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पंचायत प्रतिनिधियों पर नीतीश अकेले!:मांझी के बाद सहनी भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में, BJP के मंत्री खामोश; लेकिन सांसद रामकृपाल ने समर्थन की लिखी चिट्‌ठी

पटना2 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है। धीरे-धीरे अब सतारूढ़ दल के नेता भी मुखर होने लगे हैं और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग करने लगे हैं। BJP सांसद रामकृपाल यादव के चिट्‌ठी लिखने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी ने भी मुखिया संघ की मांगों का समर्थन कर दिया है।

दरअसल, बिहार में पंचायती राज के प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को खत्म हो रहा है। अब मांग यह हो रही है कि जब तक नए प्रतिनिधियों का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान में काम कर रहे जन प्रतिनिधियों का अधिकार जारी रखा जाए। वहीं, सरकार कार्यकाल बढ़ाने के मूड में नहीं है। वो अधिकारियों को पंचायतों का जिम्मा सौंपना चाहती है।

पूर्व CM मांझी से मिले मंत्री सहनी

मंत्री मुकेश सहनी ने शनिवार को मांझी से मुलाकात की एक तस्वीर अपने सोशल मीडिया पर भी डाली है और लिखा है कि आज NDA के सहयोगी एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात हुई। विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। डिजिटल सिग्नेचर की वजह से काफी पंचायत में कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यदि पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल को नहीं बढ़ाया गया तो विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सरकार को पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल जब तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं होती तब तक के लिए बढ़ाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात करते बिहार के पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी।
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात करते बिहार के पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी।

एक दिन पहले मांझी ने भी सरकार से की थी मांग

हम पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार को ट्वीट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया था कि कोरोना के इस आपात संकट को ध्यान में रखते हुए पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल कम से कम 6 महीने के लिए बढ़ा दिया जाए।

मांझी ने इसके लिए संविधान के आर्टिकल 352 का उदाहरण दिया है, जिसके तहत कई बार आपातकाल के दौरान लोकसभा के कार्यकाल को बढ़ा दिया गया था। हम नेता ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल विस्तार से ग्रामीण इलाकों में विकास का कार्य चलता रहेगा।

सियासत को गरमा सकती है यह मुलाकात

मंत्री मुकेश सहनी और पूर्व CM जीतनराम मांझी की ये मुलाकात आने वाले समय के सियासत को और गरम कर सकती है। सियासत में कहा जाता है कि छोटे दल आपस में मिल जाए तो वो बडे दलों के लिए खतरा हो जाते हैं। शायद ये मुलाकात उस ओर ही इशारा कर रहा है। जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी बिहार के NDA सरकार की वो चाभी है, जो जब चाहे तब ताला खोल सकते है। क्योंकि NDA सरकार भले बहुमत में हो, लेकिन संख्या बॉर्डर लाइन पर ही है।

बता दें कि अभी NDA के 128 MLA का समर्थन है जिसमें 4 मांझी के और 4 मुकेश सहनी के हैं। बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 MLA का समर्थन चाहिए। ये राजनीतिक घटनाएं तब हो रही है, जब RJD सुप्रीमो लालू यादव जेल से बाहर है और वो राजनीति में सक्रिय हो गए हैं।

BJP के रामकृपाल भी उठा चुके हैं मुद्दा

यूपी में पंचायत चुनाव में मिली हार और कोरोना की कुव्यवस्था से भाजपा अंदर ही अंदर परेशान हैं। इसलिए वह न खुलकर नीतीश के विरोध में जाना चाहती है और न पंचायत प्रतिनिधियों के। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसलिए भाजपा ने इस मसले पर अब रणनीति बदल ली है। मंत्रियों को चुप रहने का निर्देश दिया गया है। साथ ही धीरे-धीरे सांसदों से बयान दिलवाकर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रामकृपाल यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र में मुखिया महासंघ के कार्यकाल विस्तार की मांग को उचित बताते हुए इस पर सरकार से विचार करने का आग्रह किया था।

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