जानिए कैसी पड़ेगी बिहार में ठंड:1 जून से 30 सितंबर तक हुई 3% अधिक बारिश, अभी से ही देर रात के तापमान में होने लगी गिरावट

पटना20 दिन पहले
ठंड के पहले आने के साथ अधिक प्रभावी होने का पूर्वानुमान है।- प्रतीकात्मक इमेज

बुधवार 6 अक्टूबर से मानसून की विदाई शुरू हो गई है। आने वाले वाले 10 दिनों में मानसून पूरी तरह से भारत से वापस हो जाएगा। फिर पश्चिमी हवाएं ठंड लेकर आएंगी। वैसे तो 30 सितंबर से मानसून की विदाई होती है, लेकिन इस बार पोस्ट मानसून में जमकर बारिश हुई है। इस बारिश का असर ठंड पर होगा। ठंड के पहले आने के साथ अधिक प्रभावी होने का पूर्वानुमान है। आइए जानते हैं मानसून के नफा-नुकसान के साथ ठंड का प्रभाव।

फैक्ट

  • 1 जून से 30 सितंबर तक- 1044.5 MM बारिश
  • जून - 354.3MM बारिश
  • जुलाई - 258.3 MM बारिश
  • अगस्त - 328.7 MM बारिश
  • सितंबर - 84.1 MM बारिश
  • 1 से 6 अक्टूबर तक- 103 MM बारिश

ऐसे आएगी बिहार में ठंड
मौसम विभाग के मुताबिक, देश में मानसून के वापसी के साथ ही नमी में कमी आएगी और दक्षिण-पूर्व हवाएं की तीव्रता कमजोर होगी। इससे मानसून शुष्क हो जाएगा। इस दौरान समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित पश्चिम हवाएं धीरे-धीरे जमीन की तरफ आने लगेगी, जिससे तापमान में तेजी से गिरावट होगी और ठंड की शुरुआत होगी। हालांकि, अभी से ही देर रात के तापमान में तेजी से गिरावट हो रही है। जिसके प्रभाव से देर रात से अलसुबह तक मौसम सर्द हो रहा है।

मौसम विभाग की माने तो आने वाले 10 दिनों में पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ेगा जो मौसम को ठंडा करने में काफी सहायक हाेंगी। पूर्वानुमान है कि इस बार मानसून की तरह ठंड पहले आ सकती है और इस बार की ठंड का प्रभाव भी पहले की अपेक्षा अधिक होगा। हालांकि मौसम विभाग के निदेशक विवेक सिन्हा का कहना है कि आने वाले 10 दिनों में जब पश्चिमी हवाओं का प्रवाह बढ़ेगा तो ठंड को लेकर स्थितियां और साफ हो जाएंगी।

सामान्य से 3 प्रतिशत अधिक हुई बारिश
इस बार मानसून सीजन में 3 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। 1 जून से 30 सितंबर तक के मानसून सीजन में 1017.2 एमएम औसत बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान 1044.5 एमएम बारिश हुई है। 2020 से लगभग 45 एमएम कम बारिश 2021 में हुई है। 2021 में 1 जून से 30 सितंबर तक 1090.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी और इस बार 1044.5 एमएम वर्षा हुई है। 2020 में पोस्ट मानसून में बरसात का असर कम देखने को मिला था लेकिन इस बार 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक लगातार बारिश हुई है।

जून में बारिश ने तोड़ा था रिकॉर्ड
बिहार में मानसून समय से पहले आ गया और जून में पानी का रिकॉर्ड तोड़ दिया। जून माह में 354.3 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है जो औसत बारिश से 111 प्रतिशत अधिक है। जून की बारिश ने पटना में जल जमाव कर दिया और ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी। एक माह की बरसात ने 2020 का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। 2020 में जून माह में 305.9 एमएम बारिश हुई थी जो सामान्य से 82 एमएम अधिक रही, जबकि 2021 में 354.3 एमएम बारिश ने आफत मचा दी थी। जून माह में तेज हवा के साथ आकाशीय बिजली की घटनाएं भी अधिक हुई हैं। इस माह 16 से अधिक स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरी लेकिन कोई बड़ी हानि नहीं रिकॉर्ड में आई है।

