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कहीं आप भी गटर का पानी तो नहीं पी रहे:पटना के हजारों घरों में हो रही काले और बदबूदार पानी की सप्लाई

पटना7 महीने पहलेलेखक: आलोक द्विवेदी
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पटना के हजारों घरों में नल से काले और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है। करीब 85 हजार लोग हर दिन काला पानी पीने को मजबूर हैं। सैदपुर, लोदीपुर और राजेंद्रनगर रोड नंबर 10, 11, 12 के घरों में यही हाल है। कई जगहों से पाइप लाइन टूटी होने के कारण पानी की लाइन में गंदा गटर का पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। जिस पानी से लोग कपड़े भी ना धोए उसे पीने को मजबूर हैं।

लोगों ने कई बार मेयर और संबंधित अधिकारियों से इसकी शिकायत की। लेकिन, समस्या ज्यों की त्यों बनी रही। ऐसे में हर घर का एक सदस्य सुबह से पानी की व्यवस्था में जुट जाता है। कोई सार्वजनिक चापाकल तो कोई पड़ोसी से पानी की व्यवस्था करता है।

दरअसल, इन इलाके सहित पटना के अधिकांश हिस्से में पानी की सप्लाई पुराने पाइप से हाे रही है। इसके साथ ही सड़काें की खुदाई की वजह से कई जगह पाइप कट गया है। इससे गंदा पानी पाइप में घुस रहा है। जिन इलाकों में साफ पेयजल पहुंच रहा है, वहां भी समस्या कम नहीं है। प्रेशर कम होने से फर्स्ट फ्लोर पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

स्कूल से छुट्टी ताे पानी की ड्यूटी
लोदीपुर का रहने वाला 10 साल की शमीम। स्कूल खुला हो तो कंधे पर बैग और बंद रहा तो दोनों हाथ में बाल्टी। सोमवार से शनिवार तक दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक और रविवार को सुबह 10 से 1 बजे तक शमीम का यही काम है कि वह सार्वजनिक चापाकल से घर के लिए पानी की व्यवस्था करे। वह यह काम पिछले सात महीने से कर रहा है। इसकी वजह से वह समय पर अपना होमवर्क पूरा नहीं कर पाता है।

बीमार होने के बाद भी ढो रहे पानी

नलों से इस तरह का काला पानी आ रहा है।
नलों से इस तरह का काला पानी आ रहा है।

लोदीपुर की अजरुम बीमार हैं। इसके बावजूद डेढ़ साल से सार्वजनिक चापाकल पर लाइन लगाकर पानी लाती हैं। इस काम में उनका बेटा भी मदद करता है। परिवार के अधिकतर सदस्य सुबह होते ही अपने काम पर चले जाते हैं। ऐसे में दोपहर में मां-बेटा परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए पेयजल की व्यवस्था करते हैं।

हर महीने पानी पर 3 हजार खर्च

इंदिरा देवी
इंदिरा देवी

पानी की जद्दोजहद कर रही इंदिरा देवी का कहना है कि सप्लाई वाटर काे पीना तो मुश्किल है ही, उससे कपड़े भी नहीं धोए जा सकते हैं। क्योंकि, पानी में झाग आता है। बदबू की वजह से उसका इस्तेमाल दूसरे काम में भी नहीं किया जा सकता है। हर महीने पीने के लिए पानी की खरीद में तीन हजार रुपए खर्च हो रहा है।

पड़ोसी की मदद से बुझ रही प्यास

रितू कुमारी
रितू कुमारी

रितू कुमारी का कहना है कि वह पड़ोसी की शुक्र गुजार हैं कि वह अपने घर से पाइप के माध्यम से पानी दे रहे हैं। उनका बेटा आयुष कुमार और वह हर दिन दोपहर के बाद पड़ोसी की मदद से ही घर का काम कर रहे हैं।

सीता साहू
सीता साहू

'कुछ इलाकों में पेयजल की दिक्कत है। इसकी शिकायत भी समय-समय पर मिलती है। कई क्षेत्रों में पाइपलाइन को दुरुस्त करवा करके लोगों के घरों तक शुद्ध पानी की सप्लाई की व्यवस्था की जा रही है। जिन इलाकों में समस्या है, वहां के कारणों की जानकारी लेकर हल किया जाएगा।'

-सीता साहू,मेयर

'सड़क की खुदाई से पेयजल सप्लाई बाधित हो गया है। इससे समस्या हो रही है। इसे ठीक करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों को कहा गया है ताकि लोगों को होने वाली परेशानी को दूर किया जा सके।'
-इंद्रदीप चंद्रवंशी, सदस्य, स्थायी समिति