संडे बिग स्टोरीविश्व का सबसे छोटा साइको किलर बेगूसराय से ही था:पटना के अविनाश ने 20 मर्डर किए, मधेपुरा के चंद्रकांत झा से दिल्ली पुलिस हिल गई

अभिनव कुमार। पटना19 दिन पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

बेगूसराय में हाईवे पर 40 मिनट में 11 लोगों को गोली मार दी गई। एक की मौत हो गई। इसमें सीरियल किलर के शामिल होने की बात कही गई, लोग डर गए। हालांकि बाद में मामला दहशत फैलाने और वर्चस्व की लड़ाई का निकला, लेकिन बिहार में सीरियल किलर की पहले भी दहशत रही है। बिहार के 2 सीरियल किलर पर वेब सीरीज आ चुकी है।

हाल ही में ओटीटी फ्लेटफॉर्म नेटफिलिक्स पर वेब सीरिज आई है, जिसका नाम है इंडियन प्रीडेटर: द बुचर ऑफ दिल्ली। इसमें तीन ऐपिसोड मधेपुरा के सीरियल किलर चंद्रकांत झा पर थे, जिसने दिल्ली पुलिस को चैलेंज किया था।

विश्व का सबसे छोटा साइको किलर बेगूसराय से था। जिसने पहली हत्या 7 साल की उम्र में की थी। उसने अपनी बहन समेत 3 बच्चियों का मर्डर खपरैल से कुचल कर किया था। वह तीसरे मर्डर के बाद पकड़ा गया। जब उसने हत्या की कहानी सुनाई तो पुलिस के रोंगटे खड़े हो गए। दूसरा सीरियल किलर- पटना के कंकडबाग में रहने वाले आईटी प्रोफेशनल अविनाश था। उसके नाम 20 हत्या के मामले दर्ज हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए इन कुख्यात तीनों साइको किलर की कहानी…

सबसे पहले पढ़िए सबसे छोटे सीरियल किलर के बारे में

बेगूसराय से 19 किलोमीटर दूर एक गांव है मुसहरी। यहां 2006 में एक घर से 6 साल की बच्ची लापता हो जाती है। बच्ची के पिता ईंट-भट्ठे पर दिहाड़ी मजूदरी करते हैं। परिवार रोता-बिलखता है और बेटी को पूरे गांव में तलाशता है, लेकिन वह नहीं मिलती है। पुलिस में कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं होती है। परिवार इस गम से उबर रहा होता है तभी एक और घटना होती है।

बच्ची के ताऊ की 8 साल की बेटी भी अचानक गायब हो जाती है। ताऊ का परिवार पास में ही रहता है। यह घटना पहली घटना से 6 महीने बाद होती है। इसकी तलाश भी की जाती है, लेकिन पहली बच्ची की तरह इसका भी पता नहीं चलता। पुलिस को भी सूचना नहीं दी जाती है। गांव वाले दहशत में हैं।

तीसरी घटना के 3 महीने बाद फिर ऐसा ही कुछ होता है। गांव की चुनचुन देवी की 6 महीने की बेटी लापता हो जाती है। अब गांव वालों को क्लियर हो गया कि कुछ तो गड़बड़ है। चुनचुन देवी भगवानपुर पुलिस के पास पहुंच गईं। पुलिस मामले की जांच करने गांव पहुंची। उस समय दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक– वह अपनी 6 महीने की बेटी के साथ स्कूल में खिलाने ले गईं। वह कुछ देर के लिए गईं तभी वह लापता हो गई।

गांव में पुलिस को पता चला कि दो बच्चियां पहले भी लापता हो चुकी हैं। पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो चुनचुन देवी के परिवार ने अमरजीत सदा का नाम लिया। कहा कि वह ही कुछ बता सकता है। पहली बार अमरजीत का नाम सामने आया है। पुलिस ने उससे बच्ची के बारे में सवाल किया तो वह हंसने लगा।

पुलिस ने जब सवाल दोहराया तो वह फिर हंसा और कहा- वो जानता है कि बच्ची कहां है। वह लगातार हंसता रहा। इस पर पुलिस को लगा कि वह ऐसे ही कह रहा है। लड़की की गांव में तलाश शुरू की।

