मेडिकल कचरे पर कंट्रोवर्सी:बिहार के अस्पतालों में कागजों में नष्ट हो रहा मेडिकल वेस्ट; IMA ने मांगी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी, कहा- शहर को बीमार बनाने में कचरे में बड़ा खेल

पटना4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बिहार में मेडिकल वेस्ट में भी बड़ा घोटाला चल रहा है। शहर को बीमार बनाने वाला अस्पतालों का कचरा कागजों में नष्ट किया जा रहा है। अस्पतालों में कचरा बेड के हिसाब से वसूला जा रहा है, जबकि किसी भी अस्पताल में बेड फुल नहीं रहता है। अब IMA यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने में चल रही मनमानी पर सवाल खड़ा करके बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी कर दी है। IMA एजेंसी पर शिकंजा कसने के लिए मॉनिटरिंग में खुद की हिस्सेदारी मांगी है। इसके लिए CCTV कैमरा लगाने के साथ बार कोडिंग की व्यवस्था की मांग की है। IMA के डॉ. सुनील सिंह का कहना है कि इस बड़ी समस्या पर अब बड़े निर्णय की आवश्यकता है।

IMA ने ऐसे खड़ी की कचरे पर कंट्रोवर्सी

IMA बिहार का कहना है कि मेडिकल वेस्ट को बिहार में सही ढंग से नष्ट नहीं किया जा रहा है। इसमें एजेंसियां बड़े पैमाने पर घोटाला और मनमानी कर रही है। IMA ने सवाल खड़ा किया कि किसी भी अस्पताल में 100% बेड किसी बड़ी महामारी में ही फुल होते हैं। सामान्य दिनों में 40-50 प्रतिशत मरीज ही भर्ती होते हैं। ऐसे में मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने वाली एजेंसियां हॉस्पिटल से हर दिन 100 बेड के कचरा नष्ट करने का पैसा क्यों लेती हैं?

इतना ही नहीं हर दिन का पैसा लिया जाता है तो अस्पताल से कचरा हर दिन क्यों नहीं उठाया जाता है? अस्पतालों को मेडिकल वेस्ट सड़क पर या नगर निगम की गाड़ियों में क्यों फेंकना पड़ता है? शहर को बीमारी बनाने वाले इस घोटाले पर अंकुश क्यों नहीं लगाया जा रहा है? आखिर इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? IMA के ऐसे कई आरोपों और सवालों ने मेडिकल कचरे को लेकर बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी कर दी है।

IMA ने कहा- बिहार को बीमार बना रही एजेंसी
बिहार प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा गठित सलाहकार समिति की चतुर्थ बैठक में IMA बिहार की तरफ से मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर कई गंभीर मामले सामने आए गए हैं। IMA ने कहा कि मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने में लगी प्राइवेट एजेंसी का उद्देश्य ठीक नहीं है। वह सही ढंग से काम नहीं कर रही है।

Waste and Effluent आदि नियमित तौर से नहीं उठाया जा रहा है। यह भी पाया गया है कि वे खेतों में बहा देते हैं। एजेंसी महीने में जितने दिन वेस्ट का उठान न करें उतने दिनों की पेनाल्टी तय की जानी चाहिए। इतना ही नहीं संस्थानों के बीच द्विपक्षीय एग्रीमेन्ट किया जाए जिससे मनमानी पर अंकुश लगे।

तीसरी आंख से हो निगरानी
IMA ने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल सेंटर में कैमरा लगाया जाए। इससे मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। IMA ने यह भी मांग किया है कि तीसरी आंख से निगरानी की जिम्मेदारी में उसे भी शामिल किया जाए।

IMA ने कैमरा के सिस्टम को IMA से जोड़ने की मांग की है। सेंटर पर कागजों में ही कचरा नष्ट करना दिखाया जा रहा है। कैमरा लगाने से इस पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा। यह पता चल जाएगा कि किस तरह से कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है।

बार कोड की व्यवस्था से कम होगी मनमानी
मांग की गई है कि कचरा प्रबंधन को लेकर बार कोडिंग की व्यवस्था की जाए। बार कोडिंग की व्यवस्था और रंगीन बैग की आपूर्ति एजेंसी के द्वारा किया जाना चाहिए। इनके कार्यों के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण के लिए स्थानीय IMA अथवा सलाहकार समिति को अधिकार दिया जाए। IMA ने वजन के हिसाब से चार्जेज तय करने की मांग की है।

ऐसा नहीं हो कि हॉस्पिटल बेड के अनुपात में कचरा का पैसा लिया जाए। हॉस्पिटल में 100 प्रतिशत बेड की Occupancy नहीं होती है। अल्ट्रासाउंड क्लिनिक कोई वेस्ट जेनरेट नहीं करता है। OPD क्लिनिक में कुछ सिरिंज, कॉटन के सिवा कुछ नहीं होते हैं। पैथ लैब में 10 बेड के बराबर वेस्ट एवं चार्जेज का निर्धारण ठीक नहीं है। इसमें भी मनमानी की जा रही है। छोटे अस्पतालों (10 बेड तक) एवं सिगिंल डॉक्टर क्लीनिक को चार्जेज में छूट की भी मांग की गई है।

छोटे शहरों में भी राजधानी वाला शुल्क

IMA का कहना है कि छोटे शहरों में पटना की तरह शुल्क नहीं हो सकता है । जीव अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली में कोविड काल के वेस्ट एवं Effluent के प्रबंधन का कोई विशेष प्रावधान नहीं है । कोविड के इलाज को सरकार अपने अंदर रखी है, अतः कोविड वेस्ट एवं Effluent का प्रबंधन का खर्च सरकार वहन करें।

शुल्क निर्धारण में IMA की सहमति ली जाए। मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए या तो सरकारी क्षेत्र में अथवा सरकार IMA शाखाओं को ऋण देकर उसकी स्थापना कराए । IMA बिहार के डॉ सुनील सिंह ने कहा कि वह अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पार्षद के साथ इस संबंध में बैठक करना चाहते हैं।

खबरें और भी हैं...