दत्तक ग्रहण योजना:बिहार में 8 वर्षों में 1021 बच्चों को लिया गोद, इसमें 500 लड़कियां

पटना9 महीने पहलेलेखक: आलोक द्विवेदी
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26 संस्थाओं में 285 बच्चे, इनमें 52 फीसदी लड़कियां है। - Dainik Bhaskar
26 संस्थाओं में 285 बच्चे, इनमें 52 फीसदी लड़कियां है।

बिहार में 2015 से 2022 तक आठ वर्षों के दौरान दत्तक ग्रहण योजना के तहत लगभग 1021 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। जिसमें पांच सौ से अधिक लड़कियां है। वही पर 145 विदेशी परिवार ने बिहार करके विभिन्न संस्थाओं से बच्चों को गोद लिया है। 2019 के बाद गोद लेने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या सबसे अधिक रही है।

2018-19 में सबसे अधिक 249 बच्चों को लिया गया गोद

कोरोना संक्रमण काल से पहले 2018-19 में गोद लेने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। 2018-19 में बिहार से देश के विभिन्न क्षेत्रों में 210 बच्चों को गोद लिया गया है। वही पर विदेशी परिवार भी बिहार से 39 बच्चों को गोद लिया है। जिसमें 45 फीसदी लड़कियां थी। देश के अंदर गोद लेने वाले सबसे अधिक दिल्ली और महाराष्ट्र का परिवार रहा है। वहीं पर विदेशियों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के परिवार से सबसे अधिक बच्चों को गोद लिया है। गोद लेने वाले बच्चों में दो से पांच साल के बच्चे सबसे अधिक रहे हैं।

बिहार के विभिन्न जिलों में संचालित 26 दत्तक संस्था में 285 बच्चे हैं। जिसमें 52 फीसदी लड़कियां है। हालाकि, 300 से अधिक परिवार ऐसे है, जो बच्चों को गोद लेना चाहते हैं। लेकिन, नियमानुसार बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया काफी पेचीदा है। ऐसे में गोद लेने वाले अधिकांश परिवार मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। जिससे उनके आवेदन निरस्त हो जाते हैं।

दत्तक ग्रहण संस्था में 0 से 6 वर्ष के बच्चों को रखा जाता है। 4 वर्ष के बच्चों को गोद लेने के लिए दंपती में एक की उम्र 45 वर्ष से ज्यादा हो या फिर दोनों की संयुक्त उम्र 90 वर्ष हो तो वह गोद लेने के अधिकारी नहीं हैं। जिन परिवार में चार से अधिक बच्चे हैं। उन्हें भी गोद नहीं दिया जाता है।

योजना में 38 करोड़ रुपए केंद्र की हिस्सेदारी

मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग
मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग

बिहार में बच्चों के संरक्षण के लिए 2022-23 में 68 करोड़ रुपए की योजना बनायी गई है। जो वित्तीय वर्ष 2021-22 की अपेक्षा 12 करोड़ रुपए अधिक है। 2021-22 में बच्चों के संरक्षण के लिए 56 करोड़ रुपए की योजना बनायी गई थी। जिसमें 38 करोड़ रुपए केंद्र की और 18 करोड़ रुपए राज्य की हिस्सेदारी थी। जबकि, 2022-23 में 68 करोड़ रुपए की योजना बनी हुई है। जिसमें 38 करोड़ रुपए केंद्र की हिस्सेदारी है।

बच्चों के संरक्षण के प्रति सरकार काफी सजग है। इसके लिए पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वित्तीय वर्ष में बजट भी बढ़ाया गया है। बच्चों की देखरेख के लिए कर्मचारियों को भी नियुक्त किया जा रहा है। लोगों की जागरुकता की वजह से कुछ वर्षों में बच्चों के गोद लेने की प्रवृत्ति में तेजी आयी है। दत्तक ग्रहण योजना के माध्यम से बच्चों के भविष्य सुरक्षित मिल रहा है।
-मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग