हाई कोर्ट ने ASI और राज्य सरकार से सवाल किया:डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली और स्मारकों का मामला, 11 जनवरी को अगली सुनवाई

पटना21 दिन पहले
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पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वर्चुअल रूप से भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेइ और वहां उनके स्मारक की दयनीय स्थिति के मामले पर सुनवाई करते हुए आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया व राज्य सरकार को अगली तिथि तक निश्चित रूप तौर पर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

कमेटी का गठन हुआ था

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने अधिवक्ता विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसके पूर्व कोर्ट ने वरीय अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार समेत तीन अधिवक्ताओं की एक कमेटी का गठन किया था। कोर्ट ने हालात का जायजा लेते हुए रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। पिछली सुनवाई की तिथि को कमेटी ने रिपोर्ट सौंपा था। वकीलों की कमिटी ने जीरादेई स्थित डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर की जर्जर स्थिति, बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कही थी। साथ ही साथ कमेटी ने पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गंदगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया था।

स्मारकों की हालत खराब हुई

इसके साथ ही कमेटी ने पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी गंभीरता से लिया है। पूर्व में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकारों से 3 जनवरी, 2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया था। इस टीम को जीरादेइ और वहां स्थित स्मारकों, पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित स्मारकों का जायजा लेकर कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था। जनहित याचिका के जरिये कोर्ट को बताया गया है कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है। न तो वहां पहुँचने के लिए सड़क की हालत सही है और न ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति ठीक।

11 जनवरी को सुनवाई होगी

उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है। कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती है। स्थिति में शीघ्र सुधार हेतु केंद्र व राज्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद न ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता रहे, बल्कि भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद वे भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने थे। इस पद को उन्होंने मई, 1962 तक सुशोभित किया था। तत्पश्चात भारत के राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे, जहां 28 फरवरी, 1963 को उनका निधन हो गया था। इस मामले पर आगे की सुनवाई अब आगामी 11 जनवरी को की जाएगी।

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