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भास्कर ने पहले किया था ड्राई वैक्सीन का खुलासा:अब विभाग की रिपोर्ट से खुली पोल, दो दिन में 2 लाख से 40 हजार पर पहुंच गया वैक्सीनेशन

पटना4 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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विभाग की रिपोर्ट ने ही यह बता दिया है कि बिहार में वैक्सीन की कमी हो गई है। - Dainik Bhaskar
विभाग की रिपोर्ट ने ही यह बता दिया है कि बिहार में वैक्सीन की कमी हो गई है।
  • 5 अप्रैल को दो लाख का था आंकड़ा 9 अप्रैल को 40 हजार में सिमटा
  • शुक्रवार की शाम तक 4425043 लोगों का टीकाकरण हो चुका है

बिहार में वैक्सीन ड्राई हो गई थी लेकिन अफसर मानने को तैयार नहीं थे। दैनिक भास्कर ने दो दिन पहले ही इस राज को खोला था और बता दिया था कि बिहार में वैक्सीन ड्राई होने से किस तरह से वैक्सीनेशन का काम प्रभावित हो रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हुआ है। हर दिन औसतन दो लाख के आसपास होने वाले वैक्सीनेशन का ग्राफ अचानक गिरकर लगभग 40 हजार आ गया। विभाग की रिपोर्ट ने ही यह बता दिया है कि बिहार में वैक्सीन की कमी हो गई है।

पटना में वैक्सीन शॉर्ट, जिलों में भी किल्लत

पड़ताल में खुली थी दावों की पोल

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा था कि सरकार के पास वैक्सीन की पूरी खेप है लेकिन लगवाने वालों में ही रुचि नहीं है। वैक्सीन सेंटरों से बार-बार ऐसी शिकायत आ रही थी कि वैक्सीनेशन नहीं हो पा रहा था। दैनिक भास्कर ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि प्रदेश में कई जिलों में वैक्सीन का स्टॉक ड्राई हो गया है। रिजर्व में उतनी वैक्सीन रखी गई है, जितनी की दूसरी डोज वालों को दी जानी है। ऐसे में कई सेंटरों पर पहली डोज लेने वालों का वैक्सीनेशन रोक दिया गया था। पड़ताल के दौरान कई सेंटर ऐसे भी मिले जहां कोवैक्सीन का दिन था लेकिन लोगों को कोविशील्ड दी जा रही थी। पड़ताल के दौरान भास्कर की टीम रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल भी गई वहां भी कोवैक्सीन की डोज खत्म थी। गर्दनीबाग में वैक्सीनेशन ही बंद कर दिया गया था। न्यू गार्डेनर रोड में हर कोवैक्सीन की डोज नहीं थी, जिससे सभी को कोविशील्ड दिया जा रहा था। कोवैक्सीन की दूसरी डोज लेने वालों को अस्पताल से वापस लौटना पड़ रहा था।

अब विभाग की रिपोर्ट पर भी गौर कीजिए

दैनिक भास्कर की पड़ताल के बाद सबसे पहले की गई वैक्सीन ड्राई की रिपोर्ट के स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े जारी किए हैं वह भी इसकी पुष्टि करते हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 9 अप्रैल को कुल 40046 लोगों का ही टीकाकरण हुआ है। इसमें पहली खुराक लेने वालों की संख्या 32251 है जबकि दूसरी खुराक लेने वालों की संख्या मात्र 7795 ही है। ऐसा आंकड़ा वैक्सीनेशन की शुरुआत होने के बाद बहुत दिन बाद आया है जब इतना कम टीकाकरण हुआ है। प्रदेश में शुक्रवार की शाम तक कुल 4425043 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। गुरुवार और शुक्रवार को आंकड़ा काफी कम रहा है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रदेश की इतनी बड़ी आबादी में अचानक से टीकाकरण 5 गुणा कैसे कम हो गया। कोरोना काल में लोगों की मारामारी के बीच इतने कम वैक्सीनेशन का आखिर क्या कारण रहा।

