कब तक ऐसे ही रखी जाएंगी ‘जिंदा’:बिहार की 24 नई रेल परियोजनाओं को पिछले बजट में मिली थी महज 1-1 हजार की राशि

पटना4 महीने पहलेलेखक: आलोक कुमार
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पूर्व मध्य रेलवे की 24 नई रेल परियोजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। - Dainik Bhaskar
पूर्व मध्य रेलवे की 24 नई रेल परियोजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।

पूर्व मध्य रेलवे की 24 नई रेल परियोजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हैं, क्योंकि इन्हें सिर्फ जिंदा रखने के लिए पिछले साल बजट में महज एक-एक हजार की राशि का प्रावधान किया गया था। अब बजट फिर आने वाला है, ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इसबार इन परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी? हालांकि अलग-अलग योजनाओं से जुड़े संबंधित क्षेत्र के लोग इसबार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि ये योजनाएं धरातल पर उतरेंगी।

पटना जिले में बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन परियोजना के लिए पिछले दिनों आंदोलन हुए। अभी हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा जाने लगा है। पिछली बार कई नई रेल परियोजनाओं में कोई प्रावधान नहीं किया गया था। सिर्फ प्रोजेक्ट का अस्तित्व बचा रहे, इसके लिए बजट में 1-1 हजार रुपए का प्रावधान किया गया था।

इन परियोजनाओं के लिए मिली थी एक-एक हजार की राशि

बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन, हाजीपुर-वैशाली-सुगौली, छपरा-मुजफ्फरपुर, मुजफ्फरपुर-दरभंगा, मोतिहारी-सीतामढ़ी, सीतामढ़ी-जयनगर-निर्मली, मुजफ्फरपुर-कटरा-औराई-जनकपुर रोड, आरा-सासाराम, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, खगड़िया-कुशेश्वरस्थान, राजगीर-हिसुआ-तिलैया, दरभंगा-कुशेश्वरस्थान, अररिया-सुपौल, डेहरी ऑन सोन-बंजारी, गया-डाल्टेनगंज, गया-बोधगया-चतरा, नवादा-लक्ष्मीपुर, कुरसेला-बिहारीगंज, मुजफ्फरपुर-दरभंगा, बिक्रमशिला-कटरेछ, वजीरगंज-नटेसर, पारसनाथ-मधुबन-गिरिडीह, धनबाद-चंद्रपुरा और झाझा-बटिया नई रेललाइन के लिए बजट में महज 1-1 हजार रुपए का प्रावधान किया गया था। अभी ये सभी रेल परियोजनाएं यथावत हैं। यानी कोई काम धरातल पर शुरू नहीं हुआ।

बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन के शिलान्यास 14 साल हाे गए

बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन का वर्ष 2007 में पटना जिले के पालीगंज में शिलान्यास हुआ था। तब से 14 साल बीत गए, लेकिन लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। पूर्व मध्य रेल के एक अधिकारी के अनुसार बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन प्रोजेक्ट अभी चालू है, पर यह फिलहाल रेलवे की प्रायरिटी लिस्ट में नहीं है।

जबकि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से पटना जिले के बड़े हिस्से के साथ अरवल और औरंगाबाद जिले की बड़ी आबादी और जिला मुख्यालय भी रेलसेवा से जुड़ जाएगा। पिछले दिनों सांसद रामकृपाल यादव ने इस लाइन की अहमियत इस मायने में बताई कि इसके जरिए पटना सीधा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ जाएगा।

इधर इस रेललाइन के लिए वर्षों से लगे पालीगंज के समाजसेवी जवाहर प्रसाद गुप्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर इसबार के बजट में पर्याप्त राशि जारी करवाने की मांग की है ताकि यह बहुप्रतिक्षित परियोजना धरातल पर उतर सके।