इसी दौरान एक पुलिस वाला अमरजीत के पास पहुंचा। इस बार सवाल पर अमरजीत ने हसंकर कहा- बिस्किट दोगे तो बताऊंगा। फिर क्या था पुलिस ने बिस्किट का पूरा पैकेट ही उसे मंगाकर दिया। इसके बाद अमरजीत ने जो कहानी बताई, उसे सुनकर सब सन्न रहे गए।

अमरजीत ने बताया कि बच्ची को उसने खपरैल से मारकर सुला दिया है। पुलिस वालों ने उसे जगह दिखाने के लिए कहा। वह पुलिस को लेकर उस जगह पर गया, जहां बच्ची का शव पड़ा था। स्कूल के पीछे ही झाड़ी में शव था। फिर अमरजीत को थाने ले आ गया। वहां भी उसने बिस्किट मांगा और मिलने के बाद उसने अपने परिवार की दो बच्चियों की हत्या का खुलासा किया। उसने बताया कि दोनों को खपरैल से मारकर हत्या की है। तब क्लियर हुआ कि वह सीरियल किलर है।

अमरजीत से तीन बच्चियों की हत्या की कहानी सुनकर पुलिसवालों ने उसके परिवारवालों को थाने बुलाया। परिवार की भूमिका भी संदिग्ध लगी। कड़ाई से पूछताछ में परिवार ने बताया कि उन्हें पता था कि दोनों बच्चियों की हत्या उसने ही की है। परिवार के मुताबिक- जब बच्चियां गायब हुई थी, तो उन्होंने अमरजीत से उनके बारे में पूछा था। अमरजीत ने उन्हें सारी बातें सच बता दी थीं। घरवालों ने कहा कि उन्होंने अमरजीत की खूब पिटाई की थी। अमरजीत ने कहा था कि दोबारा ऐसा कभी नहीं करेगा।

वजह बताई- ऐसा करने में मजा आता है

पुलिस ने उसे और बिस्किट दिए और सवाल किया कि उसने तीनों को क्यों मारा। इस पर अमरजीत ने बताया कि ऐसा करने में उसे मजा आता है। जब वो उन्हें मारता है और वो दर्द से चिल्लाती हैं, तो उसे वो देखने में काफी मजा आता था।

जांच में निकला- कंडक्ट डिसऑर्डर

खूनी कहानी सुनने के बाद पुलिसवालों ने उसे भागलपुर मानसिक अस्पताल में इलाज के लिए भेजा। यहां मनो-चिकित्सकों की जांच में पता चला कि अमरजीत एक दिमागी बीमारी 'कंडक्ट डिसऑर्डर' से पीड़ित है, जिसकी वजह से वो दूसरों को दर्द में देखकर खुश हो जाता था। और वो किसी का कत्ल कर रहा था, उसे इसका अंदाजा नहीं हो पाता था और इसीलिए वो बिना डर हंसकर सारी बातें बता देता था।

सेकेंड सीरियल किलर अविनाश श्रीवास्तव उर्फ अमित

आज से 8 साल पहले की बात है। साल 2016 में हाजीपुर के महुआ थाना क्षेत्र के हरपुर बेलवा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में चोरी करते एक चोर पकड़ा गया। पुलिस ने उसके बारे में पूछा तो बोला-गूगल में साइको किलर अमित सर्च कीजिए।

पुलिस ने जैसे ही यह सर्च किया, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह साइको किलर अविनाश श्रीवास्तव उर्फ अमित था। अविनाश खुशी से नाचने लगा था।

अविनाश के सीरियल किलर बनने की कहानी 2003 में शुरू होती है। उसने मर्डर की शुरुआत अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए किया था। अविनाश के पिता ललन श्रीवास्तव RJD से MLC थे। उनकी 2002 में हाजीपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इसका बदला लेने के लिए उसने पहला मर्डर हाजीपुर में मोइन खां उर्फ पप्पू खां का किया था। अविनाश ने 32 गोलियां मारीं और उसके शव के पास 3 घंटे तक बैठा रहा। इसके बाद अविनाश पर हत्या के करीब 20 मामले दर्ज हुए। अविनाश ने दावा किया था कि फिल्म 'गैंग ऑफ वासेपुर' में उसके ब्रस्ट फायर (दनादन गोली दागना) वाले क्लाइमेक्स को चोरी किया गया था।

