NDA में सम्राट अशोक VS औरंगजेब:सिन्हा ने की अशोक की औरंगजेब से तुलना, भड़की JDU तो BJP बोली- इनका पार्टी से कोई संबंध नहीं

पटना4 महीने पहले
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बिहार में बिहारियत और बिहार के इतिहास को लेकर बहस छिड़ गई है। वजह यह है कि प्रसिद्ध लेखक दया प्रकाश सिन्हा ने सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से कर दी है। ऐसे में सत्तारुढ़ दल की दो पार्टी आपस में भीड़ गए हैं। दरअसल, JDU ने सिन्हा की इस टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया है। यहां तक कि उनको मिले पद्मश्री पुरस्कार को वापस करने की मांग की है।

बताया जाता है कि सिन्हा भाजपा कल्चरल सेल के नेशनल कन्वेनर हैं, लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता सुशील मोदी ने इस बात से इनकार किया है। वहीं, JDU के इस आरोप पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने उन नेताओं को ‘राजनीतिक भस्मासुर’ तक कह डाला।

BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार, कहा- भाजपा को जबरन घसीटा गया

जायसवाल ने कहा कि कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए नकारात्मक प्रचार भी मेवा देने वाला पेड़ है, लेकिन मुझे आश्चर्य तब होता है, जब कुछ समझदार राजनैतिक कार्यकर्ता भी इनके जाल में फंस कर अपना प्रचार में लग जाते हैं। वह यह भी नहीं सोचते कि इससे समाज को कितना नुकसान हो रहा है, अगर इन्हें भरपेट मेवा न दिया जाए तो इन्हें उस पेड़ की जड़ में मट्ठा डालने से भी परहेज नहीं होता। यही वजह है कि बुद्धिजीवियों द्वारा इन्हें ‘राजनीतिक भस्मासुर’ की संज्ञा दी जाती है।

उन्होंने कहा कि बिहार में भी NDA सरकार की मजबूती और अनुशासन के कारण कुछ ‘ख़ास नेताओं’ को मन मुताबिक मेवा नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि यह लोग किसी न किसी मुद्दे पर लगभग रोजाना ही अलग-अलग विषयों पर NDA को बदनाम करने के अपने एकसूत्री एजेंडे पर कार्यरत रहते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक और औरंगजेब की तुलना के मुद्दे को ही ले लें तो कुछ ‘ख़ास नेताओं’ की ओर से जबरन इस प्रकरण में भाजपा को घसीटा जा रहा है।

यह सर्वविदित है कि सम्राट अशोक और औरंगजेब दो विपरीत ध्रुव हैं, जिनकी आपस में तुलना की ही नहीं जा सकती। सम्राट अशोक का जीवन हमें जहां मानवीय भावनाओं पर सत्य और शांति की जीत की शिक्षा देता है। वहीं, औरंगजेब का पूरा इतिहास ही लूट, हत्या और मंदिरों को तोड़ने जैसे कुकृत्यों से भरा हुआ है। सही मानसिकता वाला कोई भी शख्स न तो इन दोनों में तुलना कर सकता है और न ही इनकी तुलना करने वालों को तवज्जो दे सकता है।

JDU ने उठाए पुरस्कार पर सवाल

जायसवाल के इस बयान पर JDU भड़क गई। पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, 'अच्छा लगा, संजय जायसवाल ने सम्राट अशोक की औरंगजेब से की गई तुलना को नकारात्मक प्रचार से मेवा प्राप्त करने वाला पेड़ बताया। मगर ऐसे कुकर्म के बदले पुरस्कार से नवाजा जाना आखिर क्या साबित करता है? देर से ही सही, भूल-सुधार के लिए पुरस्कार वापसी की मांग पर आपका समर्थन है?'

राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि ‘सम्राट अशोक जैसे महानतम राष्ट्रीय व्यक्तित्व व धरोहर के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने वाला विकृत विचारधारा का व्यक्ति है।' कई सवाल पूछे।कहा, 'अरे, जब बात खुली, हमने इसे सामने लाया, तब न भाजपाई बहुत आहत हैं, सम्राट अशोक की खासी तरफदारी में हैं। पहले कहां थे? ... और यह सब करने वाले दया प्रकाश सिन्हा को पुरस्कार मिला कैसे? वाकई, भाजपाई आहत हैं, तो सिन्हा से पुरस्कार वापस कराएं, उनकी किताब पर पाबंदी लगवाएं।'

सम्राट अशोक का सम्मान करती है BJP: सुशील मोदी

इधर, मामले को बढ़ता हुआ देख सुशील मोदी ने कहा, 'प्राचीन भारत के यशस्वी सम्राट अशोक का भाजपा सम्मान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया था। 2015 में पहली बार सम्राट अशोक की 2320 वीं जयंती बड़े स्तर पर मनाई और फिर बिहार सरकार ने अप्रैल में उनकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की। इस साल 9 अप्रैल को बिहार सरकार ने सम्राट अशोक जयंती पर सार्वजनिक अवकाश दिया है।

सम्राट अशोक पर जिस लेखक (दया प्रकाश सिन्हा) ने आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है और न उनके बयान को बेवजह तूल देने की जरूरत है। भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर कोई सांस्कृतिक प्रकोष्ठ नहीं है। हम अहिंसा और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक सम्राट अशोक की कोई भी तुलना औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से करने की कड़ी निंदा करते हैं।'