शराबबंदी में भी 15% लोग छलका रहे जाम:2020 में आई NFH-5 की रिपोर्ट पर चेत गई होती सरकार तो नहीं उजड़ता जहरीली शराब से परिवार

पटनाएक महीने पहले
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  • नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में शराबबंदी कानून का हुआ था खुलासा, ड्राई स्टेट में जमकर छलक रहे जाम

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (NFH-5) की रिपोर्ट ने 2020 में ही बिहार की शराबबंदी कानून की पोल खोल दी थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बिहार में 15% लोग शराब पी रहे हैं। शहरी इलाकों में 14 और ग्रामीण इलाकों में 15% लोग शराब का सेवन कर रहे हैं। ड्राई स्टेट में हुए इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद भी बिहार सरकार गंभीर नहीं हुई और रिपोर्ट के बाद कोई एक्शन नहीं लिया। सिस्टम की सुस्ती से आज बिहार जहरीली शराब का दंश झेल रहा है। पिछले 5 दिनों में गोपालगंज, बेतिया और समस्तीपुर में जहरीली शराब पीने से 41 लोग की जान जा चुकी हैं।

नीतीश की शराबबंदी पर केंद्र की रिपोर्ट
CM नीतीश कुमार की शराबबंदी की पोल सेंट्रल की रिपोर्ट में 2020 में ही खुली थी। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (NFH-5) की रिपोर्ट 2020 के मुताबिक बिहार में शराबबंदी के बाद भी लोग शराब पी रहे हैं। राज्य के 15% लोग शराब पी रहे हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहर पर भारी पड़ रहे हैं। शहर में 14 और ग्रामीण इलाकों के 15% लोग शराब पी रहे हैं। इसमें महिलाएं और नाबालिग शामिल हैं।

2020 में देश के 22 राज्यों के फेज एक की रिपोर्ट 2019-2020 में जारी हुई थी। इसमें यह खुलासा हुआ कि बिहार के गांवों में आज भी शहरों की अपेक्षा अधिक शराब का सेवन किया जा रहा है। पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य में शराब कहां से आ रही है, यह सरकार के लिए सवाल है।

सरकार की सक्रियता का खुलासा
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (NFH-5) की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था कि बिहार में महिलाएं भी शराब की शौकीन हैं। शहरों में भी 0.5% महिलाएं शराब पी रही हैं और गांव में यह संख्या 0.4% रही है। पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य में यह आंकड़ा कानून की पोल खोलने के लिए काफी है। सरकार इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद भी शहर से लेकर गांव तक कोई काम नहीं की। शराब की बरामद हो रही खेप से सरकार की सक्रियता का खुलासा हो रहा है।

शराब से मौत का तांडव जारी
बिहार के 3 जिलों में 4 दिनों में जहरीली शराब से 41 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें शनिवार को समस्तीपुर में हुई 4 मौत भी शामिल है। आधा दर्जन से अधिक लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। इसमें 3 की आंखों की रोशनी जा चुकी है। मरने वालों में गोपालगंज से 20, बेतिया से 17 और समस्तीपुर से BSF और आर्मी के एक एक जवान सहित 4 लोग शामिल हैं। प्रशासन कई मौत को संदिग्ध मान रहा है लेकिन परिजनों का साफ कहना है कि मौत शराब पीने के कारण तबीयत बिगड़ने के बाद हुई है।

शराबबंदी में भी नशे में हंगामा

पंचायत चुनाव में सुस्त हो गए जिम्मेदार
बिहार में पंचायत चुनाव में शराबबंदी कानून की जमकर पोल खुली है। हर फेज में शराब की मांग बढ़ी है। गांवों में तो जमकर शराब चला है। पुलिस और उत्पाद विभाग की बरामदगी से भी यह साफ हो गया है कि पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य में बाहर से बड़ी खेप आ रही है। पंचायत चुनाव में पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद से पुलिस ने लगभग साढ़े 4 लाख लीटर शराब जब्त किया। इसमें 25 प्रतिशत से अधिक शराब पहले चरण वाले चुनाव क्षेत्र से बरामद किया गया था। इसके अलावा मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की टीम ने भी सितंबर में 1.20 लाख लीटर से अधिक शराब बरामद किया।

24 अगस्त के बाद राज्य में 4.5 लाख लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है, इसमें 1.25 लाख लीटर शराब सिर्फ पहले चरण के 10 जिलों से बरामद हुई है। पंचायत चुनाव के दौरान 29 सितंबर को पटना के पालीगंज पुलिस ने ट्रक में 50 लाख से अधिक की शराब बरामद की थी। ट्रक में चावल के भूजा के नीचे छिपाकर शराब रखा गया था। यह तो महज एक बानगी बस थी, ऐसी कई बड़ी खेप बरामद हुई जाे शराबबंदी की पोल खोलने के लिए काफी है। पुलिस की सुस्ती से मौत का आंकड़ा आज भारी पड़ रहा है।

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