जुलाई में रुठ गया मानसून
बिहार में जुलाई माह में मानसून कमजोर पड़ गया था। एक माह में कुल 258 एमएम बारिश हुई है जो औसत से 26 एमएम कम है। एक माह में 284 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। इस माह बारिश कम होने से खेती के काम में थोड़ी तेजी आई। मानसून के सीजन में लोग बारिश के लिए तरसते रहे। गर्मी के कारण लोगों की हालत खराब हो गई। 2020 में जुलाई में औसत बारिश से 27 एमएम अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई थी। 30 दिन में कुल 443.5 एमएम बारिश हुई थी। जुलाई में ऐसा समय नहीं बना जब लगातार मानसून एक्टिव रहा हो, बारिश का दायरा भी बिखराव वाला रहा, जिससे बरसात के मौसम का एहसास नहीं हुआ।

अगस्त में सामान्य रही बरसात, बाढ़ से तबाही
अगस्त में बरसात सामान्य रही, इसमें 2020 कर रिकॉर्ड टूटा है। अगस्त में कुल 328.7 एमएम बारिश हुई है, जो औसत बारिश से 15 एमएम अधिक है जबकि 2020 में 202.6 एमएम बारिश हुई थी जो औसत से 29 प्रतिशत कम रही है। अगस्त की बारिश थोड़ी राहत देने वाली रही है। हालांकि इस बाह नेपाल में अधिक बारिश हुई है जिससे पहाड़ी नदियों के उफान से बिहार में बाढ़ की बड़ी त्रसदी रही।

16 से अधिक जिले पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में रहे। 100 प्रखंडों के साथ 3 हजार गांव बाढ़ की चपेट में आए। इससे लगभग 38 लाख लोग प्रभावित हुए और डेढ़ लाख से अधिक लोगों को विस्थापित भी करना पड़ा। अगस्त तक 25 से अधिक लोगों की मौत बाढ़ से हुई। 865 सामुदायिक रसोई से 12 लाख से अधिक लोगों को बाढ़ में भोजन दिया गया है। बाढ़ के कारण प्रभावित 16 से अधिक जिलों में खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई।

सितंबर ने बारिश को तरसाया
मानसून सितबंर माह में पूरी तरह से कमजोर पड़ गया। मानसून के सीजन में भी लोगों को बारिश के लिए तरसना पड़ा। मात्र 84.1 एमएम ही बारिश हुई जो औसत बारिश से 60.1 प्रतिशत कम रही है। 2020 में भी सितंबर माह में मानसून कमजोर रहा लेकिन इसके बाद भी 138.4 एमएम बारिश हुई थी जो औसत से 12 एमएम कम रही। सितंबर में मानसून के कमजोर पड़ जाने से प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ा। बारिश हुई भी तो लोकल कारण सामने आया, इस पर मानसून का प्रभाव कम देखा गया।

पोस्ट मानसून का दिखेगा का असर
30 सितंबर को मानसून की समाप्ति के बाद अचानक से पोस्ट मानसून सक्रिय हो गया और 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक बिहार में आफत की बारिश होने लगी। 6 अक्टूबर तक 103 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई जो सामान्य बारिश से 241 प्रतिशत अधिक है। मौसम विभाग के निदेशक विवेक सिन्हा का कहना है कि देश के पश्चिमी हिस्से से राजस्थान, गुजरात से बुधवार को मानसून की वापसी शुरु हो गई है। पंजाब, दिल्ली होते हुए देश के अन्य हिस्से में अपना प्रभाव दिखाएगा।

बिहार में 10 अक्टूबर तक मानसून की पूरी तरह से वापसी का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक पोस्ट मानसून के दौरान भी राज्य के पूर्वी हिस्से में स्थित सुपौल, अररिया, भागलपुर, बांका, मुंगेर में हल्की बारिश होने के आसार हैं, जबकि, राज्य के 28 जिलों में मौसम शुष्क बना हुआ है।

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