5 अप्रैल को 2 लाख से अधिक हुआ था वैक्सीनेशन

राज्य स्वास्थ्य समिति की 5 अप्रैल की रिपोर्ट पर गौर करें तो इस दिन प्रदेश में कुल 287576 लोगों का टीकाकरण हुआ था। इसमें 270011 लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज लगवाई थी जबकि दूसरी डोज लेने वालों की संख्या 17565 रही। 5 अप्रैल तक प्रदेश में कुल 3802057 लोगों का टीकाकरण हाे चुका था। वैक्सीन को लेकर लोगों में तब जागरूकता जब देश में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगे।

6 अप्रैल को भी दो लाख से अधिक ने ली वैक्सीन

राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकड़ों पर गौर करें तो इस दिन भी प्रदेश में 207346 लोगों ने टीकाकरण कराया था। इसमें पहली डोज लेने वालों की संख्या 192260 रही जबकि दूसरी डोज लेने वालों की संख्या 15086 थी। लगातार वैक्सीनेशन का ग्राफ तेजी से आगे बढ़ रहा था। इस दौरान जिलों में वैक्सीन का स्टाक भी कम होने लगा जिससे समस्या शुरू हो गई। हालांकि 6 अप्रैल तक वैक्सीनेशन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा था।

7 अप्रैल को एक लाख पहुंच गया आंकड़ा

राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकड़ों के मुताबिक 7 अप्रैल को प्रदेश में वैक्सीनेशन का आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक गिर गया। बिहार में 7 अप्रैल को 107841 लोगों का टीकाकरण हुआ। ऐसा माना जा रहा था कि वैक्सीन की कमी को देखते हुए टीकाकरण की रफ्तार को थोड़ा कम किया गया है। क्योंकि 7 अप्रैल को पहली डोज लेने वालों की संख्या 94116 थी जबकि मात्र 13725 लोगों ने दूसरी डोज लगवाई थी। 7 अप्रैल तक प्रदेश में 4238475 लोगों का टीकाकरण हो गया था।

8 अप्रैल के बाद से बड़ी गिरावट

राज्य स्वास्थ्य समिति के आंकड़ों के मुताबिक 8 अप्रैल को कुल 107071 लोगों का वैक्सीनेशन किया गया। इसमें पहली डोज लेने वालों की संख्या 92722 रही जबकि मात्र 14349 लोगों को ही दूसरी डोज दी गई। दो दिनों में आंकड़ों की रफ्तार काफी कम हो गई। 8 अप्रैल तक प्रदेश में कुल 4369348 लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका था। 8 अप्रैल को फिर भी आंकड़ा कुछ गनीमत रहा लेकिन 9 अप्रैल की रिपोर्ट तो चौंकाने वाली थी। 9 अप्रैल को प्रदेश में मात्र 40046 लोगों को ही टीका लग सका। इसमें पहली डोज वालों की संख्या 32251 और दूसरी डोज लेने वालों की संख्या 7795 ही रही। 9 अप्रैल तक प्रदेश में 4425043 लोगों का टीकाकरण हो चुका है।

शुक्रवार को पटना में 9 लाख वैक्सीन आई है

आंकड़ा क्यों गिरा इस पर कोई भी अधिकारी कुछ बता नहीं रहा है। कहीं सैनिटाइजेशन के नाम पर वैक्सीनेशन बंद कराने की बात कही गई तो कहीं कुछ और वजह बताई गई। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से भी सवाल किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में यह माना जा सकता है कि वैक्सीन का स्टाक कम होने और मात्र रिजर्व में डोज बचे होने के कारण वैक्सीनेशन का ग्राफ दो से तीन दिनों तक कम गया और 9 अप्रैल को काफी चौंकाने वाला हो गया। हालांकि शुक्रवार को ही पटना में 9 लाख वैक्सीन आई है। इसका असर अब वैक्सीनेशन की रफ्तार पर दिखेगा। आने वाले दिनों में फिर वैक्सीनेशन की रफ्तार एक दिन में लगभग दो लाख के आसपास पहुंच जाएगी।