बिहार के सबसे बड़े ऑनलाइन बैंक फ्रॉड का खुलासा:बैंककर्मी दोस्तों को खाते की जानकारी देकर ऑनलाइन निकलवा लेता था पैसा, अब तक डकार चुके थे 3 करोड़, 22 घोस्ट खाते फ्रीज हुए

पटनाएक वर्ष पहले
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गिरफ्तार आरोपियों के साथ विशेष टीम। - Dainik Bhaskar
गिरफ्तार आरोपियों के साथ विशेष टीम।
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बिहार में हवाला कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। वह बेरोजगार युवकों को पैसा देकर उनसे जालसाजी करा रहे हैं। मुजफ्फरपुर की विशेष पुलिस टीम ने शनिवार को बिहार के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड/ऑनलाइन फ्रॉड का पर्दाफाश कर दिया। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार को गिरफ्तार किया है। इसमें एक बैंककर्मी भी शामिल है।

बताया जाता है कि यह गिरोह सबसे पहले वैसे लोगों को टारगेट करता था, जिनके पास पैसा अधिक आता हो और लगातार निगरानी करने वाले नहीं हो। उनके टारगेट पेंशनधारी, बुजुर्ग, व्यवसायी और नेता ज्यादा होते थे। टारगेट चुनने के बाद फर्जी आधार कार्ड बनाकर उनके एकाउंट में दर्ज मोबाइल नंबर को बदल देते थे। नंबर बदलने के बाद बैंक का मोबाइल ऐप डाउनलोड कर खाते से पैसे का ट्रांजैक्शन ऑनलाइन कर देते थे और लोगों को पता भी नहीं चलता था। यह सब जानकारी शनिवार शाम प्रेस कांफ्रेंस कर मुजफ्फरपुर SSP जय कांत ने दी।

उन्होंने बताया- "गिरफ्तार चारों आरोपियों में सदर थाना क्षेत्र के साइंस कॉलेज स्थित पंजाब नेशनल बैंक के कैशियर कम क्लर्क नितेश कुमार सिंह भी शामिल है। गिरोह ने करीब 3 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया है। इनके पास से 11.24 लाख रुपए कैश, 12 मोबाइल, 12 पासबुक, तीन लैपटॉप, एक कार, 20 आधार कार्ड, सात पैन कार्ड और पॉश मशीन बरामद किया है'।

SSP ने कहा- "गिरफ्तार अपराधियों में बैंककर्मी के अलावा कुढ़नी पुपरी का मंजय कुमार सिंह, अहियापुर कोल्हुआ पैगम्बरपुर का मोहम्मद जफर इकबाल और वैशाली जिला के पातेपुर लहलादपुर का राजेश कुमार शामिल है। 22 घोस्ट (भूत, जिसके संचालक का पता नहीं) खाता को फ्रीज किया गया है। इसमें 82 लाख 43 हजार 615 रुपये हैं। दूसरे खातों की जानकारी मिली है। सभी को फ्रीज किया जा रहा है। गत दिनों टाउन थाना में एक केस दर्ज हुआ था। इसमें रिटायर्ड BSNL कर्मी रामदेव राम के खाते से इसी गिरोह ने 22 लाख 40 हजार रुपए उड़ा लिए थे। इसके बाद जांच शुरू हुई। कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और एक-एक कर सभी पकड़े गए'।

PNB मोबाइल एप से करते थे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

SSP ने बताया- "बैंककर्मी और गिरफ्तार मंजय एक ही गांव के रहने वाले हैं। बैंककर्मी नितेश ग्राहकों की पूरी जानकारी मंजय को बताता था। मंजय इसे मोहम्मद जफर को देता था। जफर यह जानकारी राजेश तक पहुंचता था। फिर राजेश फर्जी आधार कार्ड बनाता था, जिस पर आधार संख्या समेत सभी जानकारों असली धारक की होती थी। बस फोटो किसी और का इस्तेमाल करता था। इस फर्जी आधार कार्ड के जरिए ग्राहक के बैंक खाता में रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर दूसरे कम्पनी में पोर्ट करता था। फिर PNB मोबाइल एप डाउनलोड कर उस ग्राहक के खाता से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लेता था'।

किसी कम्पनी के नाम से खोलता था फर्जी/घोस्ट एकाउंट

पुलिस जांच में पता लगा है कि 40 से अधिक घोस्ट( भूत) एकाउंट बंगलुरु और कलकत्ता में खोल रखा है। यह सभी एकाउंट प्राइवेट बैंकों में हैं। इसे खोलने के लिए अलग-अलग कंपनियों का नाम इस्तेमाल किया गया है। SSP का कहना है- "खाता का डिटेल्स तो है, लेकिन इसे चला कौन रहा है। यह किसी को नहीं पता। इसे ही घोस्ट एकाउंट कहा जाता है। ग्राहकों के खाता से फ्रॉड कर रुपये इन्हीं एकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर करता था। फिर हवाला के जरिये ये पैसा इनलोगों तक पहुंचता था'।

50% मिलता था हिस्सा

उन्होंने बताया- "एकाउंट चलाने वाला और हवाला से इन लोगों को पैसा भेजने वाला जिले से बाहर का कोई बड़ा हवाला कारोबारी है। वह रुपए की हेराफेरी में माहिर है। या यूं कहें कि विदेश तक उसके नेटवर्क हैं। वहीं इनलोगों को फ्रॉड का पैसा भेजता था। बदले में वह 50 परसेंट कमीशन लेता था। एकाउंट ऑनर और हवाला कारोबारी का भी पता लग चुका है। उस पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है'।

SSP ने बताया बचने का तरीका

SSP ने कहा- "यह बिहार में पहला ऐसा केस है, जिसमें सिम को स्वैप कर इतना बड़ा फ्रॉड किया गया है'। इससे बचने के लिए सबसे पहला कदम है कि जैसे ही आपके मोबाइल से नेटवर्क एक घंटे से अधिक के लिए गायब हो, आप तुरन्त कस्टमर केअर को कॉल कर अपना मोबाइल नम्बर ब्लॉक करा लें। फिर बैंक के कस्टमर केयर को कॉल कर खाता को फ्रिज करा लें। तभी इस फ्रॉड से बचा जा सकता है'।

इस गिरोह ने रिटायर्ड BSNL कर्मी के अलावा, छपरा DM ऑफिस से रिटायर्ड कर्मी, सीतामढ़ी के रिटायर्ड SDO, रिटायर्ड महिला प्रोफेसर समेत कई ग्राहकों को निशाना बनाया है। मुजफ्फरपुर ही नहीं सीतामढ़ी, मोतिहारी, छपरा, दरभंगा और समस्तीपुर समेत कई जिलों में इस गिरोह का जाल फैला है।

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