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भास्कर खास:बिहार में 35% आरक्षण फिर भी 6.6% महिलाओं को रोजगार, झारखंड हमसे आगे; महिलाएं रोज 5 घंटे घरेलू काम में बिताती हैं, पुरुष सिर्फ 34 मिनट दे रहे

पटनाएक महीने पहलेलेखक: कैलाश पति मिश्र
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बिहार में कामकाजी महिलाओं का अनुपात गांव और शहर दोनों जगह 6.6- 6.6% ही है - Dainik Bhaskar
बिहार में कामकाजी महिलाओं का अनुपात गांव और शहर दोनों जगह 6.6- 6.6% ही है
  • यह खुलासा एनएसओ के कोरोना से पहले देश के 138799 घरों के टाइम यूज सर्वे में हुआ

35% महिला आरक्षण वाले बिहार में 6.6% महिलाओं के पास ही रोजगार है। यानी, सबसे पहले और सबसे ज्यादा महिला आरक्षण का रिकॉर्ड बनाने वाले बिहार में महिलाओं के पास पेड वर्क (वैतनिक कार्य) पड़ोसी झारखंड (8.5%) से भी कम है। जबकि, राष्ट्रीय औसत 18.4% है। 25.2% के साथ सबसे आगे गुजरात है। बिहार में कामकाजी महिलाओं का अनुपात गांव और शहर दोनों जगह 6.6- 6.6% ही है

वैतनिक और अवैतनिक गतिविधियों में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी मापने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पहली बार कराए गए टाइम यूज सर्वे में ये बातें सामने आई हैं। देश के 1,38,799 घरों में हुए सर्वे में 6 वर्ष और अधिक आयु के प्रत्येक सदस्य से समय के उपयोग की जानकारी जुटाई गई थी।

वैतनिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी

अगर राज्यों की आर्थिक स्थिति के साथ तुलना करें तो भी यह देखा गया है कि राज्य विकसित हो या विकासशील, पुरूष की तुलना में महिलाएं अधिक अवैतनिक कार्य पर समय देती है। प्रतिव्यक्ति कम आय वाले बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश हो या औसत आय वाला एमपी-राजस्थान हों या उच्च आय वाला गुजरात-केरल, हर जगह महिला अवैतनिक कार्य के लिए अधिक समय देती है- औसतन 81.0 फीसदी ही। जहां तक पेड कार्यों में समय का सवाल है तो राष्ट्रीय औसत 18.4 के मुकाबले बिहार में ऐसी महिलाएं 6.6% हैं तो गुजरात में सर्वाधिक 25.2 फीसदी। पड़ोसी राज्य झारखंड में एक महिला वैतनिक कार्यों के लिए 9 फीसदी समय देती है।

महिलाएं रोज 5 घंटे घरेलू काम में बिताती हैं, पुरुष सिर्फ 34 मिनट दे रहे
कही-सुनी नहीं, अब यह ऑन रिकॉर्ड है कि महिलाएं घर की जिम्मेदारी ही नहीं उठातीं, बल्कि पुरुषों के मुकाबले परिवार को कई गुणा ज्यादा समय देती हैं। बिहार में तो महिलाएं औसतन हर दिन 298 मिनट परिवार पर कुर्बान करती हैं, जबकि पुरुष घर-परिवार को महज 34 मिनट देते हैं। देश के 1,38,799 घरों में हुए सर्वे ने ग्रामीण और शहरी महिलाओं की प्राथमिकताएं भी अलग दिखाई हैं। कोरोना में लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम से परिस्थितियां बदलने के ठीक पहले वर्ष 2019 में जनवरी से दिसंबर तक 82,897 ग्रामीण और 55,902 शहरी घरों में यह सर्वे किया गया था।

कही-सुनी नहीं, अब यह ऑन रिकॉर्ड है कि महिलाएं घर की जिम्मेदारी ही नहीं उठातीं, बल्कि पुरुषों के मुकाबले परिवार को कई गुणा ज्यादा समय देती हैं। बिहार में तो महिलाएं औसतन हर दिन 298 मिनट परिवार पर कुर्बान करती हैं, जबकि पुरुष घर-परिवार को महज 34 मिनट देते हैं। देश के 1,38,799 घरों में हुए सर्वे ने ग्रामीण और शहरी महिलाओं की प्राथमिकताएं भी अलग दिखाई हैं। कोरोना में लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम से परिस्थितियां बदलने के ठीक पहले वर्ष 2019 में जनवरी से दिसंबर तक 82,897 ग्रामीण और 55,902 शहरी घरों में यह सर्वे किया गया था। -डॉ. वर्णा गांगुली, अर्थशास्त्री, आद्री

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