फाइलेरिया में बिहार देश में टॉप, अभियान में पीछे:14 जून से फाइलेरिया के खिलाफ चलाया जाना था अभियान, अब 20 सितंबर से 22 जिलों में उन्मूलन के लिए चलेगी मुहिम

पटना4 महीने पहले
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फाइलेरिया के खिलाफ अभियान को लेकर बिहार के जिला एवं प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठक की जा रही है। - Dainik Bhaskar
फाइलेरिया के खिलाफ अभियान को लेकर बिहार के जिला एवं प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठक की जा रही है।
  • 22 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर चलाया जाएगा विशेष अभियान

फाइलेरिया में बिहार देश में टॉप पर है, लेकिन अभियान में पीछे है। संक्रमण के खिलाफ 14 जून से अभियान चलाया जाना था जो अब 20 सितंबर से चलाया जाएगा। सरकार का कहना है कि ऐसा कोरोना के कारण हुआ है। कोरोना की लड़ाई में ही फाइलेरिया का अभियान छूट गया लेकिन अब मुहिम के तहत राज्य के 22 जिलों में दवाएं दी जाएंगी। इसमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, बक्सर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, जहानाबाद, जमुई, कैमूर, कटिहार, खगड़िया, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पटना, सहरसा, सारण, सीतामढ़ी, सीवान एवं सुपौल जिला शामिल है।

14 जून से थी तैयारी, अब बरसात खत्म होने पर अभियान

स्वास्थ्य विभाग ने 14 जून से ही बिहार के 22 जिलों में एमडीए अभियान चलाने का निर्णय लिया था, लेकिन कोरोना संक्रमण के मद्देनजर अब इस अभियान की शुरुआत 20 सितम्बर से होगा। बरसात में मच्छरों से फाइलेरिया का खतरा होता है, लेकिन अब 20 सितंबर से अभियान चलाया जाएगा। इसे लेकर सभी चिह्नित जिलों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अभियान के बारे में समुदाय को जागरूक करने के लिए आईईसी सामग्रियां बनाई गई हैं, जिसे संबंधित जिलों में वितरित किया जाएगा।

टास्क फोर्स का किया जाएगा गठन

फाइलेरिया के खिलाफ अभियान को लेकर बिहार के जिला एवं प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स की बैठक की जा रही है। एमडीए राउंड के दौरान अधिकतम योग्य लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान के दौरान एलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं लोगों को खिलाई जाएगी। अभियान के शुरू होने से पूर्व दवाओं की मांग एवं आपूर्ति की कार्य-योजना भी पूरी की जाएगी।

2 वर्ष से कम उम्र वालों को नहीं खानी दवा

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रोग से ग्रसित लोगों को छोड़कर शेष सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई जाएगी। फाइलेरिया वैश्विक स्तर पर गंभीर रोगों की सूची में शामिल है। वैश्विक स्तर पर भारत फाइलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल है। जबकि भारत में बिहार फाइलेरिया से सर्वाधिक लोग प्रभावित हैं।

फाइलेरिया की खाएं दवा

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए यह जरूरी है कि एमडीए राउंड में सभी लोग दवा का सेवन करें। फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्तियों में शुरुआती दौर में कभी-कभी कोई लक्षण भी नहीं दिखते हैं या लक्षण दिखने में कई साल लग जाते हैं। इसलिए सभी योग्य लोगों के लिए दवा सेवन काफी जरूरी है। फाइलेरिया से बचाव का रास्ता इसके उपचार से काफी आसान है। घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। इसके साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके।

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