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जगदानंद की वजह से आकाश हुए तेजप्रताप से दूर:लालू के बड़े बेटे ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी से बात करनी बंद की, तब पशुपति पारस और प्रिन्स के संपर्क में आए

पटना9 महीने पहले
आकाश यादव, जगदानंद सिंह और तेजप्रताप यादव।

तेज प्रताप यादव के खास आकाश यादव ने राजद छोड़कर लोजपा का दामन थाम लिया है। इसके बाद से तरह-तरह की चर्चा है। इन कयासों की भास्कर ने तहकीकात की तो सामने आया कि आकाश ने तेज से संपर्क नहीं होने के बाद पार्टी से इस्तीफा देने का मन बनाया। उनका कहना है- 'जब मुझे पद से हटा दिया गया तो तेज प्रताप ने भी अपना दरवाजा बंद कर लिया। सिर्फ एक बार बात हुई, जिसमें हमने अपनी पूरी बात रखी। इस दौरान उन्होंने न कोई ठोस आश्वासन दिया और न साथ रहने की बात कही। इन सबके बाद हमें लोजपा के ऑफर को स्वीकार करना पड़ा।'

बता दें, आकाश को तेज प्रताप का राइट हैंड कहा जाता था। दोनों की पहली बार मुलाकात 2013 के पटना यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव के दौरान हुई थी। छात्र नेता आकाश यादव को राजद के छात्र प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।

मगर, आठ अगस्त को छात्र राजद के कार्यक्रम में हुए पोस्टर विवाद के बाद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और तेज प्रताप यादव के बीच वॉर चलने लगा, जिसके शिकार आकाश हो गए। 18 अगस्त को जगदानंद सिंह ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए उन्हें छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया।

आकाश यादव लोजपा (पारस गुट) के छात्र प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिए गए हैं। शुक्रवार को ही वो केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस और प्रदेश अध्यक्ष प्रिन्स राज की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए थे।

प्री प्लान्ड एजेंडा के तहत मुझे हटाया गया

छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष पद से बेदखल होने के सवाल पर आकाश ने कहा- 'राजद में कोई प्रकरण नहीं चल रहा था। एक प्री प्लान्ड एजेंडा के तहत मुझे हटाया गया।' उनका दावा है- 'छात्रों और युवाओं के बीच हमारी पकड़ है। हमारी पहचान को जगदानंद सिंह और उनके लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। इसलिए, अचानक मुझसे मेरा पद छीन लिया गया। राजद में मेरे मान सम्मान को ठेस पहुंचाई गई।'

युवा हूं, अपने फैसले लेने का अधिकार है

लोक जनशक्ति पार्टी ज्वाइन करने से पहले क्या तेजप्रताप से कोई बात हुई थी? क्या इसकी उन्हें जानकारी दी? इन सवालों के जवाब में उन्होंने कहा- 'मैं एक युवा हूं। अपना फैसले लेने का अधिकार है। इसके लिए हम पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। लोजपा सिद्धांतों की लड़ाई लड़ती आ रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस और प्रदेश अध्यक्ष प्रिन्स राज का हमें आशीर्वाद मिला। यहां हमें मान-सम्मान के साथ-साथ छात्र लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेवारी मिली। जब मन में लोजपा ज्वाइन करने का फैसला आया तो इस बारे में किसी को नहीं बताया। तेज प्रताप से भी कोई बात नहीं हुई। हां, लोजपा ज्वाइन के बाद बहुत सारे फोन कॉल बधाई देने के लिए आए, लेकिन तेजप्रताप का कोई कॉल नहीं आया। अब मेरी प्राथमिकता जालसाजों से युवाओं को बचाना है। छात्रों और युवाओं को किसी के झांसे और झूठे वादों का शिकार नहीं होने देंगे।'

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