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NMCH के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए:5 दिन में तीसरी बार मरीज के परिजनों ने की तोड़फोड़, जान बचाने के लिए डॉक्टरों को कमरे में बंद होना पड़ा

पटना9 महीने पहले
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मृतक के परिजनों द्वारा की गई तोड़फोड़ के बाद अस्पताल के अंदर इस तरह का नजारा दिखा। - Dainik Bhaskar
मृतक के परिजनों द्वारा की गई तोड़फोड़ के बाद अस्पताल के अंदर इस तरह का नजारा दिखा।

नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) के सर्जरी वार्ड में एक मरीज की मौत के बाद बुधवार की सुबह लगभग 4 बजे जमकर हंगामा किया गया, तोड़फोड़ की गई। इससे आक्रोशित इस अस्पताल के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। मरीज के आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के सर्जरी वार्ड के बाहर कई सामान क्षतिग्रस्त कर दिए। इसके बाद डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज करने लगे। हालात ऐसे हो गए कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया। गुस्साए लोगों ने कमरे दरवाजा खोलने की कोशिश की लेकिन डॉक्टरों ने डर से कमरे का दरवाजा नहीं खोला। जिस समय यह घटना हुई उस समय कोई भी पुलिसकर्मी मौजूद नही था।

इस घटना के बाद डॉक्टरों में आक्रोश है। डॉक्टर का आरोप है कि घटना के समय पुलिस से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस समय पर नहीं आई। काफी देर बाद जब मामला शांत हुआ तो पुलिस पहुंची। बुधवार की दोपहर NMCH के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। उन्होंने जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन को अपनी मांगों से अवगत कराते हुए हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी। उधर, परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान गई।

डॉक्टर के केबिन में भी तोड़फोड़ की गई।
डॉक्टर के केबिन में भी तोड़फोड़ की गई।

हम खुद की मॉब लिंचिंग नहीं चाहते: जूनियर डॉक्टर

NMCH के जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि जब तक स्वास्थ्यकर्मियों की कमी रहेगी, ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। फ्रंट पर काम कर रहे लोगों और टॉप के अधिकारियों के बीच कम्यूनिकेशन गैप है। व्यवस्था में कमियों पर हमसे बात कर उसमें तत्काल सुधार करें न कि हमसे से किसी की मॉब लिंचिंग का इंतजार करें। डॉक्टरों ने अपनी ओर से कई मांगें भी रखी हैं। उन्होंने कहा है कि 150 गैर अकादमिक जूनियर रिसर्चरों की तुरंत बहाली हो या PMCH से स्वास्थ्य कर्मियों, PG स्टूडेंट, सीनियर रेजिडेंट, असिस्टेंट प्रोफेसरों को यहां लाया जाए। इसके अलावा दूसरे मेडिकल कॉलेजों-अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई जाए। वार्ड के अंदर मरीजों के परिजनों की इंट्री बंद हो। मरीजों की देखरेख के लिए वार्ड ब्वॉय की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही नर्सों की संख्या भी बढ़ाइए।

इससे पहले 22 और 23 अप्रैल को भी हुआ था हंगामा

मरीजों को बेड दिलाने में नाकाम प्रशासन डॉक्टरों की सुरक्षा में भी फेल हो गया है। नालंदा मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में इसका खामियाजा डॉक्टरों को भुगतना पड़ रहा है। कोरोना काल में जान पर खेलकर इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ 22 और 23 अप्रैल को मारपीट हुई है, जिसके बाद आक्रोशित जूनियर डॉक्टर 23 अप्रैल को हड़ताल पर चले गए हैं। गुरुवार रात में भी रजिस्ट्रेशन को लेकर लोगों ने हंगामा किया था। इस पर अधीक्षक ने जिला प्रशासन से फोर्स की डिमांड की थी, लेकिन 15 घंटे बाद भी फोर्स नहीं मिली जिस कारण से फिर हाथापाई हो गई। इसके बाद जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।

23 अप्रैल को DM और SSP के आश्वासन पर माने थे डॉक्टर

23 अप्रैल को DM और SSP ने NMCH में लगभग एक घंटे तक जूनियर व सीनियर डॉक्टरों के साथ बैठक की है। काफी मंथन के सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जूनियर डॉक्टर काम पर लौट गए थे। जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि अब दो-दो शिफ्ट में ड्यूटी 20-20 की संख्या में पुलिस के जवानों को लगाया जाएगा। SSP के इस सुझाव पर जूनियर डॉक्टर मान गए। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी की भी संख्या बढ़ाई जाए।

NMCH में पिछले से 4 गुना मरीज अधिक हैं, इसके बाद भी गार्ड की संख्या कम है। सुरक्षा को लेकर गार्डों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। MBBS की फाइनल इयर की परीक्षा नहीं होने के कारण से 150 इंटर्न नहीं आ पाए हैं। केवल PG के छात्रों को 400 कोविड मरीजों को देखना पड़ रहा है। वार्ड परिचारकों की कमी है। नर्सों ने कमी है, संसाधनों की कमी है। अगर इसमें सुधार हो जाए तो हंगामा कम हो जाएगा।