एंटीजन किट कालाबाजारी मामला:आखिर सदर अस्पताल के 'किंगपिन' पर मेहरबानी क्यों, गिरफ्तारी आदेश जारी, ढाई महीने बाद भी फरार

पटना4 महीने पहले
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9 मई को छापेमारी करती पुलिस। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
9 मई को छापेमारी करती पुलिस। (फाइल फोटो)

जब लोग कोरोना से दम तोड़ रहे थे। तब जिले में एंटीजन किट कालाबाजारी का मामला उजागर हुआ था। इसमें कोई और नहीं बल्कि सदर अस्पताल के संविदा पर बहाल किये गए कर्मी ही थे। एक-एक कर पुलिस ने पांचों आरोपितों को गिरफ्तार किया। सदर अस्पताल के लैब टेक्नीशियन लव कुमार के सकरा थाना क्षेत्र स्थित सुस्ता गांव में नौ मई को छापेमारी की। वहां से 4 हजार एंटीजन किट समेत अन्य सामान बरामद किया गया। लव के साला संजय की भी गिरफ्तारी हुई।

इधर, सदर अस्पताल से लव के अलावा आनन्द मुकेश, दीपक कुमार और एम्बुलेन्स चालक मिथिलेश को दबोचा गया। उस समय तक पुलिस को पता था कि लव ही इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। लेकिन, जब सख्ती से पूछताछ हुई तो किंगपिन का नाम उसने उगल दिया। किंगपिन यानी सदर अस्पताल का हेल्थ मैनेजर प्रवीण कुमार। उसकी बहाली तो संविदा पर हुई थी। लेकिन, उसने देखते-देखते अपना एक सिंडिकेट तैयार कर लिया था। प्रवीण कुमार पर 10 मई को FIR दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह फरार चल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि वह ड्यूटी भी कर रहा है।

आपदा में खोज लिया अवसर

प्रवीण कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आपदा में अवसर खोज लिया। प्रतिदिन एक हजार किट जांच के लिए मिलता था। आरोपित लव के हाथों में इसकी बागडोर थी। वह मुश्किल से छह सौ किट ही खपत करता था। शेष चार सौ किट अपने ससुराल पहुंचा देता था। वहां से एम्बुलेन्स चालक मिथिलेश अलग-अलग सप्लाई करता था। सामान बिकने के बाद पैसा किंगपिन के पास भी पहुंचता था।

पहले विभाग बचाता रहा, अब पुलिस बरसा रही मेहरबानी

सकरा थाना में FIR दर्ज हुआ। उक्त पांचों के अलावा किंगपिन समेत दो अन्य पर केस दर्ज हुआ। लेकिन, उस समय स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी उसके बचाव पक्ष में उतर आए। विभागीय कार्रवाई शुरू हुई तो उसमें भी उसे पाक-साफ करार दिया। पुलिस भी उसे गिरफ्तार नहीं कर रही थी। एक दो बार अस्पताल में छापेमारी ज़रूर हुई। लेकिन, वह सिर्फ खानापूर्ति थी। अब सवाल उठता है कि ऐसी मेहरबानी क्यों? कहीं इस खेल में और धुरन्धर तो शामिल नहीं है। जिन्हें डर है कि उसके पकड़े जाने पर भंडा फुट जाएगा।

हर दिन कर रहा ड्यूटी, बैठक में भी होता शामिल

उसका नाम सामने आने के बाद कुछ दिन तक तो वह चोरी छिपे रहा। लेकिन, सूत्रों की माने तो इधर कई दिनों से सदर अस्पताल में प्रतिदिन ड्यूटी कर रहा है। यहां तक कि बड़े पदाधिकारियों की जब बैठक होती है, उसमे भी शामिल होता है। लेकिन, किसी का ध्यान उस तरफ नहीं जाता है या देना नहीं चाहता है। डीएसपी पूर्वी मनोज पांडेय से जब इस सम्बंध में जानकारी ली गयी तो उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ गिरफ्तारी आदेश जारी कर चुके हैं। उनकी जानकारी में वह फरार है। हालांकि, टीम बनाकर लगातार छापेमारी की जा रही है, ताकि उसकी गिरफ्तारी हो सके।

कई निजी अस्पतालों में साठगांठ

पुलिस पूछताछ व जांच में पता लगा कि सरकारी किट को वह निजी अस्पतालों में अच्छी कीमत लेकर बेच रहा है। कई अस्पतालों में उसकी साठगांठ का पता लगा था। वहां पर भी पुलिस की छापेमारी हुई थी। लेकिन, कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। या यूं कहें कि पुलिस के पहुंचने से पहले साक्ष्य को मिटा दिया गया था।

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