हार्ट रोगियों पर भारी पड़ा कोरोना:वर्ल्ड हार्ट डे स्पेशल- पोस्ट कोविड में हृदय रोग का बढ़ा मामला, कोरोना के बाद ब्लॉकेज का खतरा; संक्रमण से हृदय पर खतरा बढ़ा

पटना2 महीने पहले
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कोरोना संक्रमित लोगों में सबसे अधिक खतरा हार्ट पर होता है। - Dainik Bhaskar
कोरोना संक्रमित लोगों में सबसे अधिक खतरा हार्ट पर होता है।

कोरोना ने हृदय रोगियों की मुश्किल बढ़ा दी है। बिहार में 7 लाख से अधिक लोग कोरोना को मात दे दिए हैं, लेकिन इसमें हार्ट के रोगियों के लिए मुश्किल बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण के दौरान हार्ट में सूजन से पोस्ट कोविड में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना इंफेक्शन के साइड इफेक्ट में हृदय रोगियों पर अधिक असर पड़ा है।

कोरोना काल में अधिक संख्या में संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले पटना AIIMS के भूतपूर्व चिकित्सक डॉक्टर अभिषेक रंजन का कहना है कि कोरोना संक्रमित लोगों में सबसे अधिक खतरा हार्ट पर होता है। कोरोना के मामले कम हो गए हैं, लेकिन हार्ट की समस्या बढ़ी है। डॉ अभिषेक का कहना है कि इसके पीछे बड़ा कारण संक्रमण से हार्ट में सूजन और सेल के डेड होना है। पोस्ट कोविड के मामलों में हृदय रोगियों की संख्या आए दिन बढ़ रही है। कोरोना संक्रमण के दौरान खून का गाढ़ा हो जाने के कारण समस्या हुई है। सेल डैमेज होने के साथ नलियाें में सूजन आ जाता है। इस कारण से ही कोविड के बाद हार्ट का खतरा बढ़ा है। यह ऐसी समस्या है जो लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

काेरोना ने शरीर के हर अंग को प्रभावित किया

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कोरोना वार्ड के नोडल डॉक्टर अजय अरुण का कहना है कि कोरोना के कारण हृदय के साथ शरीर के हर अंग पर प्रभाव पड़ा है। ऐसे मामले भी कोरोना काल में आए हैं जिसमें कोरोना के कारण हार्ट फेल होने से मरीज की मौत हुई है। संक्रमण से हृदय पर खतरा बढ़ा है। कोरोना के संक्रमित लोगों को हृदय से संबंधित परेशानी के कारण ही बचाव अधिक जरुरी है। हृदय रोगियों को ऐसे बीमारियों पर विशेष ध्यान रखना होता है, जिससे समस्या नहीं हो।

दो साल में हृदय रोगियों की मुश्किल बढ़ी

इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ एके झा का कहना है कि कोरोना के संक्रमण काल में मुश्किल बढ़ी है। जो पहले से हृदय रोग से परेशान रहे हैं उनका खतरा बढ़ा है। हृदय में संक्रमण न हो इसके लिए जांच पड़ताल के साथ नियमित दवाएं आवश्यक हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण होने के बाद ऐसे लोगों में समस्या कम आई है जो पहले से हृदय रोग से परेशान नहीं थे। ऐसे लोग जो कोरोना से संक्रमित हैं और पहले से हृदय की बीमारी से परेशान था उन्हें समस्या है। डॉ ए के झा का कहना है कि हृदय की सुरक्षा को लेकर मरीज को नियमित ब्लड प्रेशर की जांच के साथ समय से परीक्षण कराना चाहिए।

कोरोना में हार्ट फेल्योर के मामले बढ़े

कोराेना से संक्रमित गंभीर मरीजों में हार्ट फेल्योर का मामला अधिक देखने को मिला है। ऑर्गन फेल्योर के मामलों में सबसे अधिक हृदय के ही मामले आए हैं। पटना में कोरोना से अब तक 9660 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें अधिकतर मामलों में हार्ट के फेल होने का मामला आया है। डॉ ए के झा का कहना है कि संक्रमण के कारण हार्ट रोगियों की समस्या बढ़ी, जिनको संक्रमण गंभीर रूप से हुआ उनकी जान बचाना मुश्किल हुआ। डॉक्टरों की माने तो कोरोना संक्रमण से मरने वालों में 20 प्रतिशत हार्ट फेल होने का मामला आया है।

7 लाख से अधिक काेरोना संक्रमित

अब तक बिहार में 725948 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं। इसमें 716235 ठीक हुए हैं जबकि 9660 लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार में बुधवार तक एक्टिव मामलों की संख्या 52 है। डॉक्टरों का कहना है कि जो भी कोराेना संक्रमित हुए हैं उन्हें हृदय रोग को लेकर हमेशा गंभीर होना होगा। समय समय से जांच और चिकित्सकीय परामर्श जरुरी है।

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