पटना के डिप्टी मेयर के पति की हत्या में भी शामिल रहा

अविनाश पर आरोप है कि पटना के डिप्टी मेयर अमरावती देवी के पति दीना गोप को उसने एके-47 से भून दिया था। उसने पिता के मर्डर केस के आरोपियों की तरफ से केस लड़ने वाले वकील को भी मार डाला था। उस पर कैप्टन सुनील के भाई, विजय गोप, अजय गोप, लालू गोप, अजीत गोप, अधिवक्ता सरदार जी, इम्तियाज, चनारिक गोप, स्वर्ण व्यवसायी मनोज सोनार, राहुल यादव समेत 20 लोगों की हत्या का आरोप है।

कहानी अब तीसरे सीरियल किलर चंद्रकांत झा की

बिहार के मधेपुरा के गोसाई का रहने वाला चंद्रकांत झा दिल्ली गया तो कमाने, लेकिन उसके गुस्से ने उसे सीरियल किलर बना दिया। उसने अपने दोस्तों और जानने वालों को ही मौत के घाट उतार दिया। चंद्रकांत झा को लेकर ओटीटी फ्लेटफार्म नेटफिलिक्स पर वेब सीरिज आई है, जिसका नाम है इंडियन प्रीडेटर: द बुचर ऑफ दिल्ली। इसमें 40 से ज्यादा हत्याएं दिखाई गई हैं।

चंद्रकांत के खूनी खेल की कहानी की शुरुआत 1998 से होती है। दिल्ली के आदर्श नगर में एक सिरकटी लाश मिली। पुलिस ने पड़ताल की और चंद्रकांत झा को गिरफ्तार किया, लेकिन सबूतों के अभाव में वो बरी हो गया। जेल से चंद्रकांत की रिहाई के बाद तिहाड़ जेल के सामने सिरकटी लाशों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया।

उसने 4 लाशें तिहाड़ जेल के सामने फेंकी

चंद्रकांत ने तिहाड़ जेल के सामने 4 लाशें फेंकी थीं। सभी लाशों में सिर्फ धड़ होता था, सिर गायब। 20 अक्टूबर 2006 को तिहाड़ जेल के सामने जो लाश मिली थी, उसके साथ एक चिट्ठी भी थी। यह चुनौती थी दिल्ली पुलिस को..। लिखा था- पकड़ सकते हो तो पकड़ लो। फिर क्या था पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। शव रखने की सूचना उसने थाने में फोन करके खुद दी थी।

चंद्रकांत के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत वो खत ही बना जो उसने पांचवीं लाश के साथ छोड़ा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में ये बात साबित हो गई कि कातिल और चंद्रकांत की लिखावट एक है। खत में कातिल ने लिखा था वो साल 2003 में जेल से निकल चुका है। चंद्रकांत भी इसी साल जेल से रिहा हुआ था। इसके अलावा अमित नाम के शख्स की हत्या के बाद उसने एक पीसीओ से थाने में फोन किया था। पड़ताल के बाद पीसीओ के मालिक ने भी चंद्रकांत को पहचान लिया। पुलिस को वो चाकू भी मिला जिससे उसने दिलीप नाम के शख्स की हत्या की थी।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कातिल से पूछताछ की। जिसमें पता चला कि वो एक सनकी किस्म का शख्स है। गुस्सा हमेशा उसकी नाक पर रहता था। किसी अनजान या फिर दोस्तों से जरा सी नोंकझोंक होने पर वो उनकी हत्या कर देता था। हत्या के बाद लाश की पहचान न हो सके इसलिए उसका सिर धड़ से अलग कर देता था। चंद्रकांत ने बताया कि उसने एक दोस्त की तो इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने खाना खाकर बर्तन बाहर नहीं रखा।

