बिहार विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ी:भीड़ का रखना होगा हिसाब-किताब, आयोग को देना होगा सभा में आने वालों का डेटा

पटना2 महीने पहले
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खर्च की सीमा तो बढ़ा दी गई लेकिन, जिम्मेदारियाेें का बोझ भी कम नहीं।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
खर्च की सीमा तो बढ़ा दी गई लेकिन, जिम्मेदारियाेें का बोझ भी कम नहीं।- फाइल फोटो

कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा उपचुनाव में आयोग ने प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ा दी है। प्रत्याशियों को भीड़ का पूरा लेखा-जोखा रखना होगा और बैठक के साथ चुनावी सभा में आने वालों का पूरा डेटा चुनाव आयोग को देना होगा। हर सभा और बैठक के लिए रजिस्टर होगा, जिसमें आने वालों का नाम पता दर्ज करना होगा। आयोग के इस आदेश का पालन आसान नहीं होगा। ऐसे ही खर्चों को लेकर आयोग ने इस बार खर्च का बजट भी 28 लाख से बढ़ाकर 30.8 लाख कर दिया है।

दो विधानसभा में उपचुनाव
बिहार के दो विधानसभा में उप चुनाव हो रहा है। इसमें कुशेश्वरस्थान में 257153 मतदाता है। इसमें 135178 पुरुष और 121974 महिला व 1 ट्रांसजेंडर मतदाता है, जबकि तारापुर में कुल 327242 मतदाता हैं, जिसमें 176000 पुरुष और 151234 महिला के साथ 8 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। कुशेश्वरस्थान में 80 से अधिक उम्र और दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 7306 है जबकि तारापुर में 80 से अधिक उम्र और दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 8443 है।मतदान के लिए कुशेश्वरस्थान में कुल 310 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। जबकि तारापुर विधानसभा क्षेत्र में 406 स्थानों पर वोटिंग होगी।

कोरोना काल में प्रत्याशियों पर बड़ा जिम्मा
चुनाव आयोग ने उपचुनाव में प्रत्याशियों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कोई भी सभा होगी उसकी बैरिकेडिंग प्रत्याशियों को करानी होगी। इसमें मास्क और सोशल डिस्टेंस के साथ कोरोना की हर गाइडलाइन को पूरा कराने की जिम्मेदारी भी प्रत्याशियों पर ही होगी। प्रत्याशी बैठकों में 50 से अधिक लोगों को नहीं बुला सकते हैं और चुनावी सभा में भी 500 लोगों की लिमिट फिक्स कर दी गई है।

चुनाव आयोग का कहना है कि कोरोना काल में उपचुनाव को देखते हुए 2020 विधानसभा चुनाव के खर्च की सीमा 28 लाख को बढ़ाकर 30.8 लाख कर दी गई है। यह 2020 विधानसभा सामान्य निर्वाचन के बजट से 10 प्रतिशत अधिक है। लेकिन 2 लाख के बजट में प्रत्याशियों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

तैयार करना होगा डेटा
चुनावी सभा और सामान्य बैठकों में कौन-कौन लोग शामिल हुए, इसका पूरा लेखा जोखा देना होगा। आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिया है कि हर सभा में एक रजिस्टर होगा, जिसमें लोगों का नाम पता दर्ज किया जाएगा। प्रत्याशियों द्वारा इसे आयोग को देना होगा। आयोग का निर्देश है कि ऐसा नहीं करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

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