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पटना में 11 घंटे चली विजिलेंस की कार्रवाई:पुल निर्माण निगम के इंजीनियर के घर छापा, इंजीनियर के घर से 1.43 करोड़ कैश मिले, 2.83 करोड़ संपत्ति का पता चला

पटना10 महीने पहले
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बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के इंजीनियर राजकिशोर का घर। - Dainik Bhaskar
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के इंजीनियर राजकिशोर का घर।

पटना में शुक्रवार को विजिलेंस की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के इंजीनियर रविंद्र कुमार के घर छापेमारी की। जो करीब 11 घंटे तक चली। इस छापेमारी में अब तक इंजीनियर के पास से अब तक 2.83 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का पता चला। इसके ठोस सबूत मिले। विजिलेंस के इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया कि रविंद्र कुमार ने सरकारी नौकरी में आने के बाद दोनों हाथ बटोर खूब काली कमाई की। इनके घर को खंगाल रही टीम के होश उस वक्त उड़ गए जब बैक टू बैक कैश मिलने लगा। इंजीनियर के घर से 1.43 करोड़ रुपए कैश मिले हैं। सूत्र बताते हैं कि जब घर के अलग-अलग जगहों से कैश मिलने लगे तो उसे गिनने के लिए मशीन को मंगवाना पड़ गया।

20 लाख रुपए की FD मिली। 67 लाख रुपए के कीमत की सोने-चांदी की ज्वेलरी बरामद हुई। अलग-अलग बैंकों के 15 अकाउंट के डिटेल्स मिले। इन अकाउंट्स में 53 लाख रुपए जमा हैं। मामला यहीं पर नहीं रुका। इंजीनियर साहब ने अपनी पत्नी के नाम पर अलग-अलग जगहों पर कीमती प्रोपर्टी खरीदी है। इसके कागजात मिले हैं। पत्नी के नाम पर मिले प्रोपर्टी की कीमत 1 करोड़ 23 लाख 3948 रुपए है।

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के इंजीनियर रविंद्र कुमार की पोस्टिंग पूर्व में वैशाली पथ प्रमंडल हाजीपुर में रही है। इनके खिलाफ विजिलेंस मुख्यालय को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। इसके बाद शुक्रवार की सुबह 9 बजे ही DSP सर्वेश कुमार सिंह की अगुवाई में विजिलेंस की टीम ने छापेमारी शुरू की। टीम पटना के शास्त्री नगर थाना के तहत पुनाईचक के मोहनपुर इलाके में रजिया मंजिल के नाम से इंजीनियर का आलीशान घर पहुंची। टीम ने पूरे घर को खंगाला। हर एक कमरे और सामान की तलाशी ली। घर के अंदर मौजूद लोगों से एक-एक कर पूछताछ की। विजिलेंस की यह कार्रवाई देर शाम तक चली। पूरे कार्रवाई पर विजिलेंस मुख्यालय भी अपनी नजर बनाए हुए थी।

विजिलेंस ने इस मामले में 11 अगस्त को ही इंजीनियर के खिलाफ FIR नंबर 30/2021 दर्ज की थी। केस दर्ज करने के एक दिन बाद ही कार्रवाई भी कर दी गई। मुख्यालय के अनुसार अभी भी बहुत सारी संपत्ति ऐसी है, जिसके अर्जित करने का कोई सबूत इंजीनियर के पास से नहीं मिली। जिसके बारे में पड़ताल चल रही है।

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