चूड़ा-दही पॉलिटिक्स में जातीय जनगणना मुद्दा:खरमास के बाद सरकार में तो बदलाव नहीं होगा, लेकिन नीतीश कुमार को भरोसा नहीं

पटना11 दिन पहले
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बिहार में हर वर्ष चूड़ा-दही पॉलिटिक्स होता है। दरअसल, अभी खरमास का महीना चल रहा है। इस महीने में शुभ काम नहीं किया जाता है। 14 जनवरी को यह महीना खत्म हो रहा है। इसके बाद शुभ कार्य शुरू होंगे। RJD ने भी इस महीने में बड़ी राजनीति खेली है। RJD ने JDU के सामने ऑफर दिया है कि जातीय जनगणना और विशेष राज्य के दर्जे पर यदि BJP उनकी नहीं सुन रही है तो वो आगे बढ़ें, मिलकर सरकार बनाएंगे।

RJD के नेता दावा कर रहे हैं कि खरमास यानी चूड़ा-दही के बाद राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा। इस पर राजनीति के जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार के लिए ये बहुत मुश्किल नहीं है। कभी भी नीतीश कुमार अपना पाला बदल सकते हैं। वहीं, कई वरिष्ठ पत्रकार इसे बयानबाजियों को राजनीति बता रहे हैं। उनका कहना है कि नीतीश कुमार ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे हैं।

सभी दलों के लिए जातीय जनगणना महत्वपूर्ण

वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडे कहते हैं कि चूड़ा-दही पॉलिटिक्स में क्लियर है कि जातीय जनगणना को मुद्दा बनाया जा रहा है। JDU जातीय जनगणना कराना चाहती है, लेकिन BJP जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है। यह काम केंद्र सरकार को कराना है। जातीय जनगणना वैसा ही मुद्दा है जैसे मंडल कमीशन के समय पिछड़ों को लेकर राजनीति शुरू हुई थी। हर राजनीतिक दल को जातीय जनगणना एक ऐसा मुद्दा लगता है, जिससे उनकी पिछड़ी जातियों में पैठ बढ़ जाएगी और हर राजनीतिक दल इसे अपनी तरफ से कैश करना चाहता है।

JDU को RJD का ऑफर

RJD ने भी एक बड़ी राजनीति खेली है। RJD ने इस बात को उछाल कर JDU पर दबाव बनाया है। RJD साफ कह रही है कि यदि BJP आपका साथ नहीं दे रही है तो आप आगे बढ़िए। वह JDU के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं। कहीं ना कहीं यह ऑफर JDU को भी सूट करता है। नीतीश कुमार अक्सर अपना गठबंधन बदलते रहे हैं। कभी कांग्रेस के साथ, कभी RJD के साथ, कभी BJP को छोड़ा, नीतीश कुमार पाला बदलने में माहिर रहे हैं। अब इस मुद्दे को लेकर BJP दबाव में रहेगी। मकर संक्रांति के बाद सरकार में कोई बदलाव तो नहीं होगा। BJP भी जातीय जनगणना को लेकर विरोध नहीं करेगी। इनकी भी अपनी राजनीति है।

नीतीश के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं कि कई नेताओं का चूड़ा-दही पॉलिटिक्स कैंसिल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार BJP को छोड़ने के मूड में नहीं है। BJP का कोई भी बड़ा लीडर उनके खिलाफ या उनका दिल दुखाने वाली बात नहीं कह रहे हैं। BJP की तरफ से कोई भी ऐसा बयान नहीं आ रहा है, जिसे नीतीश कुमार आहत हों। छूटभैये नेता अगर कुछ बोलते हैं तो उसका कोई वैल्यू नहीं है।

RJD के साथ में नीतीश कुमार रह कर देख चुके हैं। उसमें नीतीश कुमार की लगातार फजीहत होती रही है। पार्टी का नेतृत्व कुछ बोलता था और मंत्री कुछ और बोलते थे। इसलिए नीतीश कुमार कहीं जाने वाले नहीं हैं। चूड़ा दही या मकर संक्रांति के बाद ऐसा कुछ बदलाव होने नहीं किया जा रहा है। यह सिर्फ बयानबाजियों के लिए पॉलिटिक्स किया जा रहा है।