मौत का आंकड़ा छिपाने वाले विभाग का नया कारनामा:इलाज में लापरवाही से मरीजों की जान लेने वाले पुष्पांजलि हॉस्पिटल पर नहीं कराया गया FIR, लाइसेंस रद कर मामले की लीपापोती

पटना4 महीने पहले
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पटना के भागवतनगर में स्थित पुष्पांजलि अस्पताल में मौत के खेल पर विभाग के बचाव का मामला सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है। - Dainik Bhaskar
पटना के भागवतनगर में स्थित पुष्पांजलि अस्पताल में मौत के खेल पर विभाग के बचाव का मामला सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है।
  • छोटे छोटे मामलों में FIR कराने वाला स्वास्थ्य विभाग एक अस्पताल को बचाकर सवालों से घिरा

कोरोना से मौत का आंकड़ा छिपाने वाले स्वास्थ्य विभाग का नया कारनामा सामने आया है। इलाज में मनमानी कर कोरोना के मरीजों की जान लेने वाले अस्पतालों को बचाने में भी लाीपापोती की जा रही है। पटना के भागवतनगर में स्थित पुष्पांजलि अस्पताल में मौत के खेल पर विभाग के बचाव का मामला सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है। इलाज में लापरवाही से मौत और सरकार की गाइडलाइन के बाद भी इलाज के नाम पर वसूली करने पुष्पांजलि हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सेफ करने का काम किया है।

लापरवाही से मौत की पुष्टि के बाद भी बचाव

कोरोना में मरीजों से सौदेबाजी और इलाज में लापरवाही में पटना के पुष्पांजलि हॉस्पिटल का कारनाम सामने आया है। जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है। कोरोना में परिवार को खोने वालों ने इस उम्मीद से शिकायत की थी कि मनमानी करने वाले हॉस्पिटल पर कार्रवाई की जाएगी लेकिन जिम्मेदारों ने हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी अस्पताल को बचाने का प्रयास किया है। विभाग खुद मान रहा है कि पुष्पांजलि हॉस्पिटल में मनमानी के कारण मौत हुई है, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है। सिविल सर्जन कार्यालय से यह बचाने का प्रयास है क्योंकि ऐसे गंभीर मामले की पुष्टि होने के बाद अस्पताल पर FIR होना चाहिए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के इलाज का लाइसेंस रद कर लीपापोती करने की कोशिश की है।

कमेटी की जांच में हुई है पुष्टि

सिविल सर्जन कार्यालय से 5 अगस्त को सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह के हस्ताक्षर से जारी आदेश में ही मनमानी झलक रही है। आदेश पढ़कर ही विभाग द्वारा अस्पताल का पक्ष लेने की आशंका हो रहा है। आदेश में कहा गया है कि भागवतनगर में स्थित पुष्पांजलि हॉस्पिटल द्वारा कोरोना के इलाज के दौरान की गई लापरवाही के कारण हुई मृत्यु एवं सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक वसूली गई राशि के संबंध में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त शिकायतों की जांच कमेटी द्वारा कराई गई।

सरकार के आदेश को नहीं मानने वालों पर विभाग का हाथ

सिविल सर्जन के आदेश में साफ कहा गया है कि कमेटी द्वारा जांच के दौरान इलाज में की गई लापरवाही के कारण हुई मौत एवं सरकार द्वारा निर्धारित दर से अधिक वसूली गई राशि को सत्य पाया गया। ऐसे गंभीर अपराध में पुष्पांजलि हॉस्पिटल की संलिप्तता पाए जाने के बाद भी सिविल सर्जन ने जारी आदेश में FIR कराने के बजाए कहा है कि विचार के बाद निर्णय लिया गया है कि भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि हॉस्पिटल को कोरोना के इलाज के लिए दी गई अनुमति एवं क्लीकल इस्टेबलिसमेंट एक्ट के तहत निर्गत औपबंधिक निबंधन संख्या 483/2019 को रद किया जाता है। सरकार का आदेश नहीं मानने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं किया जाना, लाइसेंस रद कर छोड़ दिया जाना गंभीर मामला है। इससे हॉस्पिटल की मनमानी पर लगाम नहीं लग सकता है। जबकि इससे छोटे मामलों में कोरोना काल में कई अस्पतालाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुष्पांजलि अस्पताल पर FIR नहीं कराए जाने से सिविल सर्जन कार्यालय सवालों के घेरे में है।

कोरोना काल में जमकर हुई मनमानी

कोरोना काल में निजी अस्पतालों में जमकर मनमानी हुई है। इलाज के लिए सरकार ने पैसा फिक्स कर दिया था लेकिन, इसके बाद भी जमकर मनमानी की गई। निर्धारित रेट से भी अधिक पैसे की वसूली की गई है। कोरोना काल में निजी हॉस्पिटल और एम्बुलेंस की शिकायत लगातार जिला प्रशासन को मिल रही थी। रेमडेसिवरी इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर भी कई अस्पताल सवालों में रहे हैं। ऐसे ही पुष्पांजलि हॉस्पिटल की भी शिकायत स्वास्थ्य विभाग को मिली थी। बताया जा रहा है कि अधिक पैसा वसूलने और इलाज में लापरवाही बरतने के साथ अन्य कई गंभीर शिकायत की गई थी।

पटना में 91 निजी अस्पताल को मिली थी अनुमित

पटना में कोरोना के इलाज के लिए 19 निजी अस्पतालों को अनुमति दी गई थी। इन अस्पतालों को बेड के हिसाब से अनुमति दी गई थी और पैसा भी सरकार ने फिक्स कर दिया था। निर्धारित रेट ही मरीजों से लेना था। इसमें ICU से लेकर वेंटिलेटर तक का इलाज पूरी तरह से फिक्स था। निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गई थी इसके बाद भी मनमानी नहीं खत्म हुई और कई अस्पतालों से शिकायत मिली। सूों की मानें तो कई अस्पतालों की जांच चल रही है जिसमें कार्रवाई हो सकती है।

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