बाद खुसरूपुर पीएचसी की हालत पहले से खराब ही हुई है। पीएचसी के अंतर्गत दो एपीएचसी हैं। एक जगमलबीघा में और चौड़ा पंचायत में। पर दोनों बंद हैं। कारण यह है कि खुसरूपुर पीएचसी के लिए ही स्टाफ पर्याप्त नहीं है तो वेलनेस सेंटर या एपीएचसी में स्टाफ कहां से पहुंचेंगे।

फतुहा के 16 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में एक-दो को छोड़ सभी बदतर
फतुहा प्रखंड के सभी 16 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में से एक दो को छोड़कर शेष सभी का संचालन राम भरोसे ही हो रहा है। अलावलपुर उप स्वास्थ्य केंद्र व मासाढी उप स्वास्थ्य केन्द्र को छोड़कर कहीं भी उप स्वास्थ्य केंद्र सुचारू रुप से संचालित नहीं है। बलवा उप स्वास्थ्य केंद्र की हालात यह है कि यहां मरीजों का आना जाना नहीं होता है।

जीव-जंतुओं का बसेरा है। नत्थुपुर स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र किराए के भवन मे चलता है जो हमेशा बंद ही रहता है। बिंदौली उप स्वास्थ्य केंद्र भी गांव के एक दालान में चलता है। सभी उप स्वास्थ्य केंद्र पर नर्सों की प्रतिनियुक्ति है लेकिन सभी नर्स सीएचसी से जुड़ी हैं। मरीजों को किसी तरह की दवा उपलब्ध नहीं होती। चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर राजकुमार बोले-कर्मी कोरोना टीकाकरण व जांच से जुड़े थे जो वापस नहीं हुए हैं।

बख्तियारपुर में भी केंद्र खुलते ही नहीं
एपीएचसी का नया नाम हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हो गया लेकिन प्रखंड क्षेत्र में स्थित अधिकतर एचडब्ल्यूसी की स्थिति ठीक नहीं है। हरदासपुर दियारा केंद्र जो पटना, वैशाली एवं समस्तीपुर अर्थात तीन जिलों के सीमाओं से घिरा है, यहां के बारे में पूछे जाने पर लोगों का कहना है कि यहां इलाज कैसे होगा

जब केन्द्र महज कागजों पर चल रहा है। कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं आता। रुपस मरूआही समेत अन्य गांव के लोगों का भी यही कहना है कि कभी यहां इलाज करने वाले नहीं आते। वहीं डोमा करौटा स्थित केंद्र का भी यही हाल है।

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