प्रशासन से आश्वासन के बाद माने NMCH के डॉक्टर:जूनियर डॉक्टरों ने कहा- लोगों के आक्रोश से खतरे में उनकी जान; सुरक्षा की शर्त के साथ वापस काम पर लौटे

पटना7 महीने पहले
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मंगलवार देर रात कोरोना वार्ड में संक्रमितों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर बवाल काटा था। - Dainik Bhaskar
मंगलवार देर रात कोरोना वार्ड में संक्रमितों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर बवाल काटा था।
  • स्वास्थ्य मंत्री और प्रधान सचिव के साथ बैठक की रखी शर्त
  • NMCH में कोरोना के साथ मरीजों के परिजनों से जान का खतरा

नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में डॉक्टरों की मुश्किल बढ़ गई है। जूनियर डॉक्टर यहां हर दिन दो तरह के खतरे से जूझ रहे हैं। एक इलाज के दौरान जानलेवा वायरस का और दूसरा किसी संक्रमित के मौत के बाद परिवार वालाें के हमले का। आए दिन घटनाएं हो रही हैं, 15 दिन में तीन पर जूनियर डॉक्टरों पर हमला और हॉस्पिटल में तोड़फोड़ हो चुकी है। जूनियर डॉक्टर दो-दो बार हड़ताल पर भी जा चुके हैं है। मंगलवार की रात संक्रमित की मौत के बाद हड़ताल पर गए NMCH के जूनियर डॉक्टर बुधवार की देर रात काम पर वापस लौटे हैं। इसके पहले भी DM और SSP को काफी मंथन करना पड़ा था, जिसके बाद जूनियर डॉक्टर माने थे। इस बार भी घंटों मंथन के बाद प्रशासन के आश्वासन मिलने पर जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए हैं लेकिन यह शर्त रखी है कि आज उनकी सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और विभाग के प्रधान सचिव के साथ बैठक होगी। इस बैठक में वह सुरक्षा को लेकर अपनी शर्त रखेंगे जिससे भविष्य में कोई घटना नहीं हो।

JDA ने कहा सुरक्षा का नहीं है ध्यान

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा है कि उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वह हर दिन लोगों आक्रोश का शिकार हो रहे हैं। कैंपस में इतनी सुरक्षा नहीं है जो डॉक्टराें को बचा सके। कोरोना काल में हर तरह से खतरा होता है। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वह अपनी जान पर खेलकर इलाज कर रहे हैं और उनके साथ इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। इस बार जूनियर डॉक्टर सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर हैं और 15 दिन में दो बार हुई बड़ी घटना के बाद वह अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा को लेकर वह हर तरह से लड़ाई लड़ने को तैयार है। JDA डॉ. देवांशु ने बताया कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा पर सवाल हैं।

देर रात माने जूनियर डॉक्टर

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद कोरोना मरीजों के इलाज में समस्या उत्पन्न हो गई थी। नालंदा मेडिकल कॉलेज डेडिकेटेड अस्पताल है और वहां जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से पूरा काम प्रभावित हो जाता है। हड़ताल के बाद प्रशासन डॉक्टरों को मनाने में 12 घंटे देरी कर दिया जिससे मरीजों के इलाज में समस्या हुई। देर रात DM और SSP के साथ अन्य अधिकारियों की बैठक चली जिसमें अस्पताल के अंदर की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से मजबूत करने का आश्वासन दिया गया। जूनियर डॉक्टरों ने DM और SSP के साथ अन्य अधिकारियों को फिर से अस्पताल में विभिन्न कमियों के बारे में बताया गया। ऐसी समस्या को लेकर गुरुवार को प्रमुख स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक का आश्वासन दिया गया है। जूनियर डॉक्टरों ने यही शर्त भी रखी थी, जिसे मानने के बाद वह देर रात सशर्त काम में लौटने का फैसला लिए।

5 दिन में तीसरी बार मरीज के परिजनों ने की तोड़फोड़

यह है पूरा घटनाक्रम

मंगलवार देर रात कोरोना वार्ड में संक्रमितों की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर बवाल किया था। इस दौरान वार्ड में तोड़-फोड़ के साथ डॉक्टरों को मारने के लिए दौड़ाया गया था। जान बचाकर भागे डॉक्टरों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था इसके बाद भी वह कमरे का दरवाजा तोड़ने में लगे थे। इस घटना में संस्थान की संपत्ति को तोड़फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया गया था। घटना के दौरान इतनी व्यवस्था नहीं थी कि जवान डॉक्टरों को बचा सकें। इसके पूर्व भी ऐसी ही घटना दो बार हो चुकी है जिसके बाद सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था लेकिन फोर्स नहीं बढ़ाई गई।