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ब्रेन से निकाला क्रिकेट बॉल से बड़ा ब्लैक फंगस:पटना के IGIMS में 3 घंटे के ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों को मिली सफलता, आंख को डैमेज किए बिना दिमाग में फैले फंगस को हटाया

पटना6 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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IGIMS में डॉक्टरों की टीम ने 3 घंटे के ऑपरेशन में ब्लैक फंगस को मरीज के ब्रेन से बाहर निकाल दिया। - Dainik Bhaskar
IGIMS में डॉक्टरों की टीम ने 3 घंटे के ऑपरेशन में ब्लैक फंगस को मरीज के ब्रेन से बाहर निकाल दिया।
  • मिर्गी का दौरा आने के बाद मरीज को हो रही थी बेहोशी, डॉक्टरों ने कहा- अब खतरे से बाहर

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के डॉक्टरों ने 3 घंटे के लंबे ऑपरेशन में एक मरीज के ब्रेन से क्रिकेट के बाल से भी बड़े आकार का ब्लैक फंगस निकाला है। आंखों को डैमेज किए बगैर ब्रेन में जाल बनाने वाले फंगस के कारण मरीज को मिर्गी आ रही थी और वह बेहोशी की हालत में था। फंगस और 100 ml से अधिक पस निकालने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को खतरे से बाहर बताया है।

ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम का कहना है कि यह काफी जटिल था, क्योंकि ब्रेन में ब्लैक फंगस ने काफी जाल फैला लिया था।

आसान नहीं था ब्लैक फंगस का ऑपरेशन

IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि जमुई के रहने वाले 60 साल के अनिल कुमार को मिर्गी जैसा दौरा पड़ रहा था। वह बेहोश हुए जा रहे थे, जिसके कारण उनकी स्थिति गंभीर थी। जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि होने के बाद उन्हें भर्ती किया गया था।

न्यूरो सर्जन डॉक्टर डॉ. ब्रजेश कुमार और उनकी टीम ने ऑपरेशन किया है। डॉ. ब्रजेश कुमार का कहना है कि ऑपरेशन काफी जटिल था। ब्लैक फंगस नाक और साइनस के बाद आंखों को थोड़ा टच करते हुए ब्रेन में आगे की तरफ पहुंच गया था और ब्रेन में यह तेजी से फैल गया था। फंगस क्रिकेट के बाल से भी बड़ा था, इस कारण उसका ऑपरेशन जटिल था, लेकिन IGIMS में डॉक्टरों की टीम ने 3 घंटे के ऑपरेशन में इसे निकालकर बाहर कर दिया।

14 दिनों में ब्लैक फंगस ने किया यह हाल

डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि अनिल कुमार के ब्रेन में दो सप्ताह में ही ब्लैक फंगस इतना बड़ा हो गया। दो सप्ताह पूर्व उन्हें परेशानी हुई थी, जिसके बाद घर वाले उनका इलाज करा रहे थे। वह जब IGIMS लेकर आए तो यह पता चला कि ब्लैक फंगस है। डॉक्टरों की टीम ने निर्णय लिया कि जितनी जल्दी सर्जरी हो जाए मरीज के लिए उतनी आसानी होगी। शुक्रवार को पूरी टीम ने मिलकर मरीज के ब्रेन से ब्लैक फंगस को बाहर कर दिया।

आंखों का नहीं करना पड़ा ऑपरेशन

डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि मरीज अनिल कुमार की आंखें बच गई हैं, क्योंकि फंगस आंखों को अधिक डैमेज नहीं किया था। नाक के रास्ते फंगस ब्रेन में पहुंचा है। अमूमन ब्लैक फंगस ब्रेन तक पहुंचने से पहले आंखों को डैमेज कर देता है, लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ है। आंखों के पास थोड़ा सा डिफेक्ट हुआ है जिससे ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ी है। दोनों आंख के ऊपर ब्लैक फंगस ने अपना जाल बनाया था। अब मरीज को काफी हद तक राहत महसूस हो रही है।

IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि संस्थान में ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। 20 दिन के अंदर ब्लैक फंगस के 100 मरीजों का ऑपरेशन किया गया है। 18 मई से संस्थान में ब्लैक फंगस का इलाज शुरू हुआ है। अब तक 174 मरीज भर्ती हुए हैं। 100 में 56 संक्रमित ऐसे रहे जिन्हें इंडोस्कोपी और 44 मरीज ऐसे है जिनकी ओपन सर्जरी की गई है।

इस ऑपरेशन के बाद 21 मरीजों की छुट्‌टी हो गई है। 28 मरीज ऐसे हैं जो ऑपरेशन के बाद वार्ड में हैं। IGIMS में 25 मरीज ऐसे हैं जिनका ऑपरेशन होना है। डॉ. मनीष मंडल ने ब्लैक फंगस में बेहतर ऑर रिकॉर्ड बनाने वाली डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। संस्थान के निदेशक डॉ. NR विश्वास ने भी पूरी टीम को बधाई दी है।