कानून तोड़ने में आता है मजा

क्लिनिकल साइकोलाजिस्ट प्रतिभा सिंह ने बताया कि एंटी सोशल लोग समाज से अलग होते हैं। कानून तोड़ने में उन्हें मजा आता है। ऐसा करके उन्हें लगता है कि लोग डर रहे हैं। भय के कारण लोग उन्हें जानते हैं। ऐसे लोगों में इमोशन नहीं होता है। यह लोगों को तकलीफ में देखकर काफी खुश होते हैं। ऐसे लोगों को किसी से कोई संवेदना नहीं होती है, अपने खून के रिश्तों को भी वह तार तार कर सकते हैं। खुद के प्लेजर लेने का तरीका ही सीरियल किलर का साइन है। ऐसे लोगों की लंबे समय तक दवा और काउंसिलिंग कराई जाती है। इमोशन लाने में काफी समय लग जाता है। ऐसे बच्चे जब खिलौनों से खेलते हैं तो उसके प्रति भी सिमपैथी नहीं होती है। अगर बच्चा ऐसे खिलौनों को लेकर तोड़ देता है तो यह साइन गलत है, इस पर गार्जियंस को गंभीर होना होगा।

सीरियल किलर को घटना के बाद आता है मजा

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद बताते हैं कि सीरियल किलिंग की जांच में घटना करने वालों के अंदर अक्सर किसी परिवार या किसी कारण से किसी खास समूह के व्यक्तियों के प्रति द्वेष की भावना पाई जाती है। कुछ ऐसी मनोभावना होती है जिससे वह एक के बाद एक व्यक्ति को मरते हैं। ऐसा करके उन्हें काफी सुकून मिलता है। ऐसे मामले बिहार में आए भी हैं, जिसमें आरोपित की मनोवृत्ति सामने आई है।

पुलिस अधिकारी बताते हैं कि सीरियल किलिंग में पहला मर्डर तो पुलिस भी नहीं पकड़ पाती है। इसमें घटना का प्रकार एक तरह का ही होता है। एक तरह के कई मर्डर होते हैं और विक्टिम भी मिलता-जुलता है, तो सीरियल किलिंग का संदेह होता है। इसके बाद पुलिस इस एंगल से जांच करती है। विक्टिम और घटना के प्रकार जब मिलते हैं तो पुलिस की जांच में सीरियल किलिंग की तफ्तीश जुड़ती है।

मौजूदा समय में जांच के लिए कई आधुनिक तकनीक हैं, लेकिन जब वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं था तो सीरियल मर्डर की तफ्तीश काफी चुनौती भरी होती थी। तकनीक के कारण अब सीरियल मर्डर से लेकर ब्लाइंड मर्डर का भी खुलासा आसानी से हो जाता है। पुलिस को हर फैक्ट को बैठाकर देखना पड़ता था। अनुसंधान में घटना का समय और घटना का स्थान सही से मिल गया है तो पुलिस का काम थोड़ा आसान हो जाता है। हमेशा से ही अपराध का अनुसंधान घटना का स्थल और समय पर निर्भर करता है। इसके बाद अपराधी की कड़ी इससे जोड़ी जाती है।

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि आईपीसी में सीरियल किलिंग का कोई अलग से प्रावधान नहीं है। किलिंग तो किलिंग है, अगर कोई किलर पकड़ा गया है मजबूत साक्ष्य के साथ और इसका पूरा आधार है तो कम से कम आजीवन कारावास तो होता ही है।

न्यूरो केमिकल इनबैलेंस से बनते हैं साइकोपैथ

मनोचिकित्सक डॉ विवेक विशाल का कहना है कि साइको किलर को ऐसी घटना करने में मजा आता है। सीरियल किलर के पीछे दो कारण होते हैं, इसमें अनुवांशिक और इनवायरमेंटल है। देखा गया है कि ऐसे लोगों का अचानक विहेवियर चेंज हो जाता है। ऐसे लोगों की काउंसिलिंग कराई जाती है, दवाएं दी जाती है और कभी कभी तो इलेक्ट्रिक से झटके भी देने पड़ते हैं। कभी कभी ऐसा भी होता है कि ऐसे लोगों से समाज को खतरा हो जाता है तो उन्हें न्यायालय की तरफ से सजा भी दी जाती है।

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