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ऑनलाइन परिचर्चा:पर्यावरण को बचाने के लिए सोच में लाना होगा बदलाव

पटना16 दिन पहले
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गौरैया बचाओ, पर्यावरण बचाओ और पर्यावरण योद्धा, पटना की ओर से रविवार को ‛गौरैया और पर्यावरण’ विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा हुई। इसमें पर्यावरणविद और गौरैया संरक्षक शामिल हुए। स्पैरोमैन से विख्यात जगत कीनखाबवाला ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए इंसानों को अपनी संस्कृति, सोच और शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन लाना होगा। इंसानों ने अपनी जीवन शैली से पर्यावरण और गौरैया दोनों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। गौरैया कोई माइग्रेटरी बर्ड नहीं है, जो एक स्थान से उड़कर कहीं दूसरी जगह चली जाए। प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) पटना के निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि इंसान दो प्रकार के पर्यावरण में जीता है।

पहला शरीर के अंदर का पर्यावरण और दूसरा शरीर के बाहर का पर्यावरण। जितना अंदर के पर्यावरण को स्वच्छ और संतुलित रखने की आवश्यकता है, उतना ही बाहरी पर्यावरण को भी संतुलित रखने की जरूरत है। होम्योपैथी चिकित्सक और पीपल नीम तुलसी अभियान, पटना के संस्थापक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में देखे तो वातावरण के प्रति मनुष्यों की बौद्धिकता खत्म हो गई है। परिचर्चा के संयोजक, गौरैया संरक्षण सह पीआईबी के सहायक निदेशक संजय कुमार ने कहा कि जिस तरह से इंसानों ने लिए पर्यावरण बहुत मायने रखता है, उसी तरह से पक्षियों के लिए भी के लिए आवश्यक है।

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